'इस टीम से अभी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना बाकी है'— ग्राहम रीड

भारतीय हॉकी टीम के कोच का मानना ​​है कि यह टीम और अधिक ऊंचाईयां हासिल कर सकती है।

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Getty Images

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने टोक्यो 2020 ओलंपिक में तीसरे स्थान के लिए खेले गए मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हराकर कांस्य पदक जीता। 41 साल बाद हॉकी में यह भारत का पहला ओलंपिक पदक था। हालांकि, कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) को लगता है कि इस टीम को अभी अपनी पूरी क्षमता का एहसास नहीं हुआ है।

ओई हॉकी स्टेडियम में गुरुवार सुबह खेले गए इस मुकाबले में भारत एक स्थिति में 1-3 से पीछे था, लेकिन टीम ने बहुत जल्द ही जवाब दिया और हाफटाइम में उन्होंने बराबरी कर ली। दूसरे हाफ में उनका प्रदर्शन बेहतर हो गया और बढ़त हासिल करने के लिए दो और गोल किए। जर्मनी की टीम ने चौथे क्वार्टर में एक और गोल किया, लेकिन तब तक मैच उनके हाथों से फिसल चुका था।

रीड ने कहा, "शुरू के सात-आठ मिनट को छोड़कर यह शानदार प्रदर्शन था। जर्मनी को उत्तेजित किया गया था और हमे इसका खा​मियाजा चुकाना पड़ा था। लेकिन, हमने अपनी गति पकड़ ली। यह 3-1 से पिछड़ने के बाद शानदार संघर्षपूर्ण वापसी थी। सेमीफाइनल में हार और खासकर 3-1 से पिछड़ने के बाद अधिकांश टीमों ने मानसिक रूप से संघर्ष किया होगा।

कोच रीड ने मैच के बाद कहा, "हमने धीमी शुरुआत की और थोड़ी लापरवाही भी की। लेकिन, पहले क्वार्टर के दूसरे भाग में हम सजग हो गए और सुधार नजर आया। इसमें कोई संदेह नहीं था कि हम परेशानी में थे। हमने मुकाबले से पहले इस बारे में बात की थी। हम खेल को अगले स्तर तक ले गए, आक्रमणकारी हॉकी खेली और आवश्यकता पड़ने पर गहराई में भी चले गए।" 

यह भारत के लिए एक मुश्किल मैच था, क्योंकि सेमीफाइनल में बेल्जियम के खिलाफ 5-2 से हारने के बाद वो इस मुकाबले में उतरे थे। एक ओलंपिक में रीड की टीम चौथे स्थान पर रही थी और उन्होंने अपने खिलाड़ियों को मैच के बाद के कड़वे अनुभव के बारे में चेताया था।

"सियोल 1988 ओलंपिक में (ऑस्ट्रेलिया के साथ) हम चौथे स्थान पर आए और यह अच्छा नहीं था। खिलाड़ी बहुत प्रेरित थे। उनकी मानसिकता शानदार थी। सुबह में मैंने उन्हें कांस्य पदक की तस्वीर दिखाई। मैंने उनसे कहा कि वो पदक जीतने की कल्पना करें और जब आप वास्तव में ऐसा करते हैं, तो यह बहुत ही खास क्षण होता है।

"हार के बाद पहली परेशानी मानसिकता थी, जिसके बारे में मैंने उनसे बात की और उन्हें खुद के लिए खेद महसूस नहीं होने दिया। हमने इसे पीछे रखा और सिर्फ कांस्य पदक पर ध्यान केंद्रित किया। खिलाड़ियों ने इसे जितनी जल्दी हो सके भुला दिया और वे एकजुट हो गए। यह एक टीम की पहली मानसिकता थी, जिसने हमें मदद की।"

अंतिम 15 मिनट में जर्मनी ने स्कोर के अंतर को कम करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया और केवल 30 सेकंड रहते उन्होंने पेनल्टी कार्नर अर्जित किया।

रीड ने खुलासा किया, "हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि कितना समय बचा था। हम उस समय थोड़ा विचलित थे। यह सबसे घबराहट भरा समय था। मैं बहुत आश्वस्त था, लेकिन खेल उस आत्मविश्वास को छीन लेता है। नियमों के साथ वे अभी भी कर सकते हैं, लेकिन अंतिम हूटर के बाद तनावपूर्ण हाल (हंसते हुए) था।"

भारतीय टीम लॉकडाउन के दौरान बायो-बबल में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की सुविधाओं में एक साथ रह रही थी और कोच को लगता है कि इससे टीम को अपनी मानसिकता में सुधार करने में मदद मिली है।

"पिछले 15 महीने में एक अनूठा अनुभव था। इसने हमारे मानसिक लचीलेपन को बढ़ाया। हम दबाव और तनाव में एक साथ रहे। मुझे लगता है कि इससे हमें आज दूसरे और तीसरे क्वार्टर में बहुत मदद मिली। मैं इस प्रदर्शन को 9/10 अंक दूंगा। 

 उन्होंने उल्लेख किया, "टीम भी फिट (शारीरिक रूप से) थी और हमने इसे सभी मैचों में देखा। दबाव में प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता उन्हें एक अच्छी टीम बनाती है। हमने अभी तक टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं देखा है। मुझे विश्वास है कि यह अभी आना बाकी है।" 

टोक्यो 2020 में शानदार प्रदर्शन करने वाले हरमनप्रीत सिंह (Harmanpreet Singh) ने 2019 में उनके कार्यभार संभालने के बाद से जिस तरह से उसका मार्गदर्शन किया, उसके लिए अपने कोच की सराहना की।

उन्होंने कहा, "बोर्ड पर देखने के बाद उनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला। निश्चित रूप से यह गर्व का क्षण था, जब अंतिम हूटर बजा। हम में से हर कोई जीतना चाहता था। हम जानते थे, यह मिलने के बाद हमें किसी बात का पछतावा नहीं होगा। सभी खिलाड़ियों ने अपना शत प्रतिशत दिया।

उन्होंने कहा, "कोच ने हम पर काफी विश्वास जताया है। वह साधारण हॉकी खेलने के लिए कहते हैं और सिर्फ कड़ी मेहनत पर विश्वास करते हैं।"