अपने को 'भारत का माइकल फेल्प्स' कहलाना पसंद करेंगे पैरा-तैराक निरंजन मुकुंदन   

मुकुंदन पहली बार टोक्यो में होने वाले पैरालंपिक में हिस्सा लेंगे।

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट @SwimmerNiranjan/Twitter

*भारतीय पैरा-तैराक निरंजन मुकुंदन (Niranjan Mukundan) *का जन्म स्पाइना बिफिडा बीमारी के साथ हुआ, जिसमें रीढ़ और रीढ़ की हड्डी ठीक से विकसित नहीं होती। मुकुंदन को बहुत छोटी उम्र में ही 19 सर्जरी से गुजरना पड़ा। 

टोक्यो पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले निरंजन ने योजना के अनुसार तैराकी को नहीं चुना था। 

प्रारंभिक सर्जरी के बाद एक डॉक्टर ने उन्हें अपने पैरों को मजबूत करने के लिए घुड़सवारी करने या एक्वा थेरेपी के लिए तैराकी शुरू करने की सलाह दी। तभी पानी में उनकी कोशिश शुरू हुई और यह तुरंत पसंद बन गया। 

मुकुंदन ने Olympics.com को बताया, "मुझे तैराकी या घुड़सवारी को आजमाने के लिए कहा गया था। वास्तव में मैं घोड़े पर बैठने से डरता था। इसलिए, मैंने पूल में उतरने और तैरना शुरू कर करने के बारे में सोचा। इस तरह मैंने सात या आठ साल की उम्र में तैराकी शुरू की।"  

"तैराकी ने मुझे आज़ादी दी है। क्योंकि, मैं बचपन में लकवाग्रस्त था और हर जगह मुझे मेरे माता-पिता ले जाते थे। लेकिन, पानी में मैं एक से दूसरी जगह खुद जा सकता था। इससे मुझे एक से दूसरी जगह जाने की आजादी मिली।  

उन्होंने कहा, "एक तो यह बात थी। मैंने पानी पर खुद को स्वतंत्र महसूस किया, लेकिन जमीन पर मैं एक से दूसरे स्थान पर जाने में खुद से सक्षम नहीं था। यह मेरे लिए तैराकी को चुनने का एक कारण रहा है।" 

बेंगलुरू के पैरा-तैराक की प्रतिभा को उनके कोचों ने देखा और उन्होंने महसूस किया कि उन्हें खेल से परिचय कराया। अपने माता-पिता के सपोर्ट से मुकुंदन ने तैराकी में अपने शानदार करियर की शुरुआत की।

भारतीय पैरालंपिक तैराक निरंजन मुकुंदन।
फोटो क्रेडिट @SwimmerNiranjan/Twitter

तब से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 50 से अधिक पदक हासिल किए हैं और 2015 में जूनियर विश्व चैंपियन बने। हालांकि, 50 मीटर बटरफ्लाई श्रेणी के पैरा-तैराक की बड़ी परीक्षा आगामी टोक्यो पैरालंपिक में होगी। 

मुकुंदन अब तक के सबसे सफल ओलंपियन दिग्गज तैराक माइकल फेल्प्स (Michael Phelps) को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। 

मुकुंदन ने कहा, "माइकल फेल्प्स सर्वकालिक महानतम तैराक हैं। कोई भी उनका रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया है। मैं उनसे प्रेरणा लेना चाहता हूं। मैं पैरा-तैराकी की दुनिया में उनके जैसा बनना पसंद करूंगा। मैं एक से अधिक खेल पदक विजेता रहा हूं। लेकिन, पैरालंपिक में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं।"  

"भविष्य में मैं भारत का माइकल फेल्प्स कहलाना पसंद करूंगा।" 

इसके अलावा जूनियर विश्व चैंपियन के लिए भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) भी प्रेरणा के स्रोत रहे हैं। क्योंकि, वह उनसे अक्सर मिलते हैं। 

मुकुंदन ने कहा, "मैंने राहुल द्रविड़ के साथ बहुत बातचीत की है। उनके धैर्य, शांत और संयम वाले गुण को मैं उनसे सीखना चाहता हूं। उन्हें क्रिकेट खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ और वह जो शांत और संयम बनाए रखते हैं, वह कुछ ऐसा है जिसे मैं ग्रहण करना चाहता था।"  

हालांकि, 26 वर्षीय पैरालंपिक में प्रतिस्पर्धा की कठिनाई को समझते हैं और अपनी तैयारी में एक समय में एक दिन ले रहे हैं। इस प्रकार उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में 50 मीटर बटरफ्लाई फाइनल के लिए क्वालीफाई करने को अपना यथार्थवादी लक्ष्य माना है। 

फेल्प्स और द्रविड़ से ली गई प्रेरणा से, वह अपने लक्ष्य को अच्छी तरह से प्राप्त कर सकते हैं और आगे बढ़ सकते हैं।