'नियमित प्रशिक्षण और चोटों से बचकर पेरिस 2024 में स्वर्ण पदक जीत सकते हैं बजरंग पूनिया'

अर्जुन पुरस्कार विजेता टोक्यो 2020 में बजरंग पुनिया के प्रदर्शन से हैं संतुष्ट।

लेखक भारत शर्मा
फोटो क्रेडिट GETTY IMAGES

स्टार पहलवान बजरंग पुनिया टोक्यो 2020 में पुरुषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा कुश्ती स्पर्धा में फाइनल में जगह नहीं बनाने से निराश हो सकते थे, लेकिन उन्होंने इस निराशा को कजाकिस्तान के दौलत नियाजबेकोव के खिलाफ कांस्य पदक के लिए खेले गए प्ले-ऑफ मुकाबले में अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और 8-0 से शानदार जीत हासिल की।

नंबर दो की काबिलियत पूनिया में पूरी तरह से दिखाई दी और उन्होंने कजाकिस्तान के पहलवान को कभी भी एक अंक हासिल करने या बाउट के दौरान उन्हें नुकसान पहुंचाने का काई मौका नहीं दिया। 

झज्जर के 27 वर्षीय खिलाड़ी को सेमीफाइनल में अजरबैजान के हाजी अलीयेव से 12-5 से हार का सामना करना पड़ा, जो आश्चर्यजनक परिणाम था।

अर्जुन पुरस्कार विजेता रोहतास सिंह दहिया ने Olympics.com से कहा, "मुझे लगता है कि यह एकतरफा मुकाबला था और बजरंग ने अपने प्रतिद्वंद्वी को पूरी तरह से धराशाही कर दिया। वह शुरू से ही आक्रामक थे और आक्रामक इरादे से खेलते थे। बजरंग ने उन्हें हर क्षेत्र में मात दी। वह अंत तक आक्रमण करते रहे।"

लॉस एंजिल्स 1984 में फ़्रीस्टाइल 57 किग्रा स्पर्धा में हिस्सा लेने वाले दहिया ने उल्लेख किया कि पूनिया को बेहतर प्रशिक्षण के लिए थोड़ा समझदार बनना होगा और ओलंपिक जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं से पहले चोटों के चोखिम से बचने का प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि पुनिया अपने 100 प्रतिशत सर्वश्रेष्ठ पर होते तो वह एक स्वर्ण या कम से कम एक रजत पदक घर लाते।

दहिया ने कहा, "बजरंग टोक्यो 2020 से पहले चोटिल हो गए थे, नहीं तो वह गोल्ड मेडल मैच के लिए लड़ते। यह उनका दुर्भाग्य था। वह टोक्यो 2020 में स्वर्ण या रजत पदक के दावेदार थे, लेकिन मैं वास्तव में उनके प्रदर्शन से संतुष्ट हूं, क्योंकि उन्होंने देश के लिए पदक हासिल किया है।"

उन्होंने आगे कहा, "यहां से अगर वह ठीक से प्रशिक्षण जारी रखते हैं और चोटों से बचते हैं तो अनुभव के साथ वह परिपक्व होना शुरू कर देंगे और बेहतर तरीके से मुकाबला करेंगे। ओलंपिक से बड़ा कोई खेल नहीं है और खेलों में तीसरे स्थान पर आने से उन्हें खुद में और बेहतर तरीके से सुधार करने में मदद मिलेगी।"