ओलंपिक सिंडिरेल्ला: जमैका की महान बॉबस्ले टीम के Devon Harris और Chris Stokes ने बताया अपने सपनों को सच कर दिखाने का राज़

अगर आप ओलंपिक खेलों का इतिहास देखें तो हर चार साल में पूरे विश्व को कुछ ऐसी कहानियों के बारे में पता चलता है जो सबको प्रेरित और अचंभित करती हैं। कुछ खिलाड़ी या टीमें सिर्फ ओलंपिक खेलों में अपना स्थान पक्का करने के लिए पूरे जीवन कड़ा परिश्रम करते हैं और हालांकि वह पदक विजेता नहीं बनते, उनका जीवन कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत होता है। olympics.com ने जमैका की महान बॉबस्ले टीम के सदस्यों से बात की और उन्होंने 1988 कैलगरी खेलों में अपनी महान उपलब्धि के बारे में बताया। 

लेखक Indira Shestakova, Jo Gunston
फोटो क्रेडिट 1988 Getty Images

Devon Harris, Dudley Stokes, Michael White और Chris Stokes की इस टीम ने 1988 में ओलंपिक मंच पर पहली बार कदम रखा। उन्होंने ओलंपिक खेलों के पांच महीने पहले अभ्यास करना शुरू किया और कैलगरी खेलों में उनका भाग लेना खेल इतिहास के सबसे स्वर्णिम क्षणों में से एक है। कॅरीबीयन क्षेत्र के इस द्वीप की टीम अपनी रेस को पूरा भी नहीं कर पायी लेकिन फिर भी पूरे खेल जगत को उनसे प्रेम हो गया और उनकी कहानी के ऊपर 'कूल रनिंग्स' नामक लोकप्रिय फिल्म भी बनी।

Chris Stokes इस टीम में अंतिम क्षणों में अपना स्थान पक्का किया क्योंकि उनके एक साथी को चोट लग गयी थी और उन्हें अभी भी विश्वास नहीं होता की जमैका के खिलाड़ी इतने लोकप्रिय हो गए थे।

उन्होंने olympics.com से बात करते हुए कहा, "मुझे बहुत बाद में समझ आया कि जमैका बॉबस्ले टीम का महत्त्व लोगों के जीवन में कितना ज़्यादा था और यह आज भी ओलंपिक खेलों में बहुत महत्त्व रखता है। अब जब मैं जमैका की बॉबस्ले टीम के बारे में बात करता हूँ तो मैं उसे एक विचार की तरह प्रस्तुत करता हूँ। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहाँ के निवासी हैं या आपके माता पिता क्या करते हैं, आप जीवन में जो चाहे कर सकते हैं और अपने आप में सुधार ला सकते हैं।"

हमें विश्व के अनेक स्थानों से सन्देश और चिट्ठियां आती थी, चाहे वह मिनेसोटा से हो या केंद्रीय ऑस्ट्रेलिया से। उन लोगों ने कभी भी बॉबस्ले नहीं देखा था लेकिन उन्होंने जमैका को इस खेल में भाग लेते हुए देखा और इससे उन्हें बहुत प्रेरणा मिली।

Chris Stokes

कैलगरी में परिणाम कुछ भी रहा हो, इस टीम के खिलाड़ियों की गिनती ओलंपिक इतिहास के महान खिलाड़ियों में होगी।

Stoke के साथी Devon Harris ने olympics.com से बात करते हुए बताया, "मैंने कभी अपने सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं ओलंपिक इतिहास का महान खिलाड़ी कहलाऊंगा। उसके लिए मैं सबको धन्यवाद देता हूँ।"

"कैलगरी मेरे जीवन का एक बहुत ही खास अनुभव था और वहां जो हुआ वह अद्भुत था जिसने हम सब को हमेशा के लिए बदल दिया। यह सब सिर्फ इसलिए नहीं कि हम लोगों ने ओलंपिक खेलों में भाग लिया और हमारे ऊपर एक फिल्म बनी। मेरे विचार में यह कार्य करना लगभग असंभव था और मैं इस अनुभव के लिए कृतघ्न हूँ।"

आज कल Devon Harris प्रेरणादायक वक्ता हैं। बहुत वर्ष पहले वह एक स्थान पर संवाद में थे और उनसे किसी ने पुछा, "किस क्षण आपको और आपके साथियों को लगा की आप लोग ओलंपिक खेलों में कभी भाग नहीं ले पाएंगे।" यह विचार उनके दिमाग में कभी नहीं आया।

Harris कहते हैं, "यह बात ज़रूर है कि बहुत से लोग हमें जोकर समझ रहे थे और यह बहुत ही कठिन था लेकिन हमें कभी नहीं लगा कि हम यह हासिल नहीं कर पाएंगे।"

Devon का बचपन आसान नहीं था। वह किंग्स्टन की झुग्गियों में बड़े हुए और इंग्लैंड की रॉयल मिलिट्री अकादमी से पढ़े और जमैका की सेना में अफसर बने। वह अपने आपको ऐसा इंसान मानते हैं जो हमेशा कुछ अद्भुत करना चाहते थे। अपने ओलंपिक सपने के दृष्टिकोण से उनका मानना है कि उन्हें अनेक ओलंपिक खिलाड़ियों ने प्रेरित किया है। जब वह 15 वर्ष के थे तो उन्होंने एक धावक बनने का सपना देखा था और 1980 मास्को ओलंपिक खेलों से पहले उन्होंने "द रूट टू मास्को" नामक एक टीवी शो देखा और उन्होंने ओलंपिक खेलों में भाग लेने का सपना रिझाने लगा।

Harris कहते हैं, "उस शो में विभिन्न खेलों के सितारे अपने खेल जीवन ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों के बारे में भी बात कर रहे थे।"

"मुझे यह बात जान कर हैरानी हुई की वह कितने सामान्य और साधारण थे लेकिन उनके सपने अद्भुत थे और उन्हें पाने के लिए जज़्बा भी अनोखा था। मुझे यह समझ आया की कोई भी व्यक्ति ओलंपिक खिलाड़ी बन सकता है और अगर आप ओलंपिक खेलों भाग लेना चाहते हैं तो उन्हें अनुशासन और जूनून का रास्ता अपनाना पड़ेगा। उसी क्षण मैंने ओलंपिक खिलाड़ी में भाग लेने का सपना देखा।"

उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि वह अपने जीवन के बारे में हॉलीवुड फिल्म बनते हुए देखेंगे लेकिन Harris को लगता है कि उनकी कहानी सच में अद्भुत है। उनके अलावा भी एक अन्य अद्भुत कहानी थी जो विश्व ने 1988 कैलगरी ओलंपिक खेलों में देखी गयी। ब्रिटेन के Michael Edwards जिन्हे पूरा विश्व Eddie "द ईगल" के नाम से जाना जाता है, अपनी प्रतियोगिता में अंतिम स्थान पर आये लेकिन पूरे विश्व को अपना दीवाना बना लिया।

'Eddie the Eagle' surrounded by reporters at the 1988 Calgary Olympics

Harris कहते हैं, "Eddie बहुत ही बेहतरीन व्यक्ति हैं और मैं उन्हें 20 वर्ष बाद मिला। कैलगरी ओलंपिक खेलों की 25वी वर्षगाँठ थी और हमें आमंत्रित किया गया था। मैने अपने साथियों को बाद में कहा, 'क्या तुम्हे पता है कि Eddie the Eagle हम लोगों से ज़्यादा लोकप्रिय है। मुझे ऐसे लगा कि वहां बस Eddie थे और मैंने कहा की सुनो मैं भी यहाँ हूँ।' उनके साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा था। मैंने उनके साथ खेला भी और हमने बहुत मज़ा किया।"

वर्तमान जमैका बॉबस्ले टीम की बात करें तो Devon Harris इस बात को मानते हैं कि वह उनसे बहुत बेहतर हैं।

"मुझे लगता है कि हमारे अंदर बहुत क्षमता है और ओलंपिक पदक जीतना वास्तविकता पर आधारित है। हमें पिछले कुछ सालों में मिले ज्ञान और उसका सदुपयोग करते हुए एक जीतने वाली टीम को सम्मिलित करना है।"

"मैंने प्रयास किया की Usain Bolt हमारी टीम का भाग बनें। मैंने उन्हें कहा, 'आप 2016 ओलंपिक खेलों में भाग लेने जा रहे हैं और उसके बाद एक साल का अवकाश लें जिसके बाद 2018 ओलंपिक खेलों में भाग लेने की तैयारी करें।' उन्होंने कहा की उन्हें बहुत ठंड लगेगी और इसी कारण मैं उन्हें मना नहीं पाया।"

Devon Harris

Devon Harris और उनके साथियों ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है और वह 1988 के बाद से विश्व में एक प्रेरणा स्त्रोत बनने का प्रयास कर रहे हैं।

"जब मैं सेना छोड़ने के बारे में सोच रहा था तो मैंने सोचा 'इसके बाद क्या करूँगा?' मैं एक चीज़ कर रहा था और उसने मुझे मेरे जीवन में दिशा देने का काम किया। लेकिन अगला कदम क्या था? बाइबिल में लिखा है की 'खोजो तो तुम्हे मिलेगा।' और आपको एक बार नहीं निरंतर प्रयास करना होता है। आपको अपने आप से बार बार सवाल करना पड़ेगा और अंत में आपको उत्तर मिल जायेगा। सफर आसान हो जाता है लेकिन परिश्रम करना ज़रूरी है।"

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