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बैडमिंटन: जानिए रैकेट के खेल को खेलने का तरीका, नियम और इससे जुड़ी हर जरूरी जानकारी

1992 के समर ओलंपिक में पहली बार इस रैकेट के खेल को शमिल किया गया। जानिए बैडमिंटन का इतिहास, नियम और इसके खेल उपकरणों से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।

5 मिनट द्वारा रौशन कुमार
Momota guide THUMB crop

बैडमिंटन एक रोमांचक और दिलचस्प खेल है। रैकेट के इस खेल को ओलंपिक के अलावा एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे प्रमुख टूर्नामेंट में भी खेला जाता है।

यह खेल एशियाई देशों के साथ ही यूरोपीय देशों में भी काफी पसंद किया जाता है। प्रोफेशनल खिलाड़ियों के तौर डेनमार्क के खिलाड़ी बैडमिंट में काफी रुचि लेते हैं।

क्या आप बैडमिंटन के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं? अगर हां, तो यहां इस खेल से जुड़े नियम, रैकेट के खेल को खेलने का तरीका और इससे जुड़े उपकरणों के बारे में जानकारी हासिल करें।

रैकेट के खेल में प्वाइंट स्कोरिंग सिस्टम

किसी भी खिलाड़ी के द्वारा सर्विस किया गया शटलकॉक या शटल प्रतिद्वंद्वी के कोर्ट की अंतिम रेखा के अंदर जमीन से टकराती है तो एक अंक प्राप्त होता है।

अगर सर्विस करने वाला शटलर शटलकॉक को कोर्ट की अंतिम रेखा के बाहर मार देता है तो उस दशा में विपक्षी खिलाड़ी को अंक मिलता है। अगर शटलकॉक नेट से टकराने के बाद विरोधी खिलाड़ी के पाले में गिरती है या फिर खिलाड़ी रैकेट से शटलकॉक को दो बार हिट करता है तो उस स्थिति में भी सामने वाले खिलाड़ी को अंक मिलता है।

विपक्षी शटलर जब तक नेट को पार नहीं कर लेता तब तक खिलाड़ी को शॉट खेलने की अनुमती नहीं होती है। शटलर के शरीर या रैकेट के साथ नेट के छूने पर भी सामने वाले खिलाड़ी को अंक दिया जाता है।

बैडमिंटन सर्विस का तरीका

रैकेट के खेल में खिलाड़ी अपनी कमर की ऊंचाई से सर्विस करता है। शटलर को यह भी ध्यान रखना होता है कि शटलकॉक अपने बॉक्स से समाने वाले खिलाड़ी के बॉक्स में तिरछी जाए। सर्विस के दौरान दोनों ही खिलाड़ी स्थिर रहते है और अपनी पोज़ीशन में होते हैं।

सिंगल्स में, खिलाड़ी कोर्ट के दाईं ओर से सर्विस करता है। सर्विस करने वाला खिलाड़ी अगर इवेन प्वाइंट (सम संख्या में अंक) लेता है तो वह आगे के अंक के लिए भी कोर्ट के दाईं ओर से ही सर्विस करेगा। अगर किसी गेम के दौरान सर्विस करने वाला खिलाड़ी ऑड प्वाइंट (विषम संख्या में अंक) अर्जित करता है तो वो आगे के अंक के लिए कोर्ट के बाईं ओर से सर्विस करेगा।

जब तक सर्विस करने वाला खिलाड़ी अंक जीतने में कामयाब रहेगा तब तक वह अपनी सर्विस को करना जारी रखेगा।

डबल्स में, सर्विस करने वाला खिलाड़ी दाईं ओर से अपनी सर्व शुरू करता है और जब तक वह प्वाइंट हासिल करना जारी रखता है तब तक वह अपनी टीम के साथी के साथ बारी-बारी से सर्व करता रहता है।

यदि विपक्षी टीम अंक लेने में कामयाब होती है तो फिर सर्विस करने का मौका उन्हें मिल जाता है। मैच में जो खिलाड़ी शुरू में दोनों टीम के लिए सर्व नहीं करता है, उस खिलाड़ी को केवल तभी सर्व करने का मौका मिलता है जब सर्विस का जवाब देने वाला छोर अंक हासिल करता है।

यहां क्लिक कीजिए और BWF के इस डायग्राम से समझिए डबल्स में सर्विस करने के नियम…

बैडमिंटन कोर्ट की लंबाई और चौड़ाई

सिंगल्स में बैडमिंटन कोर्ट 13.41 मीटर (44 फीट) लंबा और 5.18 मीटर (17 फीट) चौड़ा होता है। डबल्स में कोर्ट की चौड़ाई 6.1 मीटर (20ft) होती है ।

नेट की बात करें तो दोनों ही छोर से इसकी ऊंचाई 1.55 मीटर (5 फीट 1 इंच) होती है, जबकि बीच में नेट की ऊंचाई 1.52 मीटर होती है।

शॉर्ट सर्विस लाइन नेट से 1.98 मीटर (6.5 फीट) दूर होती है, जिसे हर खिलाड़ी को सर्विस के दौरान पार करना होता है।

शॉर्ट सर्विस लाइन के अलावा एक बीच की लाइन बाएं और दाएं सर्विस कोर्ट को विभाजित करती है। इसके अलावा एक बेसलाइन होती है, जो डबल्स सर्विस लाइन से 0.76 मीटर (2.5 फीट) की दूरी पर होती है।

प्रत्येक सर्विस कोर्ट (कुल चार) 3.96 मीटर (13 फीट) लंबा और 2.59 मीटर (8.5 फीट) चौड़ा होता है।

Action on badminton courts during the 2018 Japan Open
Action on badminton courts during the 2018 Japan Open

बैडमिंटन बर्डी (शटलकॉक या शटल)

रैकेट के खेल में बर्डी को बैडमिंटन शटलकॉक भी कहा जाता है। यह एक 'बॉल' की तरह होती है।

शटलकॉक एक कोन (शंकु आकार) के आकार की होती है। इसे पंख या फिर सिंथेटिक सामाग्री से बनाया जाता है। इसके बॉटम में एक गोल आकार का कॉर्क या रबर से बना हुआ बेस होता है।

बर्डी 16 पंखों से बनी होती है। यह 62 से 70 मिली मीटर लंबी होती है। इसका वजन 4.74 और 5.5 ग्राम के बीच में होता है। शटल का जो पंख वाला बाहरी हिस्सा होता है, उसका डायमीटर 58 से 62 मिली मीटर का होता है और नीचे लगे कॉर्क या रबर बेस का डायमीटर 25 से 28 मिली मीटर होता है।

ओलंपिक में बैडमिंटन का इतिहास

बार्सिलोना 1992 समर ओलंपिक के बाद से बैडमिंटन नियमित रुप से ओलंपिक का हिस्सा बना हुआ है। अटलांटा 1996  ओलंपिक में मिक्स्ड डबल्स की शुरुआत हुई, उसके बाद से बैडमिंटन में पांच अलग-अलग इवेंट आयोजित किए जाते हैं।

इंडोनेशिया के एलन बुडिकुसुमा ने बैडमिंटन के ओलंपिक डेब्यू पर मेंस सिंगल्स इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि इंडोनेशिया की ही सूसी सुसांती ने वूमेंस सिंगल्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वहीं, रिपब्लिक ऑफ कोरिया के खिलाड़ियो ने मेंस और वूमेंस के दोनों इवेंट में डबल्स का खिताब जीता था।

टोक्यो 2020 से पहले चीन ने कुल 18 स्वर्ण, आठ रजत और 15 कांस्य पदक के साथ ओलंपिक गेम्स में अपना दबदवा बनाए रखा।

कोरिया सात स्वर्ण, छह रजत और छह कांस्य पदक के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि इंडोनेशिया छह स्वर्ण, सात रजत और छह कांस्य पदक के साथ तीसरे स्थान पर है।

डेनमार्क, जापान और स्पेन के पास एक-एक स्वर्ण पदक है। भारत के लिए बैडमिंटन में पीवी सिंधु ने 2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक जीता था, जो कि बैडमिंटन में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उसके बाद टोक्यो 2020 में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था।

दस खिलाड़ियों ने ओलंपिक में दो स्वर्ण पदक जीते हैं।

गाओ लिंग बैडमिंटन में चार ओलंपिक पदक जीतने वाली एकमात्र खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2000 और 2004 में मिक्स्ड डबल्स इवेंट में दो स्वर्ण जीते थे और वूमेंस डबल्स में कांस्य और रजत पदक अपने नाम किया था।

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