इरिट्रिया में जन्मे रिफ्यूजी एथलीट लूना सोलोमन और हैबटॉम अमानियल: खेल के माध्यम से शांति का प्रयास

सोलोमन और अमानियल ने बेहतर जीवन की तलाश में अपना देश छोड़ दिया और खेल ने इन दोनों के अविश्वसनीय सफर का मार्गदर्शन करने में मदद की है।

लेखक ओलंपिक चैनल
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

जब हैबटॉम अमानियल और लूना सोलोमन अपने होम नेशन इरिट्रिया में हिंसा और दमन से बच रहे थे, तब उन्होंने ओलंपिक के बारे में सोचा भी नहीं होगा।

सोलोमन ने ओलंपिक चैनल की ओरिजनल सीरीज टेकिंग रिफ्यूज में बताया, मैंने अपना देश छोड़ दिया क्योंकि वहां कोई आजादी नहीं है। 2015 में वह अपने देश से भाग गई थीं, जहां उन्होंने जन्म लिया था।

वह स्विटज़रलैंड चली गईं, जहां उनकी मुलाकात स्पोर्ट शूटिंग में इटली के ट्रिपल ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निकोलो कैंप्रियानी से हुई, जो बाद में उनके कोच बन गए।

उन्होंने याहू न्यूज को बताया, खेल और ओलंपिक ने उनकी दुनिया को बदलने में मदद की: " शूटिंग मुझे शांति देता है।"

वहीं 2015 हैबटॉम अमानियल के लिए भी एक महत्वपूर्ण साल था: क्योंकि उनकी मुलाकात कैथरीन कोलम्ब से हुई, जो एक पूर्व एथलीट और अब स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में एक कोच हैं, जिन्होंने उन्हें दौड़ने के लिए प्रेरित किया और अपनी प्रतिभा पर भरोसा करने के लिए कहा।

वह जेल, अन्याय और निर्वासन से बाहर निकल चुके हैं और रनिंग में उन्होंने वह चीज ढूंढ ली है जो उन्हें इन सब से आजाद करती है।

दो शरणार्थी एथलीट जो एक लंबा सफर तय कर चुके हैं

अमानियल का स्विट्ज़रलैंड का सफर बहुत कष्टदायक था।

युद्धग्रस्त इरिट्रिया से सूडान और लीबिया के रास्ते एक रेगिस्तान के माध्यम से पैदल भागते हुए, 1,500 मीटर विशेषज्ञ को एक खतरनाक भूमध्यसागरीय क्रॉसिंग बनानी पड़ी और एक नाव पर दिन बिताने के बाद इटालियन तट पर पहुंचे।

जब वह स्विट्ज़रलैंड में पहुंचे तो उन्होंने अपनी प्रतिभा को निखारा और दौड़ने के लिए मौके को हाथ से नहीं जाने दिया। साथ ही एक पेंटर और डेकोरेटर बनने के लिए कड़ी मेहनत भी की।

उन्होंने रायटर्स को बताया, "यहां स्विटज़रलैंड में मेरे पास ऐसे मौके थे जो मेरे देश में नहीं थे। यहां मैं जो चाहूं वह कर सकता हूं और मैं कैसे चाहता हूं, कोई भी मुझसे यह नहीं कह रहा है कि 'तुम ऐसा नहीं कर सकते, तुम्हें वैसा करना होगा।"

"इसीलिए मैंने अपनी नौकरी के साथ-साथ खेल शुरू करने का फैसला किया।"

उनके कोच सिरिल गिंद्रे ने कहा, "वह बिना पैसे के देश को छोड़कर चले गए, उनके पास कुछ भी नहीं था, उन्हें रेगिस्तान पार करना था, उनके पास पानी नहीं था। (उन्हें काम करना था) समुद्र को कैसे पार करना है इसका कोई भी समाधान उनके पास नहीं था।"

"मुझे लगता है कि यही कारण है कि उनके पास इतनी इच्छाशक्ति है। उन जगहों पर रहने वाले बहुत से लोगों की तरह सब कुछ चमकदार दिखता है और यही हम उनके सफर में देखते हैं।"

प्रतिबद्धता और इच्छाशक्ति ने हैबटॉम को एक लंबा सफर तय करने के लिए प्रेरित किया है, और जब वह शॉर्टलिस्ट से अंतिम आईओसी ओलंपिक रिफ्यूजी टीम में नहीं गए, जिसने पिछली गर्मियों में टोक्यो में प्रतिस्पर्धा की थी। 31 साल की उम्र में अभी भी वह बहुत कुछ कर सकते हैं।

लूना सोलोमन: युद्ध से बचने से लेकर खेल के सबसे बड़े मंच तक

सोलोमन की यात्रा एक और उल्लेखनीय कहानी है: उन्होंने Olympics.com को बताया, "मैंने पहली बार स्विट्ज़रलैंड में शूटिंग में हिस्सा लिया था। इससे पहले मुझे शूटिंग के बारे में कुछ भी नहीं पता था।"

जैसे-जैसे अफ्रीकी मूल के शूटर ने तेजी से खेल में सुधार किया और खुद को खेल के लिए समर्पित कर दिया। कैंपरियानी ने उनकी प्रतिभा को देखा और उन्हें टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के उद्देश्य से शरणार्थियों की अपनी टीम के लिए चुना। उन्होंने मुश्किल प्रशिक्षण, बेहतरीन स्कोर अर्जित कर और अंत में ओलंपिक न्यूनतम अंक से ऊपर शूटिंग की और जापान में शरणार्थी ओलंपिक टीम के लिए प्रतिस्पर्धा की।

यह उपलब्धि और भी खास है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के दौरान वह गर्भवती हो गई और एक बच्चे को जन्म दिया।

कोरोना महामारी के कारण टोक्यो 2020 के एक साल के स्थगन ने उन्हें इसमें हिस्सा लेने का एक मौका दिया, और वह अंततः जापान में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल योग्यता में 50 वें स्थान पर जगह बनाई।

ऐसे समय में शरणार्थी होने का क्या मतलब है। इस बारे में जागरूकता के साथ टोक्यो गेम्स के लिए उनकी लंबी यात्रा के बाद उनकी इच्छा थी कि कैंपरियानी के साथ वह दूसरे लोगों को भी वह जीवन देने में मदद कर सके, जो वह जी रही थी।

"मैं अपने जैसे अन्य अप्रवासियों की मदद करने के लिए निक्को में शामिल होना चाहूंगी और उन्हें खेल के माध्यम से मजबूत बनने में मदद करना चाहूंगी, जैसे मैं शूटिंग के साथ थी।"

और अब उनकी नजरें पेरिस 2024 पर भी हैं, उन्होंने Olympics.com को बताया, "मैं पेरिस 2024 तक खेल जारी रखने जा रही हूं। मैं उन ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेना चाहती हूं।"

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