जानें उन पांच युवा भारतीय खिलाडियों के बारे में, जिन्होंने टोक्यो खेलों में लूटी वाहवाही

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टोक्यो 2020 ओलंपिक सभी के दिल में उतर गया है।

Strongertogether के मकसद के साथ आयोजित इन खेलों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और करीब तीन हफ़्तों तक चलने वाले इस महा इवेंट ने सबको ख़ुशी और आशा भी प्रदान की।

टोक्यो खेलों में भारतीय एथलीटों ने खूब वाहवाही बटोरी, मेडल जीते, अपने प्रदर्शन से सबको चौंकाया और अगर हॉकी की बात करें, तो इस देश ने इस खेल को फिर से दिल भी दिया।

टीम इवेंट हो या एकल प्रतियोगिता, तमाम भारतीय एथलीट चाहे वह युवा हो या अनुभवी, सभी ने देश का नाम अपने प्रदर्शन और कई ने तो पदक जीत कर रौशन किया।

आज इस लेख में हम उन युवा भारतीय एथलीटों पर एक नज़र डालेंगे जो अपनी छाप छोड़ने में सफल तो हुए ही, बल्कि दुनिया को यह भी बता दिया की आने वाले तीन सालों में पेरिस खेलों में वे अपने अनुशासन में पदक जीतने के दावेदार भी होंगे।

5. Lovlina Borgohain (मुक्केबाज़ी)

हम मुक्केबाज़ी में कांस्य पदक विजेता Lovlina Borgohain के साथ शुरुआत करेंगे।

यह शायद वो नाम हैं जो बेशक मुक्केबाज़ी की दुनिया में प्रसिद्ध जरूर था, लेकिन विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाना अभी बाकी था।

टोक्यो 2020 खेलों में अपने मुक्कों से ही नहीं बल्कि अपने जज़्बे से भी लड़ी इस मुक्केबाज़ के लिए जितने अच्छे शब्द कहें जाएं, उतने कम हैं। नाम कैसे कमाया जाता है यह Lovlina ने अपने प्रदर्शन से बताया। यह मान लेने में कोई शर्म नहीं है कि, खेलों की शुरुआत से पहले उन्हें एक पक्के पदक दावेदार के रूप में शायद सबने ना देखा हो, लेकिन जिस तरह वह टोक्यो खेलों में रिंग में लड़ी हैं, वहां से उनका खाली हाथ वापस आना भी नहीं बनता था।

और खुदा का करिश्मा कहो या उस मुक्केबाज़ की अपनी मेहनत और कौशल, ऐसा हुआ भी नहीं - Lovlina ने खेलों में अपने भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया।

राउंड ऑफ़ 16 और क्वार्टर फाइनल बाउट में जीत हासिल करने के बाद, सेमीफाइनल मुकाबले में टर्की की Busenaz Surmeneli के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा और ओलंपिक खेलों में बॉक्सिंग के नियमों के मुताबिक सेमीफइनल में प्रवेश करना आपका एक पदक सुनिश्चित करता है और ऐसे उन्होंने अपने पहले ओलंपिक खेलों में अपना पहला पदक भी जीता।

Lovlina Borgohain India
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4.Salima Tete (महिला हॉकी)

एक टीम गेम में किसी एक खिलाडी का सामने उभरकर आना अपने आप में ही बड़ी बात है। और अगर वह खिलाडी युवा हो और अपने पहले ओलंपिक खेलों में खेल रहा हो, तो खुद सोच लें, यह कितनी बड़ी कामयाबी हैं। हम यहां बात कर रहे हैं भारतीय महिला हॉकी टीम की युवा डिफेंडर/मिडफील्डर Salima Tete के बारे में।

ओलंपिक खेलों की शुरआत से पहले टोक्यो 2020 के साथ एक विशेष बातचीत में Salima ने अपने बारे में, हॉकी में उनकी रूचि कैसे हुई सहित अन्य बातों पर अपने विचार साझा किये थे और उनकी यह बातें सुनकर, उनके जज्बे को देखकर हमें यह तो मालूम पड़ गया था की यह कोई आम खिलाडी नहीं हैं और यह दुनिया में अपना नाम बनाने, अपनी टीम को पदक दिलाने और देश का दिल दोबारा से जीतने के लिए मैदान पर उतरेंगी। हुआ भी कुछ ऐसा...

भले ही टीम पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचकर भी पदक जीतने से चूक गई, लेकिन टीम का ओवरऑल प्रदर्शन सभी को भा गया। शुरू के कुछ मैचों में हार का मुंह देखने के बाद टीम ने वापसी की और अपने बचे सभी मैच जीते। इतना ही नहीं बल्कि भारतीय महिला हॉकी टीम ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में तीन बार की ओलंपिक चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हरा कर दुनिया को चौंका दिया था। उस जीत से टीम सेमीफइनल में पहुंची और वहां अर्जेंटीना से हार कर अपना कांस्य पदक मैच भी ग्रेट ब्रिटेन से एक करीबी मुकाबले में हार गई। 

Salima की बात करें, तो उनके दौड़ने के शौक ने उन्हें प्रसिद्ध कर दिया। बड़े मैचों में डिफेंस और मिडफ़ील्ड दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाने के लिए उन्होंने चारों ओर सुर्खियां बटोरीं। यह कहना सही रहेगा की इस युवा खिलाडी का भविष्य उज्जवल है।

Salima Tete Indian Women's Hockey
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3. Ravi Dahiya (कुश्ती)

अंग्रेजी भाषा में Ravi Dahiya जैसे एथलीटों को 'डार्क-हॉर्स' कहा जाता हैं, जिसका मतलब आप जानते हैं की इनमें क्षमता तो पूरी है बस इंतज़ार है बड़े दिन पर सही तरीके से इनके प्रदर्शन करने का। और इतिहास इस बात का गवाह है की Dahiya ने अपने कौशल से न केवल पदक जीता बल्कि ये ऐलान भी कर दिया है कि अगले खेलों में वह स्वर्ण के प्रबल दावेदार होंगे।

एक ही दिन में तीन लगातार मुकाबलों में जीत के साथ अपना सिक्का ज़माने के बाद, भारतीय युवा पहलवान ने फाइनल में यानि गोल्ड मेडल मैच में प्रवेश किया।  

एक दम से चर्चा में आया यह पहलवान, रातों-रात दुनियाभर में छा गया और अब सबकी निग़ाहें फाइनल मैच पर थीं। हालांकि फाइनल मुकाबला वह जीतने में कामयाब तो नहीं रहे पर 23 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को यह संदेश तो दे दिया की पेरिस अब दूर नहीं है और वह चूके हुए स्वर्ण पदक के लिए वापस लौटेंगे।

Ravi Dahiya India Wrestling
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2. Aditi Ashok (गोल्फ)

सोचिए जरा, क्या जबरदस्त प्रदर्शन रहा होगा, उस खिलाड़ी का जिसने गोल्फ जैसे एक शानदार खेल में, जो भारत में अन्य खेलों की तुलना में उतना लोकप्रिय नहीं हैं, उसमें सभी का ध्यान खींचा और दिल जीत लिया।

दुनिया में 200वें स्थान पर रहीं Aditi से खेलों में किसी भारतीय द्वारा इस अनुशासन में अपने खेल के स्तर को इतना ऊपर उठाने की उम्मीद नहीं की गई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करके दिखाया।

पहले तीन राउंड में शीर्ष तीन गोल्फर्स में शामिल होने के बाद, राउंड 4 यानि आखिरी राउंड में उन्होंने इस अनुशासन में देश को एक पदक दिलाने की उम्मीद जगा दी थी। दुनिया की शीर्ष खिलाडियों को इस मंच पर चुनौती देना उनके खेल और उनके कौशल के बारे में बहुत कुछ बताता है।

आखिरी दिन राउंड 4 में, वह अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए पदक जीतने की कगार पर भी थी, हालांकि वह अपने इस सपने को पूरा करने के करीब आकर भी चूक गई और उन्हें चौथे स्थान पर रहना पड़ा।

मगर हम यकीन से कह सकते हैं की इस प्रदर्शन ने उन्हें न केवल सुर्ख़ियों में रखा बल्कि भारत में इस खेल को और लोकप्रिय बनाने में भी मदद की। उम्मीद है की आने वाले तीन सालों में Aditi जैसे कई प्रतिभाशाली गोल्फर्स सामने आएंगे और भारत का नाम ओलंपिक जैसे बड़े स्तर में रौशन करेंगे।

Aditi Ashok Golf
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1. Neeraj Chopra (भाला फेंक)

इनका नाम इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है।   

यह वो भारतीय एथलीट है, जिसने एथलेटिक्स में (जेवलिन थ्रो या भाला फेंक) आज तक भारत का पहला गोल्ड मेडल जीता। 

क्वालीफाइंग हीट के दौरान, Neeraj, जो अपने पहले ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे थे, उन्होंने अपने पहले प्रयास में 86.65 की दूरी पर भाला फेंका, जो उन सभी में सबसे अच्छा थ्रो था। और इसी के आधार पर उन्होंने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।

फाइनल में, भाला की दुनिया के कुछ सबसे बड़े नामों का सामना करते हुए, Neeraj अपना पहला प्रयास करते हुए शांत और आत्मविश्वास से भरा देखा और उन्होंने 87.03 मीटर की दूरी पर भाला फेंका।

यह आंकड़ा देख सभी भौचक्के रह गए, लेकिन Neeraj ने गोल्ड मेडल जीतने के लिए इससे भी अच्छा थ्रो अपनी दूसरी बारी के लिए संभाल कर रखा था। 

अपने दूसरे प्रयास में 87.58 की दूरी पर भाला फेंककर Neeraj ने अपने लिए पदक सुनिश्चित कर लिया और चूँकि अंत में कोई भी थ्रोअर इस दूरी को पार करने या इसकी बराबरी करने में असफल रहा, तो यह तय हो गया था की Neeraj ही देश के इतिहास में एथलेटिक्स में पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतेंगे।

23 साल की उम्र में उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की, उसने उन्हें इस देश में ख्याति दिलाई है और सभी की जुबान पर उनका नाम है।

Neeraj Chopra Javelin India
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