हॉकी: जानिए, टोक्यो 2020 में भारतीय टीमों का कैसा रहा प्रदर्शन?

भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने सेमीफाइनल में पहुंचते ही देश को भावुक कर दिया। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

भारत का खेल इतिहास गहन रूप से हॉकी से जुड़ा हुआ है। टोक्यो 2020 से पहले देश ने इस खेल में आठ स्वर्ण सहित कुल 11 पदक जीते थे। 

मॉस्को 1980 ओलंपिक में अपना आखिरी पदक जीतने के बाद से भारत ने खेल की दमदार टीमों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए संघर्ष किया है। कई निराशाओं और उतार-चढ़ाव के बाद पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने टोक्यो 2020 ओलंपिक को यादगार बना दिया है। 

*ऐसा रहा टोक्यो 2020 में दोनों टीमों का प्रदर्शन: *

पुरुष टीम: 1980 के बाद पहला पदक

1980 के बाद से भारतीय टीम पुरुषों की हॉकी में पांचवें स्थान से ऊपर नहीं पहुंची।  

लेकिन, टोक्यो में मनप्रीत सिंह (Manpreet Singh) और उनकी टीम के मैदान में उतरते ही सब कुछ बदल गया। टीम बेहतर तरीके से तैयार, रणनीतिक रूप से जागरूक और तकनीकी रूप से मजबूत थी। क्योंकि, वे इस खेल में भारत के इतिहास का एक और शानदार अध्याय की पटकथा लिखने जा रहे थे। 

भारतीय पुरुष टीम ने ग्रुप चरण को पांच मुकाबलों में से चार में जीत के साथ समाप्त किया। उन्हें एकमात्र हार पूर्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से मिली। 

उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन पर 3-1 से जीत के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश किया। हालांकि, भारत सेमीफाइनल में बेल्जियम (2-5) से हार गया, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक जीतने के लिए संयमित शैली में वापसी की। 

भारत दूसरे क्वार्टर में एक स्थिति पर जर्मनी से 1-3 से पीछे था, लेकिन उन्होंने जल्द ही स्थिति को पलट दिया। सात मिनट में चार गोल करके 5-3 की बढ़त बना ली। हालांकि, जर्मनों ने 48वें मिनट में अंतर को 4-5 कर दिया, लेकिन भारत ने कम बढ़त के साथ कांस्य पदक जीता। 

यह 41 साल बाद हॉकी में भारत का पहला पदक था।

*महिला टीम: पहली बार सेमीफ़ाइनल *

दुनिया में चौथे नंबर की पुरुष टीम से अगर टोक्यो में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद की जाती, तो महिलाओं ने छलांग लगाते हुए सेमीफाइनल में पहुंचकर सभी को चौंका दिया। 

उन्होंने कुछ मुकाबलों में हार के साथ शुरुआत की थी। इनमें नीदरलैंड के खिलाफ 1-5 और जर्मनी के खिलाफ 0-2 की हार शामिल थी। लेकिन, भारत ने आयरलैंड को 1-0 से हराया और दक्षिण अफ्रीका का पीछा करते हुए 4-3 से जीत हासिल की, जिसमें वंदना कटारिया (Vandana Katariya) ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने प्रतियोगिता में टीम के बने रहने और क्वार्टरफाइनल में पहुंचने में मदद की।  

पुरुषों की टीम का खेल में लंबा इतिहास रहा है, इसकी तुलना में महिलाएं नौसिखिया थीं। भारतीय महिला टीम ने तीसरी बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था और पहली बार लगातार ओलंपिक में उपस्थिति दर्ज की थी।

लेकिन, यह बात कोई मायने नहीं रखती थी, क्योंकि भारत ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराया था। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। संभवत: पहली बार भारतीय टीम में गुरजीत कौर (Gurjit Kaur) के रूप में स्पेशलिस्ट ड्रैग फ्लिकर शामिल थी। हालांकि, वह ग्रुप चरण में अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहीं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले में कौर ने 22वें मिनट में भारत की जीत के लिए एकमात्र पेनल्टी कार्नर को गोल में बदल दिया। 

सविता पूनिया (Savita Punia) गोल में शानदार थीं। क्योंकि, उन्होंने आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के नौ पेनल्टी कार्नर प्रयासों को विफल कर दिया। भारतीय टीम के लिए गोल का बचाव 1-0 से विजेता बनने के लिए उन पर निर्भर था। 

उनके पास दिखाने के लिए कोई पदक नहीं था, क्योंकि उन्हें कांस्य पदक के मैच में ग्रेट ब्रिटेन से 4-3 से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस टीम ने भारत में महिला हॉकी के लिए एक रास्ता बनाया था।