टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय एथलीटों ने इन 4 पलों को पहली बार किया महसूस, रचे गए इतिहास

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टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में ऐसी कई चीज़ें थीं, जो शायद पहली बार हुईं। कई रिकॉर्ड पहली बार टूटे, कुछ शानदार उपलब्धियां पहली बार हासिल की गई और साथ ही पांच नए खेल भी पहली बार ओलंपिक कार्यक्रम में जोड़े गए।

इतना ही नहीं, बहुत सारे एथलीटों ने पहली बार खेलों में भाग भी लिया और अपने देश का नाम रौशन किया, तो वहीं दूसरी ओर कई एथलीटों ने इतिहास में पहली बार किसी अनुशासन में अपने देश का पहला पदक भी हासिल किया।  

आज इस लेख में हम उन चीज़ों पर नज़र डालेंगे, जो भारत के लिए इन टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों में पहली बार हुईं।

तीसरे दौर में पहुंचकर Manika Batra ने इतिहास रचा

टेबल टेनिस उन कई खेलों में से एक है जिसमें भारतीय खिलाडियों ने राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों जैसे आयोजनों में पदक तो हासिल किए हैं, लेकिन ओलंपिक में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब नहीं रहा। 

इस दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए, भारत की Manika Batra टोक्यो खेलों के तीसरे दौर तक पहुंची, जो अपने आप में ही इतिहास रचने वाली बात थी क्यूंकि इससे पहले ग्रीष्मकालीन खेलों में टेबल टेनिस की एकल प्रतियोगिता में कोई भारतीय खिलाडी इतनी आगे तक नहीं पहुंचा था।

विश्व में 62वें स्थान पर रहीं, भारत की Manika Batra ने एकल प्रतियोगिता के दूसरे दौर में यूक्रेन की Margaryta Pesotska का सामना किया। 

पहले दो सेट हारने के बाद ऐसा लग रहा था कि Manika का उनके लक्ष्य तक पहुंचने का सपना जल्दी खत्म हो सकता है। हालांकि, उनके दृढ़ संकल्प ने ऐसा नहीं होने दिया। 

Batra ने इसके बाद अगले दो सेट जीतकर स्कोर बराबर किया और पांचवां सेट हारने के बाद, उन्होंने फिर से वापसी की और शेष दो सेट जीतकर मैच जीतकर तीसरे दौर में प्रवेश किया।

फिर तीसरे दौर में Manika को ऑस्ट्रियाई Sofia Polcanova से चुनौती मिली थी। हालाँकि ऑस्ट्रियाई ने 4-0 के स्कोर के साथ मैच जीत लिया, Manika ने अपने खेल से यह दिखा दिया कि उनके पास बड़े स्तर पर जीतने के लिए क्षमता है और 2024 में पेरिस खेलों में तीन साल के समय में, वह वास्तव में एक विश्व स्तरीय खिलाड़ी के रूप में विकसित हो सकती हैं और इस अनुशासन में पदक के लिए चुनौती दे सकती हैं।

Manika Batra

फिर से चमका Sindhu का सिक्का

2016 के रियो खेलों में अपना पहला पदक (रजत) जीतने के बाद भारत की बैडमिंटन स्टार खिलाड़ी PV Sindhu ने देश का और अपना नाम खूब रौशन किया। इस बार भी पदक जीतने की उम्मीद की जा रही थी। पांच साल पहले की Sindhu और टोक्यो खेलों में प्रवेश कर रही Sindhu में अब ज़मीन आसमान का फर्क था। मौजूदा वक्त की Sindhu के पास अपने बेहतरीन कौशल के साथ-साथ आत्मविश्वास भी था और वह अपनी और देश दोनों की उम्मीदों पर खरी उतरीं।

शुरू के दौर के अपने सारे मैच सीधे सेटों से जीतने के बाद, भारत की स्टार शटलर Sindhu ने क्वार्टरफाइनल में जापान की Yamaguchi को हराया और सेमीफइनल में एंट्री ली। वहां उनका सामना उनकी पुरानी प्रतिद्वंद्वी चीनी तायपेई की Tai Tzu-ying से हुआ, जिनके हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि पहले सेट में जो की Sindhu हार गई थी,उसमें उन्होंने कड़ी टक्कर दी थी लेकिन दूसरे सेट में मानो उन्हें मैच में वापसी करने का मौका ही नहीं मिला और एक परिणाम के रूप में, Sindhu को उस महत्वपूर्ण मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा।

इस परिणाम से बेहद निराश Sindhu ने इस हार को अपने आप पर हावी होने नहीं दिया और इसके बजाये अपने ब्रॉन्ज़ मेडल मैच के लिए खुद को तैयार किया। 

अब अगले ही दिन आयोजित कांस्य पदक मुकाबले में उन्होंने चीन की He Bingjiao का सामना किया और उन्हें सीधे सेटों में पछाड़ कर (21-13, 21-15) अपना दूसरा ओलंपिक पदक (कांस्य) हासिल किया। इतना ही नहीं, वे Sushil Kumar के बाद दो ओलंपिक जीतने वाली केवल दूसरी भारतीय और पहली महिला भारतीय एथलीट भी बनीं।

PV Sindhu celebrates after winning Tokyo 2020 bronze medal

महिला हॉकी टीम ने किया सभी को हैरान

एक वो भी वक़्त था जब हॉकी देश का सबसे लोकप्रिय खेल था। आजादी से पहले ओलंपिक खेलों में भारत का इस खेल में सिक्का चलता था। तब कुछ ऐसी बात थी, कि जब भी मैदान पर उतरना, तब वहां से जीत कर वापस आना। कई साल भारत ने इस खेल में अपना वर्चस्व कायम रखा लेकिन 1980 के खेलों के बाद भारत एक बार भी इस अनुशासन में पदक जीतने में सफल नहीं रहा।

अब सीधा बढ़ते हैं 41 साल आगे, टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों की ओर... इस साल आयोजित हुए टोक्यो ओलंपिक खेलों में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी की दोनों ही टीमों ने चमत्कार कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ जब दोनों टीमों ने ओलंपिक खेलों के एक ही संस्करण में सेमीफाइनव में प्रवेश किया हो। बेशक दोनों टीमें अपना-अपना सेमीफइनल मुकाबला हार गईं, लेकिन दोनों ने कांस्य पदक मुकाबलों में जो प्रदर्शन दिखाया, उसकी सहराना भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भी युगों-युगों तक करेगी।

हालांकि पुरुष हॉकी टीम का सेमीफइनल तक पहुंचा पहली बार नहीं था, यह करिश्मा हमारी महिला हॉकी टीम ने पहली बार करके दिखाया और इसके साथ उन्होंने देश को गौरवान्वित किया।

अगर हम कांस्य पदक मैच के नतीजों की बात करें, तो पुरुष टीम ने तो ब्रॉन्ज़ मेडल जीत लिया था लेकीन हमारी महिला टीम इतिहास में अपना पहला ओलंपिक पदक जीतने से चूक गई।

भले ही महिला टीम ने पदक ना जीता हो, लेकिन उन्होंने सभी का दिल जीत लिया।

Indian women's hockey team tokyo
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Neeraj का धमाका, जब टोक्यो में स्वर्ण जीता  

टोक्यो खेलों को याद रखने की कई वजहें जरूर हैं, लेकिन अगर हम सबसे बड़ी वजह की बात करें तो वह Neeraj Chopra द्वारा जेवेलिन थ्रो या भाला फेंक में उनकी स्वर्ण पदक जीत हैं।

आजाद भारत का ओलंपिक खेलों में एथलेटिक्स में यह पहला पदक है।

क्वालीफाइंग हीट के दौरान, Neeraj, जो अपने पहले ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे थे, उन्होंने अपने पहले प्रयास में 86.65 की दूरी पर भाला फेंका, जो उन सभी में सबसे अच्छा थ्रो था और इसी के आधार पर उन्होंने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।

फाइनल में, भाला की दुनिया के कुछ सबसे बड़े नामों का सामना करते हुए, Neeraj अपना पहला प्रयास करते वक्त शांत और आत्मविश्वास से भरे हुए दिखे और उन्होंने 87.03 मीटर की दूरी पर भाला फेंका।

यह आंकड़ा देख सभी भौचक्के रह गए, लेकिन Neeraj ने गोल्ड मेडल जीतने के लिए इससे भी अच्छा थ्रो अपनी दूसरी बारी के लिए संभाल कर रखा था। 

अपने दूसरे प्रयास में 87.58 की दूरी पर भाला फेंककर Neeraj ने अपने लिए पदक सुनिश्चित कर लिया और चूंकि अंत में कोई भी थ्रोअर इस दूरी को पार करने या इसकी बराबरी करने में असफल रहा, तो यह तय हो गया था की Neeraj ही देश के इतिहास में एथलेटिक्स में पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतेंगे।

Neeraj Chopra India
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