टोक्यो 2020 के रजत पदक विजेता रवि कुमार दहिया ने कैसे की कुश्ती में शुरुआत ? 

भारत की रजत पदक विजेता दहिया का जन्म एक पहलवानों के परिवार में हुआ और वो सुशील कुमार से प्रेरित हैं।  

लेखक भारत शर्मा

भारत के नवीनतम ओलंपिक रजत पदक विजेता रवि दहिया (Ravi Dahiya) का पहलवान बनना तय था। उनका जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव में हुआ था, जिसने पहले ही कुश्ती में तीन ओलंपियन पैदा किए थे। उनके दादा और पिता राकेश दहिया (Rakesh Dahiya) पहलवान थे। इसलिए उनके चाचा अनिल और राजकमल भी पहलवान बने। 

उनके पिता राकेश ने ESPN से कहा था, "रवि बहुत शांत लड़का था। वह जोर से बात भी नहीं करता था। लेकिन, 2008 के ओलंपिक में सुशील ने कांस्य पदक जीता, तो वह आया और कहा- वह करेगा भी ऐसा करना चाहता है।" 

दहिया ने 10 साल की उम्र में कुश्ती शुरू कर दी थी। 12 साल की उम्र में उन्होंने अपने आदर्श सुशील कुमार के नक्शेकदम पर चलते हुए भारतीय कुश्ती के उद्गम स्थल नई दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया। यहां से पहले ही दो ओलंपिक पदक विजेता- सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त तैयार हुए थे। 

उनके पिता छोटे किसान होने के कारण उनके परिवार को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने यह दहिया को देश के सर्वश्रेष्ठ कुश्ती स्कूल में शिक्षा दिलाने में आर्थिक परेशानी को आड़े नहीं आने दिया। हालांकि, महान कोच सतपाल सिंह (Satpal Singh) द्वारा संचालित छत्रसाल स्टेडियम में छात्रों के रहने और खाने की व्यवस्था की जाती है। कमरों में पहलवानों की संख्या के हिसाब से संसाधन आमतौर पर कम पड़ते थे। 

दहिया के पिता राकेश हर दिन गांव से ताजा दूध और सब्जियां लेकर नई दिल्ली तक की यात्रा करते थे, ताकि रवि को अच्छा आहार मिल सके।

दो पहलवानों से प्रेरणा लेते हुए दहिया ने अथक परिश्रम किया। संयोग से वो उसी कमरे में रहते थे, जिसमें कभी लंदन 2012 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता दत्त रहते थे। 

दहिया के ट्रेनिंग सहयोगी अरुण ने 2019 में Scroll.in को बताया, "रवि तकनीक के लिहाज से भले ही सबसे अच्छा नहीं हो, लेकिन कोई भी उससे छह मिनट तक बिना अंक दिए कुश्ती नहीं कर सकता है। जब से उसने कुश्ती शुरू की है, मैं उसके साथ हूं। वह बहुत अलग तरह की मेहनत करते हैं।” 

उनका धीरज अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। इसने उन्हें सबसे बड़े आयोजनों में पदक दिलाए हैं: 2019 विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य और एशियाई चैंपियनशिप (2020, 2021) में दो स्वर्ण पदक। 

वास्तव में, दहिया को मुकाबले की अंतिम सेकंड तक अनदेखा नहीं कर सकता। यह टोक्यो 2020 में नुरिस्लाम सानायेव (Nurislam Sanayev) के खिलाफ उनके सेमीफाइनल के दौरान स्पष्ट था। भारतीय ने एक स्थिति में 2-9 से पीछे रहने के बावजूद वापसी करते हुए जीत हासिल की। 

दहिया ने गुरुवार को लंदन 2012 ओलंपिक के फाइनल में पहुंचे अपने हीरो सुशील कुमार का अनुकरण करते हुए रजत पदक जीता।