गोल्फ के नियम: इस खेल को खेलना सीखें और बर्डी, बोगी, ईगल का मतलब जानें

ओलंपिक खेलों में गोल्फ साल 1900 और 1904 में खेला गया था और फिर रियो 2016 में इसे फिर से शामिल किया गया था। गोल्फ के नियम जानिए और इस खेल को खेलना सीखें।

लेखक रितेश जायसवाल
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स्कॉटलैंड से 15वीं सदी में शुरू हुए रोमांच से भरपूर गोल्फ खेल का एक समृद्ध इतिहास है।

इस खेल ने 1900 और 1904 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई लेकिन लंदन 1908 ओलंपिक से इसे हटा दिया गया। हालांकि, गोल्फ ने रियो 2016 से एक बार फिर ओलंपिक प्रोग्राम में वापसी कर ली है।

आज के समय में गोल्फ सबसे लोकप्रिय और आकर्षक खेल बन गया है जिसे कोई भी प्रोफेशनल तौर पर खेल सकता है।

गोल्फ को अक्सर उच्च दर्जे या आला स्तर का खेल माना जाता है। इसे खेलने के लिए अधिक धन की आवश्यकता लोगों को इस खेल को चुनने में बाधा उत्पन्न करता है। इसी वजह से इसे अक्सर अमीरों के खेल के तौर पर देखा गया है।

गोल्फ को चुनने पर एक और कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है, जो कि इसके नियम और इस खेल को खेलने का तरीका है। इसी वजह से गोल्फ को चुनना लोगों के लिए एक चुनौती रही है।

आप भी इस अद्भुत और आकर्षक खेल को चुन सकें इसके लिए हम इसे सरल बनाते हुए यहां गोल्फ के नियम और इस खेल को खेलने का तरीका बता रहे हैं।

गोल्फ कैसे खेलें और इसकी प्रतियोगिता का फॉर्मेट जानिए

गोल्फ के खेल में, एक खिलाड़ी गेंद को होल (छेद) में पहुंचाने के लिए क्लब (छड़ी) का उपयोग करता है। गोल्फ का मुख्य उद्देश्य गेंद को कम से कम स्ट्रोक में होल में पुट या सिंक (छेद के अंदर डालना) करना है।

गोल्फ में स्ट्रोक प्ले फॉर्मेट

आम तौर पर किसी प्रतिस्पर्धी गोल्फ मैच में 18 होल के चार राउंड खेले जाते हैं। जो खिलाड़ी कम से कम शॉट लगाते हुए कोर्स को पूरा करता है वही विजेता बनता है। इसे स्ट्रोक प्ले स्कोरिंग फॉर्मेट कहा जाता है और गोल्फ टूर्नामेंट में इसका सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

अक्सर पहले दो राउंड के बाद एक कट स्थापित किया जाता है। इसके बाद सिर्फ वही खिलाड़ी आगे के चरण में खेलते हैं जो शुरुआती दो चरण के बाद लीडरबोर्ड पर कट मार्क को पार कर पाते हैं। कट हासिल करने वाले खिलाड़ी अंतिम दो राउंड खेलते हैं जबकि शेष खिलाड़ी बाहर हो जाते हैं।

स्ट्रोक प्ले फॉर्मेट में अगर रैंकिंग टाई होती है तो यह मान्य होती है, लेकिन अगर लीडरबोर्ड के शीर्ष पर टाई हो जाता है तो एक टाई-ब्रेकर खेला जाता है, जिसे प्लेऑफ भी कहा जाता है। ऐसा सिर्फ एक विजेता को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

प्लेऑफ में विजेता के निर्धारित होने तक इस खेल को अतिरिक्त होल में खेला जाता है।

गोल्फ में मैच प्ले फॉर्मेट

राइडर कप और प्रेसिडेंट्स कप जैसे कुछ खास इवेंट के लिए एक वैकल्पिक फॉर्मेट - मैच-प्ले स्कोरिंग का उपयोग किया जाता है।

इस फॉर्मेट के तहत खिलाड़ी या टीम 18 होल के खेल में एक दूसरे के खिलाफ आमने-सामने होते हैं।

इस दौरान खिलाड़ी किसी भी होल में गेंद को डालने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वी से कम स्ट्रोक लेते हुए, खिलाड़ी या टीम उस होल के लिए एक अंक हासिल करती है। अगर किसी होल के लिए दोनों ही टीम एक समान शॉट लगाते हैं तो किसी को कोई अंक नहीं दिया जाता है।

मैच के अंत में, 18 होल में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले खिलाड़ी या टीम को विजेता घोषित किया जाता है।

टाई होने के मामले में, मैच के विजेता को तय करने के लिए अतिरिक्त होल में खेल को खेला जाता है।

गोल्फ कोर्स

गोल्फ में खेल के मैदान को गोल्फ कोर्स कहा जाता है। प्रत्येक गोल्फ कोर्स में 18 होल होते हैं, जिनमें से शुरुआती नौ को फ्रंट नाइन और शेष को बैक नाइन कहा जाता है।

कुछ गोल्फ कोर्स में सिर्फ नौ होल होते हैं। ऐसी स्थिति में पूरे कोर्स को फिर से दोहराया जाता है ताकि 18 होल का एक कोर्स पूरा हो सके।

गोल्फ कोर्स कैसा होता है?
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गोल्फ कोर्स कैसा होता है?

प्रत्येक होल के लिए दूरी उसके स्थल के खास आकार के साथ बिल्कुल अलग होती है। कोर्स का अधिकांश हिस्सा घास के एक लॉन से ढका हुआ होता है और इसे खुरदरा हिस्सा कहा जाता है। होल के पास एक निश्चित क्षेत्र को ग्रीन या फेयरवे के रूप में तैयार किया जाता है। इस क्षेत्र की घास छोटी कटी हुई होती है और सतह अधिक चिकनी होती है।

गोल्फ कोर्स के आसपास पेड़, झाड़ियाँ या जंगल भी हो सकते हैं और वे खेल क्षेत्र के अंदर भी हो सकते हैं, जिसे अक्सर सफेद दांव से चिह्नित किया जाता है।

इसके अलावा, प्रत्येक होल के रास्ते में रेत का जाल (रेत के छोटे क्षेत्र) और जल क्षेत्रों के तौर पर बाधाओं का एक अलग सेट तय होता है।

दुनिया भर के किसी भी गोल्फ कोर्स में कोई भी दो होल बिल्कुल समान नहीं होते हैं। यह गोल्फ को हर दूसरे खेल से अलग बनाता है। इस खेल में आम तौर पर एक मानकीकृत खेल की सतह का उपयोग होता है।

गोल्फ के नियम

प्रत्येक होल के लिए खिलाड़ी ‘टी’ नामक प्रारंभिक स्थिति से शुरुआत करते हैं और गेंद को होल की ओर मारते हैं।

गोल्फ क्लब (छड़ी) कई प्रकार के होते हैं, जो गोल्फर को गेंद को होल तक पहुंचाने में अपनी अलग-अलग विशेषताओं के साथ मदद करते हैं। आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ गोल्फ क्लब को आयरन, वुड्स, ड्राइवर्स, वेजेज, चिपर्स और पटर के नाम से जानते हैं। इन सभी को विशेष रूप से विभिन्न तरह के शॉट मारने और अलग-अलग स्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें से प्रत्येक क्लब में अलग-अलग तरह के बदलाव होते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एक गोल्फर किसी भी राउंड की शुरुआत में अपने बैग में रखने के लिए अधिकतम 14 क्लब ही चुन सकता है। ऐसा न करने पर खिलाड़ी के खाते में पेनल्टी स्ट्रोक जोड़ दिया जाता है।

खिलाड़ियों को अपनी किट में क्लब शामिल करने की अनुमति तब तक दी जाती है जब तक कि यह सीमा 14 से कम हो। क्लब को बदलने की अनुमति केवल प्रत्येक दौर के अंत होने के बाद ही दी जाती है।

गोल्फ खिलाड़ी प्रतिस्पर्धी इवेंट के दौरान अपने बैग को अपने आसपास नहीं रखते हैं। उनके पास उसे सम्भालने के लिए कैडीज यानी सहायक होता है।

इसके अलावा खिलाड़ियों को हर समय अपनी गेंद पर नज़र रखने की जरूरत होती है, क्योंकि गलत गेंद को मारने पर दो स्ट्रोक का जुर्माना लग सकता है।

अपने पहले स्ट्रोक के लिए, खिलाड़ियों को एक छोटी सी खूंटी का उपयोग करके अपनी गेंद को जमीन से थोड़ा ऊपर उठाने की अनुमति दी जाती है, जिसे ‘टी’ भी कहा जाता है।

हालांकि, इसके बाद के शॉट को गेंद की यथास्थिति के रूप में ही खेला जाता है, जिसे अक्सर गोल्फ का गोल्डन रूल कहा जाता है।

इसके बदले में खिलाड़ियों के लिए नियमों का एक पूरा सेट लागू किया जाता है। ये नियम तब लागू होते हैं जब कोई खिलाड़ी किसी शॉट को मारने में खुद को असमर्थ पाता है। ऐसा तब हो सकता है जब गेंद सीमा से बाहर (खेल क्षेत्र), किसी झाड़ी में, किसी पेड़ के बहुत करीब, चट्टानों के बीच या रेत के किनारे पर किसी मुश्किल स्थिति में पहुंच जाए।

ऐसी स्थितियों में खिलाड़ियों को किसी भी तरह से गेंद के आस-पास के वातावरण को बदलने की अनुमति नहीं होती है। खिलाड़ी न ही टहनियों को तोड़ सकता है, न ही मलबे को साफ कर सकता है, न ही रेत को हिला सकता है। यानी किसी भी स्थिति में गेंद को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने की संभावना में सुधार करने की अनुमति नहीं होती है।

इन स्थितियों में, खिलाड़ी फिर से खेलना शुरू करने के लिए दूरी और एक-स्ट्रोक की पेनल्टी ले सकते हैं। यदि गेंद को बचाया जा सकता है, तो खिलाड़ियों को गेंद को उठाकर खेलने की स्थिति में पहुंचाने की अनुमति दी जाती है। हालांकि खिलाड़ी को ध्यान रखना होता है कि गेंद होल की सीध में रहे और अपनी वर्तमान स्थिति के पीछे खेलने योग्य स्थिति पर रखी जाए।

यदि गेंद तक पहुंचना संभव नहीं होता है तो खेल को फिर से शुरू करने के लिए एक नई गेंद का उपयोग किया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि अगर शॉट के दौरान गेंद पानी में चली जाती है तो खिलाड़ी संभव होने पर बिना पेनल्टी लिए ही खेल को जारी रखने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन ज्यादातर मामलों में यह संभव नहीं होता है और खिलाड़ी को नई गेंद के साथ खेल फिर से शुरू करने से पहले दूरी या पेनल्टी स्ट्रोक लेना पड़ता है।

यदि एक गेंद खो जाती है, तो खिलाड़ी को अपनी गेंद को खोजने के लिए तीन मिनट का समय दिया जाता है। यदि वे इस दौरान ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनपर पेनल्टी लगाई जाती है।

गोल्फ स्कोरिंग: पार, बर्डी, ईगल और अन्य जरूरी पहलू

भले ही अधिकांश गोल्फ इवेंट, स्ट्रोक प्ले फॉर्मेट में खेले जाते हैं, लेकिन प्रत्येक राउंड के अंत में गेंद को होल में डालने के लिए मारे गए शॉट की संख्या देखी जाती है। ऐसा सिर्फ शॉट की सामान्य गिनती करके नहीं तय किया जाता है, इसके लिए एक पूरी प्रणाली और नियमों को जानना जरूरी होता है।

एक कोर्स में हर होल के लिए पहले से ही एक ‘पार’ तय किया जाता है। इस ‘पार’ को किसी होल में गेंद पहुंचाने के लिए एक औसत खिलाड़ी के द्वारा लिए जाने वाले शॉट की संख्या के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

यदि यह संख्या चार शॉट की होती है, तो वह होल ‘पार-फोर होल’ होता है। अधिकांश गोल्फ कोर्स में पार-थ्री, पार-फोर और पार-फाइव होल का मिश्रण होता है।

खिलाड़ी गेंद को होल में पहुंचाने के लिए कम या ज्यादा शॉट का इस्तेमाल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि वे एक होल को पूरा करने में एक शॉट कम लेते हैं, तो उस होल के लिए खिलाड़ी का स्कोर ‘वन-अंडर पार’ होता है। इसी तरह, पार (गेंद को होल में पहुंचाने के लिए तय शॉट की संख्या) से एक शॉट अधिक लेने का मतलब है कि उनका स्कोर ‘वन-ओवर पार’ होता है।

गोल्फ में स्कोर के लिए उपयोग में लाए जाने वाले कुछ विशेष शब्दों के मायने समझें

बर्डी - एक होल के लिए वन-अंडर पार का स्कोर

ईगल - एक होल के लिए टू-अंडर पार का स्कोर

डबल ईगल/अल्बाट्रॉस - एक होल के लिए थ्री-अंडर पार का स्कोर

होल इन वन - यदि कोई गोल्फ खिलाड़ी गेंद को एक ही स्ट्रोक में अंदर डाल दे। (इस स्थिति में स्कोर को पार के अनुसार दिया जाता है)

पार - एक होल में गेंद पहुंचाने के लिए उस होल के लिए तय किए गए शॉट यानी ‘पार’ की बराबरी करना

बोगी - एक होल के लिए वन-ओवर पार का स्कोर

डबल बोगी - एक होल के लिए टू-ओवर पार स्कोर

ट्रिपल बोगी - एक होल के लिए थ्री-ओवर पार का स्कोर

इसी तरह क्वाड्रपल बोगी को क्विंटुपल बोगी कहा जाता है। ऐसे ही कुछ अन्य विशेष शब्दों का भी इस्तेमाल किया जाता है।

‘ओवर एंड अंडर सिस्टम’ का उपयोग राउंड और पूरे इवेंट के आधिकारिक स्कोर को दर्शाने के लिए भी किया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई गोल्फर एक राउंड पूरा करने के लिए सभी 18 होल के लिए सभी पार की तुलना में 14 शॉट अधिक लेता है, तो उस राउंड के लिए उसका स्कोर 14-ओवर पार कहा जाता है। अगर वे पूरे इवेंट को पूरा करने के लिए चार राउंड में सभी 72 होल के पार की तुलना में 11 शॉट कम लेते हैं, तो इवेंट के लिए उनका स्कोर 11-अंडर पार कहा जाता है। राउंड की निर्धारित संख्या के अंत में सर्वश्रेष्ठ अंडर-पार स्कोर वाला गोल्फर विजेता घोषित किया जाता है।

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