एशियन गेम्स और CWG के पदक विजेता भारतीय मुक्केबाज बिरजू शाह का हुआ निधन

पूर्व भारतीय बॉक्सर साल 1994 के एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य जीतकर पदक हासिल करने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने थे।

लेखक रौशन कुमार
फोटो क्रेडिट 2018 Getty Images

साल 1994 के एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय मुक्केबज बिरजू शाह का शनिवार रात को झारखंड के जमशेदपुर में 48 साल की उम्र में निधन हो गया।

बिरजू शाह का जन्म साल 1974 में हुआ था। वह एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बॉक्सर थे।

बिरजू शाह ने 19 साल की उम्र में थाईलैंड के बैंकॉक में साल 1993 में आयोजित एशियन जूनियर चैंपियनशिप को जीत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना और भारत का परचम लहराया था।  उन्होंने लाइट फ्लाइवेट (45-48 किग्रा) श्रेणी में कांस्य पदक हासिल किया था।

कॉन्टिनेंटल स्तर पर सफलता हासिल करने के बाद बिरजू शाह को भारतीय बॉक्सिंग संघ ने सीनियर नेशनल कैंप के लिए चुन लिया था।

इसके अगले साल कनाडा के विक्टोरिया में आयोजित हुई कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाज को स्वर्ण जीतने की उम्मीद थी लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में उन्हें केन्या के अबदुररहमान रामाधानी से हार का सामना करना पड़ा और प्रतियोगिता के अंत में उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा।

उन्होंने अपनी फॉर्म को जारी रखते हुए जापान के हिरोशिमा में आयोजित एशियन गेम्स में एक बार फिर पोडियम फिनिश करते हुए भारत के लिए इतिहास रच दिया था।

विश्व रैंकिंग में 7वें स्थान पर रहने के बावजूद बिरजू शाह को अपनी रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से काफी संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने जमशेदपुर के टाटा नगर क्षेत्र में एक सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया हालांकि फिर भी वह अपने खेल से जुड़े रहे और अपने आस-पास के वंचित बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग देते थे।

बिरजू शाह अपने पीछे पत्नी एक बेटा और एक बेटी छोड़कर गए हैं।

ओलंपिक जाएं। यह सब पायें।

मुफ्त लाइव खेल आयोजन | सीरीज़ के लिए असीमित एक्सेस | ओलंपिक के बेमिसाल समाचार और हाइलाइट्स