कैसे भारतीय पहलवान सीमा बिस्ला अपने लिए उपयुक्त भारवर्ग चुना?

हरियाणा की पहलवान ने 50 किग्रा कुश्ती भार वर्ग में ओलंपिक कोटा हासिल किया है।  

लेखक भारत शर्मा

सबसे उपयुक्त भार वर्ग खोजने की प्रक्रिया कुश्ती का एक पहलू है, जिसे सही मायने में जल्दी तलाश कर लेना चाहिए। इसके बाद उस वर्ग में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए जरूरी कौशल को सुधारने में वर्षों लग जाते हैं। लेकिन, 29 साल की भारतीय पहलवान सीमा बिस्ला (Seema Bisla) को अपने लिए सही भार वर्ग खोजने में काफी समय लगा।

2018 में वो आखिरकार 50 किलोग्राम भार वर्ग की महिलाओं की फ्रीस्टाइल स्पर्धा में शामिल हो गईं। भारवर्ग बदलने की प्रक्रिया को खत्म करने के ठीक तीन साल बाद वह 23 जुलाई से शुरू होने वाले टोक्यो 2020 में अपने पहले ओलंपिक में भाग लेने के कगार पर हैं।

इन तीन सालों में वो एक अज्ञात अंडरडॉग से टोक्यो दल में चार भारतीय महिला पहलवानों में से एक के रूप में उभरी हैं। लेकिन, उनके करियर की शुरुआत में वजन बदलने में गुजरे तीन साल ने उन्हें बेहतर सीख दी।

2009 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में 46 किग्रा भार वर्ग स्पर्धा में भाग लिया था। यूथ इवेंट के 2012 संस्करण तक वो 21 किग्रा वजन बढ़ाकर 67 किग्रा भारवर्ग में पहुंच गईं थी। हालांकि, यह तेजी से बदलाव गर्दन की चोट के कारण था।

उस समय उनके कोच परमजीत सिंह ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा था, "उसने वजन बढ़ाया, क्योंकि डॉक्टरों ने इसे छोड़ने की सलाह दी थी। उसके पास ताकत कम थी, क्योंकि वह 53 किग्रा से 67 किग्रा में शिफ्ट हो रही थी। इसलिए, हमें उसकी मूलभूत ताकत को बढ़ाने के लिए काम करना पड़ा।"

 उस समय वह एक जूनियर पहलवान थीं। जब उसने सीनियर डिवीजन में प्रवेश किया, तो वह पदानुक्रम से नीचे थी। उसे विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) और 2016 के रियो खेलों की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक (Sakshi Malik) द्वारा खाली छोड़ी गई, जगह पर कब्जा करना पड़ा।

इसलिए, उन्हें 55 किग्रा, 53 किग्रा और 50 किग्रा भार वर्ग में सालों तक बिना किसी अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दिखावटी तौर पर दिलचस्पी लेनी पड़ी। हालांकि, 2018 तक फोगाट ने 53 किग्रा स्पर्धा में स्थायी बदलाव किया और 50 किग्रा वर्ग में बिस्ला के लिए रास्ता खुला छोड़ दिया। उसने इसे चुना और इसका अधिकतम फायदा उठाया।

2019 में, उन्होंने माटेओ पेलिकोन और यासर डोगू स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते।

परमजीत ने कहा, "फ्रीस्टाइल में मुकाबला लेग अटैक और लेग डिफेंस पर निर्भर करता है और एक बार जब वह 50 किलोग्राम वजन वर्ग में आ गई, तो इससे हमें लंबे समय के लिए योजना बनाने में मदद मिली।"

जब उसने विश्व ओलंपिक खेलों के क्वालीफायर के लिए सोफिया, बुल्गारिया की यात्रा की, तो निचले शरीर पर हमले और बचाव पर हावी होने से फर्क पड़ा। उन्होंने टोक्यो कोटा हासिल करने के लिए पौलेंड की पहलवान अन्ना लुकासीक (Anna Lukasiak) को लेग अटैक से हराया।

कभी एक से दूसरा भार वर्ग बदलने वाली बिस्ला अब ओलंपियन बनने के लिए तैयार हैं।

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