बॉक्सिंग: संजीत कुमार विश्व चैंपियनशिप में टोक्यो स्वर्ण पदक विजेता ला क्रूज़ को देंगे चुनौती  

टोक्यो ओलंपिक से चूके हैवीवेट बॉक्सर इस टूर्नामेंट में पोडियम फिनिश चाहते हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

भारत के हैवीवेट बॉक्सर संजीत कुमार (Sanjeet Kumar)मई, 2021 में एशियाई चैम्पियनशिप के फाइनल में पहुंचेंगे इस बात का ज्यादा लोगों को भरोसा नहीं था। फिर भी, वो 2016 के ओलंपिक रजत पदक विजेता और दो बार के विश्व चैंपियनशिप कांस्य विजेता कजाकिस्तान के वासिली लेविट (Vassiliy Levit) के खिलाफ स्वर्ण पदक मैच में रिंग के अंदर कदम रखा था। 

अमित पघांल (Amit Phangal) और शिव थापा (Shiva Thapa) दमदार प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ नहीं टिक पाए और पहले ही अपने अंतिम मुकाबले हार चुके थे और संजीत के समर्थक भी उनसे एक और रजत पदक की उम्मीद ही कर रहे थे। क्योंकि, उनका मुकाबला खतरनाक बॉक्सर लेविट के खिलाफ था। लेकिन, अगले तीन राउंड में, जो सामने आया वह किसी चमत्कार से कम नहीं था। 

घड़ी की टिकटिक शुरू होने के साथ ही भारतीय मुक्केबाज ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर घूंसे की झड़ी लगा दी और पहले दो राउंड के बाद स्कोरलाइन उनके पक्ष में 5-0 हो गई। तीसरे राउंड में लेविट ने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और हरियाणा के मुक्केबाज ने 3-2 के विभाजित फैसले से फाइट जीत ली। 

संजीत ने Olympics.com को बताया, "मैंने लेविट को हराया और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इस बात के सामने पदक गौण हो गया।"  

उन्होंने अपने गेम प्लान का खुलासा करते हुए कहा, "मैंने कभी भी कोई मुकाबला जीतने के बाद इतना गर्व महसूस नहीं किया। मुझे पता था कि उसकी सहनशक्ति अच्छी है, लेकिन वह इतना तेज नहीं है। इसलिए, पहले दो राउंड में मैं अनवरत था।" 

लेकिन, किस्मत ने फिर पलटा खाया और एशियाई चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके। विश्व सैन्य खेलों में भाग लेने के दौरान उनके बाएं हाथ की बाइसेप्स चोटिल हो गई और इस कारण उन्हें सर्जरी कराने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्हें कई महीनों के लिए खेल से दूर होना पड़ा और यहां तक कि जॉर्डन में आयोजित एशिया-ओशिनिया ओलंपिक क्वालीफायर से भी चूक गए थे। हालांकि, यह एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्हें पता चला कि भारत से किसी ने भी उनके भार वर्ग में क्वालीफाई नहीं किया है, जिससे उन्हें उम्मीद की एक झलक मिली। उन्होंने क्वालीफायर के अगले दौर के लिए फिर से प्रशिक्षण शुरू किया, लेकिन एक बार जब कोविड-19 महामारी आई, तो ओलंपिक में भाग लेने की उनकी संभावनाओं को खत्म कर दिया। 

संजीत ने निराशाभरी आवाज के साथ कहा, "ओलंपिक पूरी तरह से एक अलग तरह का खेल है। किसी भी अन्य प्रतियोगिता में हासिल किया गया कोई पदक टोक्यो में भाग नहीं ले पाने के नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।"  

लेकिन, उस नुकसान की भावना ने उन्हें एक ऐसी आदत डालने के लिए प्रेरित किया, जिस पर उन्हें गर्व है। खुद को प्रेरित रखने के लिए उन्होंने पढ़ना शुरू किया है। इसने उनके लिए चमत्कार किया है। 

"पढ़ना मेरा पसंदीदा शौक बन गया है। मैं महान एथलीटों की आत्मकथाएं और न केवल बॉक्सिंग बल्कि सभी खेल से संबंधित किताबें पढ़ता हूं। इन दिनों मैं 'द चैंपियन्स माइंड: हाउ ग्रेट एथलीट्स थिंक, ट्रेन एंड थ्राइव' पढ़ रहा हूं।" 

उन्होंने समझाया, "ये किताबें आपको हर चीज में पूर्णता के लिए प्रयास करने के लिए मजबूर करती हैं। कभी-कभी हम सोचते हैं कि हम प्रशिक्षण से पहले यह और वह कर लेंगे। लेकिन, हम सभी चीजों को पूरा नहीं कर सकते हैं। एक बार जब आप अपने दिमाग को प्रशिक्षित करते हैं, तो प्रक्रिया आसान हो जाती है।" 

आगामी विश्व चैम्पियनशिप में संजीत जानते हैं कि वह प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ के खिलाफ होगा। दो बार के ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता क्यूबा के जूलियो सेसर ला क्रूज़ (Julio César La Cruz) स्वर्ण पदक के प्रमुख दावेदारों में से एक होंगे, लेकिन 24 वर्षीय इस चुनौती के लिए तैयार हैं। 

उन्होंने कहा, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ला क्रूज़ सबसे कठिन प्रतिद्वंद्वी होंगे। हालांकि, मैं उससे तेज हूं। शायद मेरे पास ताकत की कमी है। लेकिन, बहुत कम ही मुक्केबाज मुझे गति से हरा सकते हैं। इसलिए, ला क्रूज़ को हराने के लिए गति मेरी सबसे अच्छी चाल होगी। मैंने अपनी ताकत में सुधार किया है और 2019 से काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं।" 

एशियाई चैम्पियनशिप का स्वर्ण पदक ओलंपिक में जाने से चूकने की कमी को पूरा कर देगा। उम्मीद है कि सर्बिया में एक और स्वर्ण उन्हें थोड़ा बेहतर महसूस कराएगा।

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