रवि कुमार दहिया ने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भारत का नाम रोशन करने का लिया संकल्प  

टोक्यो 2020 रजत पदक विजेता ने 2021 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप से हटने के बाद फिर से अभ्यास शुरू कर दिया है। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

टोक्यो 2020 के रजत पदक विजेता रवि कुमार दहिया (Ravi Kumar Dahiya) ने नई दिल्ली में आयोजित चयन ट्रायल के लिए अभ्यास का समय कम मिलने के कारण नॉर्वे के ओस्लो में 2 से 10 अक्टूबर तक चली 2021 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप से हटने के बाद फिर से प्रशिक्षण शुरू करने के लिए मैट पर वापसी की है।

57 किग्रा पुरुष फ्रीस्टाइल पहलवान ने अपनी पहली ओलंपिक उपस्थिति के बाद अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है, लेकिन अगले साल राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) और एशियाई खेलों में भारत के लिए पदक जीतने के लिए अपनी कमजोरियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

दहिया ने Olympics.com को बताया, "हमने प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। लेकिन, मेरा विचार कमजोरियों पर ध्यान केंद्रित करना और आगामी प्रतियोगिताओं से पहले बेहतर तरीके से विकसित होना है।"

उन्होंने कहा, "लक्ष्य पहले एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) के ट्रायल के माध्यम से चयनित होना है। फिर दोनों स्पर्धाओं से पदक जीतने का लक्ष्य है। यह सबसे बड़ी बात होगी।"

भारत में अभ्यास करते समय भी उनका आहार शरीर की आवश्यकता के अनुसार बदलता है और 23 वर्षीय अपने पसंदीदा मीठे व्यंजन खा सकते हैं, जिसमें खीर और हलवा शामिल है।

नाहरी के पहलवान ने कहा, "आहार हर दिन अलग होता है। जब हम भारत में होते हैं, तो बिना नाश्ता किए अभ्यास होता है, क्योंकि हम सुबह 5 बजे से ही अभ्यास करना शुरू कर देते हैं। फिर हम सूखे मेवे खाते हैं और दोपहर में आराम करने से पहले दूध पीते हैं।"

टोक्यो 2020 में 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धा में रजत पदक के साथ रवि कुमार दहिया।
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

उन्होंने कहा, "शाम को अभ्यास करने से पहले मैं कुछ फल, सूखे मेवे और चिकन जरूर लेता हूं। और फिर हम रात का खाना खाते हैं। मुझे मीठे व्यंजन बहुत पसंद हैं।"

2019 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता टोक्यो 2020 में पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में दो बार के विश्व चैंपियन ROC के ज़ौर उगुएव (Zaur Uguev) से मिली चुनौती का सामना करने में विफल रहे थे। हालांकि, वह हार से बेफिक्र हैं और अपनी सहनशक्ति को बढ़ाने पर काम करना चाहते हैं।

दहिया ने कहा, "हर पहलवान की अपनी विशेष सहनशक्ति होती है और वह अपने तरीके से अद्वितीय होता है। इससे उन्हें अपने मुकाबलों में बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है।"

इसके अलावा, उनका मानना है कि भारतीय पहलवानों के लिए कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है, जो स्थानीय दंगलों (टूर्नामेंट) में मिट्टी पर प्रतिस्पर्धा करना शुरू करते हैं, क्योंकि वे बाउट के दौरान सतह के बारे में शायद ही सोचते हैं।

उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "इन दिनों मिट्टी पर कुश्ती से शुरुआत करने से कोई बड़ा फायदा नहीं है। जब आप मैट पर कुश्ती कर रहे होते हैं, तो ऐसा ही महसूस होता है।"

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