जानिए, कैसे हरमिलन बैंस ने तीन साल में 1500 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के लिए अपने समय में किया सुधार ? 

बैंस ने 60वीं राष्ट्रीय ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर में लंबे समय से चले आ रहे राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Athletics Federation of India

हरमिलन बैंस (Harmilan Bains) ने एक हफ्ते पहले 60वीं राष्ट्रीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप (60th National Athletics Championships) में लंबे समय से चले आ रहे 1500 मीटर राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ा था। पूरी तरह से फिट नहीं होने के कारण उसने अपने स्पाइक्स में बहुत कम प्रशिक्षण लिया था। वह अपने करतब को किसी चमत्कार से कम नहीं मानती हैं, लेकिन यह भी जानती हैं कि यह उनके माता-पिता की निरंतर जिद और प्रेरणा के बिना संभव नहीं होता।

बैंस ने Olympics.com को बताया, "हर एथलीट के पास राष्ट्रीय रिकॉर्ड हासिल करने का रिकॉर्ड है। मेरा पास भी वही था। मैं राष्ट्रीय रिकॉर्ड के करीब थी और पिछले दो सालों से बहुत मेहनत कर रही थी और आखिरकार मैंने इसे कर दिया। लेकिन, इस बार यह एक चमत्कार था।"

उनका 4:05.39 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड समय, जो कि विश्व चैंपियनशिप के क्वालिफिकेशन मार्क 4:04.20 से थोड़ा कम था। मार्च, 2018 में पटियाला फेडरेशन कप में 4:21.19 के समय के बाद से उन्होंने लगातार सुधार किया था।

2015 से 2017 तक उनके पूर्व कोच जसविंदर सिंह भाटिया (Jaswinder Singh Bhatia) के अधीन प्रशिक्षण लेने के बाद उनके वर्तमान कोच सुरेश कुमार सैनी (Suresh Kumar Saini) द्वारा उपयोग किए गए बेहतर तरीकों के कारण यह काफी हद तक संभव हुआ था।

इसके अलावा, घुटने के दर्द के कारण उन्हें 2017-18 सीज़न को छोड़ना पड़ा। क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें दौड़ से दूर रहने की सलाह दी। उनका मानना था कि इससे उनका करियर बहुत छोटा हो जाएगा। लेकिन, धर्मशाला में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के प्रशिक्षण केंद्र में एक रसोइया ने उन्हें जोड़ों के दर्द से उबरने में मदद की।

हरमिलन बैंस 
फोटो क्रेडिट Athletics Federation of India

बैंस ने समझाया, "मैं अपने कोच भाटिया (जसविंदर सिंह भाटिया) का अनुसरण कर रही थी। उसके बाद 2019 से अब तक मैं सुरेश कुमार सैनी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हूं। यह कहा जा सकता है कि वह मेरी कमजोरी को जानते थे और उन्होंने मेरे रनिंग एक्शन पर काम किया। मेरा पहले कोच ने कभी नहीं कहा कि मेरी पीठ बहुत हिलती है और उसमें ताकत नहीं है या अगर आप अपने कंधे में सुधार करते हैं, तो आप कम से कम चार सेकंड का समय कम कर सकते हैं।"  

"कोच सैनी ने सभी तकनीकी पहलुओं को करीब से देखा, जबकि मेरे दूसरे कोच ने कभी भी सहनशक्ति पर इतना ध्यान नहीं दिया। दूसरे कोच लगभग 16 से 20 किलोमीटर दौड़ने के लिए कहते थे, लेकिन ये (सुरेश कुमार सैनी) पूरी तरह से अलग हैं क्योंकि हम शायद ही कभी सड़क पर दौड़ते हैं। उन्होंने मेरी ताकत में सुधार किया और मेरी कमजोरियों को देखा। जबकि, मेरे पिछले कोच ने कहा था कि मैं केवल 1500 मीटर का लक्ष्य रखूं और उसे 800 मीटर में भाग नहीं लेना चाहिए। 

उन्होंने कहा, "लेकिन कोच सैनी ने मुझ पर विश्वास दिखाया और कहा कि हम आपकी गति में सुधार कर सकते हैं। लेकिन आपकी ताकत में कमी है। उन्होंने मेरी गति में बड़े बदलाव लाए। मैं 2015 से 2017 तक पिछले कोच के साथ केवल इसी तरह के वर्कआउट करती थी, लेकिन अब कोच सैनी के नेतृत्व में मैं विशेष रूप से अपने शरीर के अनुसार कसरत करती हूं। यह कड़ी मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क जैसा था। अगर, आपको एक आदर्श कोच और एथलीट का संयोजन मिलता है, तो सुधार होना तय है।" 

23 वर्षीय बैंस अब पूर्व एथलीट रहे अपने माता-पिता के साथ विदेश में प्रशिक्षण को लेकर चर्चा कर रही हैं। संभावना है कि वह आने वाले महीनों में कनाडा में प्रशिक्षण के लिए अपने समय में सुधार करने और विश्व चैंपियनशिप के मार्क को तोड़ने के लिए जा सकती हैं।

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