कराटे कैसे सीखें: जानिए जापानी मार्शल आर्ट तकनीक को सीखने का तरीका

कराटे में मानव शरीर पंच, ब्लॉक और किक की तकनीकों के जरिए आत्मरक्षा के सबसे प्रभावशाली तरीके सीखता है। यह किसी व्यक्ति के तन और मन दोनों को संतुलित करता है।

लेखक रितेश जायसवाल
फोटो क्रेडिट 2020 Getty Images

कराटे एक जापानी मार्शल आर्ट तकनीक है, जिसमें अपनी रक्षा के लिए किए जाने वाले हमले और जवाबी हमले के लिए किए जाने शारीरिक मूवमेंट को समान रूप से विकसित करने की आवश्यकता होती है। हालांकि यह खेल एक व्यक्ति को हमला करने और आत्मरक्षा की कला सिखाता है, लेकिन इसका एकमात्र मकसद आत्म-सुधार है। कराटे में मुकाबला जीतना ही एकमात्र लक्ष्य नहीं है। इसमें मानव शरीर ब्लॉक, पंच और किक की तकनीकों के जरिए आत्मरक्षा के सबसे प्रभावशाली तरीके सीखता है।

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कराटे में अनुशासन, दिमागी संतुलन और नियमित रूप से सीखने की ललक को जारी रखना इसके कुछ अहम पहलू हैं। कराटे में 'कारा’ शब्द का अर्थ है खाली और ‘ते’ का अर्थ है हाथ। कराटे के बाद ‘डो’ जोड़ देने से कराटे-डो हो जाता है, जिसका अर्थ खाली हाथों से खुद का बचाव करना होता है। दिवंगत महान गिचिन फुनाकोशी को शोटोकान कराटे का जनक माना जाता है।

वैसे तो माना जाता है कि कराटे की उत्पत्ति जापान के 'ताए' और चीन के 'कुंग फू' से हुई है। लेकिन ये जापानी ही थे, जिन्होंने इस कला को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने में बड़ा योगदान दिया है। इसलिए इस खेल में कुछ जापानी शब्दों का शामिल होना स्वाभाविक है। कराटे कैसे सीखते हैं, इसकी शुरुआत करने वाले को इस खेल को समझने के लिए पहले कुछ जापानी शब्दों का अर्थ जरूर सीखना चाहिए।

शब्द अर्थ
काज़ू नंबर
ताचीकाता स्टान्स
यूटेकाता ब्लॉक करने के तरीके
सेमेकाता अटैक करने के तरीके
केरिकाका किक मारने के तरीके
काता फॉर्म
अटेमी स्ट्राइक
डेशी छात्र
डोजो अभ्यास करने की जगह
हई हां
हिदारी बाएं
इया नहीं
ओबी कराटे बेल्ट

कराटे सीखने की उम्र

अक्सर लोग किसी भी उम्र में कराटे सीखना शुरू कर देते हैं। कराटे कैसे सीखते हैं? हालांकि, इसपर जानकारों का कहना है कि बेहतर होगा यदि आप 5 से 6 साल की उम्र में कराटे सीखना शुरू करें।

जापान कराटे एसोसिएशन के इंस्ट्रक्टर सोमनाथ पाल चौधरी ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा, "यदि एक व्यक्ति 5 से 6 साल की उम्र में कराटे सीखना शुरू करता है तो वह इस खेल को अपने अंदर बैठा लेता है। वहीं किसी वयस्क के लिए ऐसा करना मुश्किल होता है।"

"इस खेल में शारीरिक ताकत भी लगती है। 4 से 5 साल की उम्र में शरीर बेहद लचीला होता है और ऐसे में हम किसी को आसानी से एक अच्छा एथलीट बना सकते हैं।"

कराटे कैसे सीखें

कराटे के अपने आप में कई रूप हैं, जैसे गोजू काई, शोटोकान, शितो रयू, वाडो रयू और क्योकुशिन काई आदि। ऐसा नहीं है कि एक स्टाइल/शैली दूसरे से बहुत बेहतर है। हर स्टाइल का अपना एक रूप होता है। यह एक छात्र को तय करना होता है कि उसे कराटे की कौन सी स्टाइल बेहतर लगती है और वह किसे सीखना चाहता है। इसके बाद उसे तय करना चाहिए कि उसे किस स्कूल में कराटे सीखना शुरू करना है।

एक सफल कराटेका बनने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि कराटे कैसे सीखते हैं। इसके लिए आपके साथ एक अच्छे मास्टर और डोजो का होना बहुत जरूरी है। इस खेल में शुरुआती गुण सीखने के बाद उसे अभ्यास में लाकर अपनी कला को तराशना सबसे अहम होता है।

इस खेल को सीखना शुरू करने से पहले खुद को तैयार करें, जिसके लिए आपको वार्म-अप करना और स्ट्रेच करना बहुत जरूरी होता है।

वार्म-अप: ऐसा करना आपकी मांसपेशियों के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। अगर आप कराटे की ट्रेनिंग करने से पहले मांशपेशियों में लचीलापन नहीं लाएंगे तो ये आपको किसी क्रिया को आसानी से करने में बाधा उत्पन्न करेंगी।

यूएसए कराटे स्पोर्ट्स परफॉर्मेंस कोच ने एक वेबसाइट से बात करते हुए कहा, "कराटे के लिए आपको खास बॉडी बिल्डिंग एक्सरसाइज करने की जरूरत नहीं है। इसमें सब फंक्शनल एक्सरसाइज करनी होती है। इसके लिए चुनी गई प्रत्येक एक्सरसाइज का एक ही उद्देश्य है कि कोई कराटेका डोजो या रिंग में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके।"

स्ट्रेच: वॉर्म-अप के बाद स्ट्रेच करना आता है। एक बार मांसपेशियों में लचीलापन आने के बाद स्ट्रेच करने से शरीर के मूवमेंट करने की क्षमता बढ़ती है।

सोमनाथ पाल चौधरी ने कहा, "आपके समझने की ताकत ही कराटे में कोच का काम करती है। इस खेल में अमूमन तीन टीचर होते हैं - आपका शरीर, आंखें और कान। सेल्फ ट्रेनिंग सेल्फ-रियलाइजेशन के समान होती है। मेरी ताकत क्या है, मेरी कमी क्या है? शारीरिक भाषा, कराटे फिगर, गति, लय, स्टेमिना को बढ़ाने की ट्रेनिंग, प्रतिरोध की ट्रेनिंग और कंडीशनिंग जैसी चीजों की बहुत जरूरत होती है। यह सब कुछ डोजो में कुछ घंटो के अभ्यास के साथ नहीं सीखा जा सकता है।"

कराटे के प्रकार

कराटे के तीन प्रकार हैं - कीहोन, काता/काटा और कुमीत/कुमाइट। इन तीनों हिस्सों के बिना कराटे का कोई अस्तित्व नहीं है।

कीहोन: जापानी भाषा में इसका मतलब मूल बातें होता है यानी कराटे सीखने की मूल या शुरुआती तकनीकें। इसमें पंच, किक, स्टांस और अन्य तकनीकें शामिल होती हैं, जिन्हें कराटे के सभी छात्र सीखते हैं। हालांकि ये तकनीकें आपके लिए तब तक जरूरी साबित नहीं होंगी जब तक आप यह नहीं समझते कि वास्तविक लड़ाई में उपयोग के लिए उन्हें एक साथ कैसे जोड़ा जाए। इसके बाद कराटे में काटा और कुमाइट आते हैं। ये प्रत्येक पहलू दूसरे से काफी अलग है, लेकिन कराटे के छात्र के रूप में आपके सीखने के लिए दोनों ही जरूरी हैं।

काता/काटा: जापनी भाषा में काटा शब्द का मतलब फॉर्म (रूप) है। इसमें हर एक काटा कुछ खास मूवमेंट का एक सेट होता है, जो हर बार एक ही तरह से किया जाता है। आमतौर पर छात्रों को अगले बेल्ट के स्तर पर जाने के लिए कम से कम एक काटा को सीखना और उसका सही से प्रदर्शन करना होता है। ऐसे में एक छात्र एक सफेद बेल्ट काटा से शुरुआत करते हुए सबसे शीर्ष ब्लैक बेल्ट काटा तक जा सकता है।

कुमीत/कुमाइट: कराटे के छात्र काटा को अकेले करते हैं, वहीं कुमाइट का उपयोग वास्तविक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ लड़ने के लिए किया जाता है। इसमें छात्रों को एक-दूसरे के सामने लाया जाता है और फिर उनपर तकनीकों का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है, जिससे छात्र यह समझ सके कि एक वास्तविक लड़ाई में एक तकनीक कैसे काम करेगी। काटा में सीखी गई कई तकनीकें कुमाइट में नजर आती हैं, क्योंकि छात्र जो सीखता है उसे यहां व्यवहार में लाता है। 

कराटे के नियम

कराटे काटा को 8x8 मीटर की न फिसलने वाली मैट पर प्रतियोगियों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, जो इवेंट के दौरान सफेद कराटेगी (कराटेका की पोशाक) पहनकर खड़े होते हैं।

एक काटा प्रतियोगिता तीन लोगों की एक टीम में या एक व्यक्तिगत बाउट के तौर पर हो सकती है। वहीं प्रतिभागियों की संख्या ही एलिमिनेशन राउंड के लिए स्थापित किए जाने वाले समूहों की संख्या निर्धारित करती है।

नियमित तौर पर कराटे काटा प्रतियोगिताओं में प्रतिभागी जोड़ी बनाकर प्रदर्शन करते हैं और उन्हें नीली या लाल बेल्ट दी जाती है। जब दोनों प्रतियोगी अपने-अपने काटा मूव्स का प्रदर्शन कर लेते हैं तो पांच जज अपने विजेता को चुनने के लिए फ्लैग सिस्टम (नीले या लाल ध्वज) का उपयोग करते हैं।

टाई-ब्रेकर राउंड में प्रतियोगियों को एक ही राउंड में किसी भी काटा मूव का दोबारा इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है।

विश्व कराटे महासंघ (WKF) द्वारा स्थापित नियमों के अनुसार, "काटा नृत्य या नाट्य प्रदर्शन नहीं है। इसमें पारंपरिक मूल्यों और सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। लड़ाई के दौरान यह अपने मूल रूप में ही होना चाहिए और इसकी तकनीकों में एकाग्रता, शक्ति और संभावित प्रभाव को प्रदर्शित करना चाहिए। यह सही मायने में शक्ति, ताकत और गति को प्रदर्शित करना होता है। इसके साथ ही साथ इसमें अनुग्रह, लय और संतुलन भी होना जरूरी है।”

प्रतियोगियों का आकलन 70 फीसदी तकनीकी प्रदर्शन के लिए और 30 फीसदी एथलेटिक प्रदर्शन के लिए किया जाता है। जिन प्रतियोगियों को उनके पक्ष में ज्यादा झंडे दिखाए जाते हैं, उन्हें ही विजेता घोषित किया जाता है।

भले ही अस्तित्व में काटा के कई रूप हैं, लेकिन विश्व कराटे फेडरेशन ने 102 काटा मूव्स को इस्तेमाल करने की इजाजत दी है और इन्हें WKF मान्यता प्राप्त इवेंट्स में ही प्रदर्शित किया जाता है।

पाल चौधरी ने समझाते हुए इस बाबत कहा, “प्रतिभागियों की तकनीकों में काटा का सही एटीट्यूड (तरीका), क्षमता, सटीकता, समझ और जानकारी जैसे बुनियादी पहलुओं के जरिए आंका जाता है। सही एटीट्यूड का मतलब है कि जब कोई खिलाड़ी खेल क्षेत्र में आता है, तो उसकी स्पिरिट, आंखे, आसन और उसकी मन की स्थिति बहुत मायने रखती हैं।”

ताकत और संतुलन

कराटे में संतुलन और ताकत की काफी जरूरत होती है। यही वजह है कि कराटे में स्टांस को काफी महत्व दिया जाता है। कराटे में अपने गुरुत्वाकर्षण केंद्र के बारे में हमेशा ध्यान रखें। जब आप अपने पैर फैलाते हैं तो गुरुत्वाकर्षण केंद्र नीचे आ जाता है, जिससे आपको संतुलन के साथ हमले के लिए जोश मिलता है। बहुत से लोग सौ किलो या उससे अधिक वजन उठाने में सक्षम हो सकते हैं लेकिन वह कराटे में बेहतर नहीं हो सकते हैं। यह आपकी मांसपेशियों के बारे में नहीं है - यह संतुलन, ताकत और गति के बेहतर संबंध के बारे में है।  

स्टान्स: नेचुरल या वाकिंग स्टांस (शिजेंटाई-दाची): एक पैर आगे की ओर और दूसरा पैर 45 डिग्री के कोण पर बाहर की तरफ।

फ्रंट स्टांस (ज़ेनकुत्सु-दाची): ठीक नेचुरल स्टांस की तरह, लेकिन इसमें आपके पैर और दूर होते हैं। इसके साथ ही आपका ज्यादातर वजन आपके सामने वाले पैर पर होता है।

बैक स्टांस (नेकोशी-दाची): इसमें अपने पैरों को चलने की स्थिति में रखें, लेकिन आपका ज्यादातर वजन आपके पिछले पैर पर रहे। इसके साथ ही अपनी एड़ी को सामने की तरफ उठाएं। इसे कैट स्टांस के तौर पर भी जाना जाता है।

कराटे के मूव्स

कराटे मूव्स में मूल रूप में तीन चीजों का संयोजन होता है - पंच, ब्लॉक और किक। चोकू ज़ुकी एक जापानी शब्द है, कराटे में जिसका अर्थ सीधा पंच करना होता है। यह पंच या मुक्का मारने का सबसे सामान्य रूप है, क्योंकि इसके लिए आपके शरीर के अंग में अधिक गति की आवश्यकता नहीं होती है। स्ट्रेट पंच के अलावा अपर-कट, नाइफ-हैंड, स्पियर-हैंड, एल्बो-स्ट्राइक और बैक फिस्ट जैसे अन्य पंच होते हैं।

ब्लॉक करना हमें सिखाता है कि आगे से आ रहे पंच को कैसे रोका जाए। इसमें अपनी सामान्य स्थिति से या तो अपने कदम आगे बढ़ाएं या पीछे हटें। कराटे ब्लॉक दो तरह के होते हैं - अपर राइजिंग ब्लॉक (एज युके) और मिडिल ब्लॉक (योको युके)।

इसके बाद कराटे सीखने में किक का सबसे अहम योगदान होता है। कभी-कभी आपका ऊपरी शरीर हिलने में सक्षम नहीं होता है, क्योंकि आपके प्रतिद्वंद्वी ने आपको रोक रखा होता है। ऐसे में खुद छुड़ाने के लिए आप अपने पैरों का उपयोग कर सकते हैं। कराटे किक भी कई तरह की होती है लेकिन सामान्य तौर पर हाई किक, स्नैप किक और फ्रंट किक ज्यादा इस्तेमाल की जाती हैं।

सलाह और चेतावनी

कराटे में अपने प्रतिद्वंद्वी पर वार करते समय हमेशा तनावमुक्त रहना चाहिए। ब्रुस ली कहते हैं, "तनावमुक्त रहना तेज और ताकतवर पंच लगाने के लिए बहुत जरूरी है।"

अपनी बॉडी को स्ट्रेच करते समय शरीर के हर अंग को स्ट्रेच करें। लगातार अभ्यास करते रहना जारी रखें और अभ्यास के दौरान शुरुआत में आप ध्यान लगाने या मन को शांत करने की कोशिश करें। अपने प्रतिद्वंद्वी को कभी भी अपने से कम या ज्यादा न समझें। सुनिश्चित करें कि आपका निचला शरीर पूरी तरह से नियंत्रण में रहे। हमेशा सभी नियमों का पालन करें और सावधानी रखें।

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