जानिए, कैसा रहा है विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन? 

सिडनी 2000 की पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी ने सर्वश्रेष्ठ आयोजन में भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीते। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

जेरेमी लालरिनुंगा (Jeremy Lalrinnunga) मंगलवार, 7 नवंबर से उज्बेकिस्तान के ताशकंद में शुरू हुई विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप (World Weightlifting Championships) में भारत की चुनौती की अगुवाई कर रहे हैं।

विश्व चैंपियनशिप खेल में सबसे पुराने आयोजनों में से एक है, जिसका पहला संस्करण केवल पुरुषों के लिए था, जो 1891 में आयोजित किया गया था। 1987 में अमेरिका के डेटोना बीच में पहला महिला आयोजन हुआ।

भले ही भारत टोक्यो 2020 की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) की सेवाओं से चूक गया है, लेकिन उन्होंने 19 भारोत्तोलकों का युवा दल भेजा है।

परंपरागत रूप से महिलाओं ने ही प्रसिद्ध आयोजन में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन किया है। चैंपियनशिप में भारत ने जीते सभी 16 पदक (3 स्वर्ण, 8 रजत, पांच कांस्य) में महिलाओं का योगदान ज्यादा रहा है। कुंजारानी देवी (फ्लाईवेट) और ललिता पोली (लाइटवेट) इंग्लैंड के मैनचेस्टर में 1989 की चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीतने वाली पहली एथलीट थीं।

ये हैं विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन:

कर्णम मल्लेश्वरी

कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari) विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, जब उन्होंने 1994 में इस्तांबुल में फेदरवेट (54 किग्रा) वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल किया।

भारतीय ने क्लीन एंड जर्क में 110 किग्रा भार उठाकर कुल 197.5 किग्रा वजन उठाया और स्वर्ण पदक जीता। चीन की ली फेंगिंग (Li Fengying) ने कुल 195 किलोग्राम भार लिफ्ट कर रजत पदक जीता।

एक साल बाद, मल्लेश्वरी ने स्टाइल में अपने खिताब का बचाव किया। उसने चीन के ग्वांगझू में चैंपियनशिप के दौरान 113 किग्रा भार उठाकर क्लीन एंड जर्क का विश्व रिकॉर्ड बनाया। मल्लेश्वरी ने कुल 202.5 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक जीता, जो कि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी से सात किलोग्राम से अधिक था।

दिग्गज भारोत्तोलक ने सिडनी 2000 में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया, उनके पास कुल चार विश्व चैम्पियनशिप पदक हैं।

उन्होंने अपने दो स्वर्ण के साथ-साथ दो कांस्य पदक (1993 मेलबर्न और 1996 वारसॉ) भी जीते।

मीराबाई चानू 

मीराबाई चानू

मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने रियो 2016 में क्लीन एंड जर्क में तीन प्रयासों में लीगल लिफ्ट दर्ज करने में विफल रही। इस निराशा से वापसी करते हुए, उन्होंने कैलिफोर्निया के अनाहेम में 2017 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता।

उन्होंने फ्लाईवेट (48 किग्रा) वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड और व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 194 किग्रा लिफ्ट करते हुए स्वर्ण पदक जीता। चानू ने 109 किग्रा भार लिफ्ट कर क्लीन एंड जर्क स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया।

विश्व चैंपियनशिप में जीत टोक्यो 2020 की उनकी यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम था, जहां उन्होंने प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीता।

कुंजारानी देवी भारोत्तोलन के खेल से सम्बंधित हैं।

कुंजारानी देवी

कुंजारानी देवी (Kunjarani Devi) विश्व चैंपियनशिप में भारत की ओर से सबसे ज्यादा पदक जीते हैं, लेकिन बदकिस्मती से, कभी भी स्वर्ण पदक नहीं जीत सकीं।

भारतीय भारोत्तोलन की 'आयरन लेडी' ने नौ साल के अंदर प्रसिद्ध आयोजन में सात रजत पदक जीते।

1989 में वह विश्व चैंपियनशिप पोडियम पर पहुंचने वाली पहली भारतीय बनीं। मणिपुर की वेटलिफ्टर ने स्नैच में 57.5 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 75 किग्रा, कुल 132.5 किग्रा भार लिफ्ट कर रजत पदक जीता। उन्होंने 1991 के डोनौशिंगेन, 1992 वर्ना, 1994 इस्तांबुल, 1995 गुआंगझोउ, 1996 वारसॉ, 1997 चियांग माई में भी रजत पदक जीता।

कुंजारानी देवी सात बार चीन की एक एथलीट से हारी हैं।

भारतीय ने पूर्व में एक साक्षात्कार में Olympics.com को बताया था, "मेरा लक्ष्य हमेशा चीनियों से मुकाबला करना था। उस समय भारत भारोत्तोलन की एक खेल के रूप में खोज कर रहा था, जबकि उनके पास पहले से ही सभी प्रणालियां और सफलता का खाका था।"

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