Bajrang Punia ने अंदरूनी चोट का जोखिम उठाते हुए टोक्यो 2020 ओलंपिक कांस्य पदक जीता

Punia ने अपने दाहिने घुटने के दर्द पर काबू पाकर ओलंपिक खेल टोक्यो 2020 में पुरुष 65 किग्रा कुश्ती में कांस्य पदक हासिल किया।

Bajrang Punia ने ओलंपिक पदक जीतने की स्पष्ट मानसिकता के साथ टोक्यो 2020 में सुर्खियों में आए। पदक का रंग भले ही दूसरी वरीयता के लिए थोड़ा निराशाजनक रहा हो, लेकिन उन्होंने शनिवार को मकुहारी मेस्से हॉल में पुरुषों के 65 किलोग्राम कुश्ती कांस्य पदक मैच में कजाकिस्तान के Daulet Niyazbekov को 8-0 से हराकर अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। 

हालांकि, इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने के लिए उन्हें अपने दाहिने घुटने के दर्द को सहन करना पड़ा। Punia का घुटना रूस में अली अलीयेव टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में चोटिल हो गया था। इस कारण वो टोक्यो 2020 से पहले करीब 25 दिनों तक मैट पर प्रशिक्षण से दूर रहे थे। 

इसके अलावा, दूसरी वरीयता प्राप्त पहलवान ने अपने पैर पर पट्टी बांधकर टोक्यो 2020 में अपने अभियान की शुरुआत की, ताकि यह उनकी चोट और न बढ़े। कांस्य पदक के प्ले-ऑफ से पहले के अपने मुकाबलों के दौरान Punia को असामान्य रूप से रक्षात्मक रवैए खेलते देखा गया। 

Punia ने रविवार को मीडिया से वर्चुअल बातचीत में कहा, "मेरे घुटने में दर्द था (टोक्यो 2020 में) इसलिए, मेरे फिजियो ने मुझे स्ट्रैपिंग की सलाह दी। मैंने उनसे कहा था कि मैं इसके बिना मुकाबला करूंगा, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि इससे चोट और बढ़ सकती है। हमने शुरुआती मुकाबलों में जोखिम से बचने की कोशिश की।"  

हालांकि, Punia कांस्य पदक मुकाबले में पैर पर बिना पट्‌टी बांधे उतरना चाहते थे। चोट का जोखिम उठाने के उनके साहसिक कदम ने उन्हें प्रतिफल मिला। क्योंकि, उन्होंने न केवल कांस्य पदक जीता, बल्कि अपने प्रतिद्वंद्वी पर भी हावी रहे, जिन्हें ओलंपिक से पहले स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था। 

Punia ने कहा, "आखिरी बाउट में मैंने उनसे कहा था कि मैं स्ट्रैपिंग नहीं करूंगा और अगर, चोट और बढ़ जाती है, तो मैं आराम करूंगा। मेरे लिए पदक अधिक महत्वपूर्ण था, चोट का इलाज किया जा सकता था। मैं पदक जीतने की मानसिकता के साथ मैदान में उतरा था। इसलिए, मैंने कांस्य पदक के मैच में कोई पट्टी नहीं बांधी।" 

हरियाणा के पहलवान ने यह भी खुलासा किया कि भारत में उनके डॉक्टरों ने उन्हें टोक्यो 2020 जाने से पहले रूस से स्वदेश लौटने की सलाह दी थी। लेकिन, Punia के दिमाग में केवल एक ओलंपिक पदक था और उनकी योजना अलग थी।

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फोटो क्रेडिट 2021 Getty Images

27 वर्षीय ने कहा, "दाहिने घुटने में दर्द था और डॉक्टर ने मुझे आराम करने की सलाह दी थी। लेकिन, मैं आराम नहीं कर सकता था, क्योंकि हर एथलीट देश के लिए ओलंपिक में खेलना चाहता है। डॉक्टरों ने टोक्यो 2020 से पहले मुझे भारत (रूस से) लौटने की सलाह दी थी। लेकिन, मैंने उनसे कहा कि प्रशिक्षण मेरे लिए महत्वपूर्ण है। मैंने डॉक्टरों से मुझे रिहेब के बारे में बताने के लिए कहा और मैं उसी के अनुसार काम करूंगा।" 

उन्होंने कहा, "मैंने अपनी चोट का इलाज उसी तरह किया, जैसे मेरे फिजियोथेरेपिस्ट ने मुझसे करने के लिए कहा था। मेरे पास रिहेब सत्र थे। मैंने उनसे (डॉक्टरों) कहा था कि मैं फिट रहना चाहता हूं और ओलंपिक में भाग लेना चाहता हूं।" 

वहीं, टोक्यो 2020 के कांस्य पदक विजेता की अपना वजन वर्ग बदलने की कोई योजना नहीं है और वह दुनियाभर में 65 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती स्पर्धाओं में अपनी योग्यता साबित करना जारी रखेंगे।