बजरंग पूनिया के पिता को पेरिस 2024 ओलंपिक में बेटे से बड़ी सफलता की उम्मीद, कहा- 'उन्होंने मेरे सपने पूरे किए'   

पूनिया ने टोक्यो 2020 में अपनी पहली ओलंपिक उपस्थिति में कांस्य पदक जीता। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
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बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) ने जब टोक्यो 2020 ओलंपिक में कुश्ती मैट पर कदम रखा, जो उनसे काफी उम्मीदें थीं। घुटने की चोट से परेशान 27 वर्षीय 65 किग्रा भारवर्ग के फाइनल में पहुंचने में नाकाम रहे, लेकिन कांस्य पदक के मुकाबले में अपने प्रतिद्वंद्वी को शिकस्त देकर भरपाई कर दी।  

और बजरंग के लिए ये गौरवपूर्ण क्षण उनके पिता बलवान पूनिया के लिए छाती चौड़ी करने वाला था, जिन्होंने उन्हें हरियाणा के खुदान गांव में एक स्थानीय अखाड़े में नौ साल की उम्र में कुश्ती से परिचय कराया था। टोक्यो 2020 में बजरंग के कारनामों के माध्यम से बलवान ने अपने सपनों को पूरा होते देखा है। 

बलवान खुद पहलवान रह चुके हैं और देश को गौरवान्वित करने का सपना देखते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वो ऐसा नहीं कर सके। 

बलवान पूनिया (Balwan Punia) ने Olympics.com को बताया, "मैं कुश्ती जारी नहीं रख सका, क्योंकि मेरे परिवार की स्थिति ठीक नहीं थी। लेकिन, बजरंग ने मेरे सपनों को पूरा कर दिया। मुझे कुश्ती का शौक था। इसलिए मैंने उसे नौ साल की उम्र में ही कुश्ती में भेज दिया था।"  

उनके पिता चाहते थे कि वे प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करें, लेकिन कभी भी उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें मजबूर नहीं किया। ऐसा इसलिए हुआ कि कम उम्र में अखाड़े की कुश्ती से परिचित होने के बाद बजरंग अपनी कला को निखारने के लिए अक्सर स्कूल छोड़ देते थे।

ताकुतो ओटोगुरो, हाजी अलीयेव, गडज़िमुराद रशीदोव और बजरंग पुनिया अपने टोक्यो 2020 पदक के साथ।
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बलवान ने याद करते हुए कहा, "वह (बजरंग पूनिया) बहुत ही सरल और होशियार बच्चा रहा है। उसे ज्यादा मज़ाक करना पसंद नहीं है और बस अपने काम में व्यस्त रहते थे। लेकिन, वह पढ़ना नहीं चाहते थे और उन्होंने मुझे इसके बारे में बताया था। उन्होंने मुझसे कहा था, वह अभी केवल कुश्ती करना चाहता है।"  

यह दृढ़ संकल्प भी टोक्यो 2020 ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने में एक कारण था। हालांकि, 27 वर्षीय पदक के रंग से संतुष्ट नहीं हैं। क्योंकि, उनका मानना है कि वह इससे बेहतर के हकदार हैं और उनके पिता भी उनसे सहमत हैं। 

बलवान ने कहा, "बजरंग ने मुझे उस दिन (कांस्य जीतने के बाद) कहा था, 'पापा, 2024 के पेरिस ओलंपिक में मैं पदक का रंग बदल दूंगा और अगर देशवासी इसी तरह मेरा समर्थन करते रहे, तो मैं कई पदक घर ला सकता हूं'।"

उन्होंने कहा, "वह स्वर्ण पदक जीत सकता था। लेकिन, वह चोट के कारण कांस्य पदक जीत सका था। मुझे उस पर विश्वास है कि जब भी वह (टूर्नामेंट के लिए) बाहर जाते हैं, तो कभी खाली हाथ नहीं लौटे।"

वहीं, पूनिया के घर लौटने पर उनके दोस्तों और परिवार के लोगों ने नई दिल्ली में हवाई अड्डे पर उनका जोरदार स्वागत किया। उनकी मां ने देश का गौरव बने अपने बेटे के स्वागत के लिए उनकी पसंदीदा मिठाई भी बनाई थी।

उनके पिता ने खुलासा किया, "बजरंग (पूनिया) का घर पर स्वागत करने के लिए उनकी मां ने गुड़ का चूरमा बनाया था।"

हरियाणा के पहलवान के पास अब ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई गेम्स, राष्ट्रमंडल खेल (CWG) और एशियाई चैंपियनशिप में एक-एक पदक हैं। लेकिन, जैसा कि उनके पिता ने बताया, "ये इसमें रुकने वाला नहीं है।"