टोक्यो 2020 की निराशा को दूर करने के लिए अतानु दास दबाव और अपेक्षाओं से सीख रहे निपटना 

भारतीय पुरुष रिकर्व टीम की अगुआई करने वाले दास ने टोक्यो 2020 में उम्मीदों का दबाव झेला है। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा
फोटो क्रेडिट Justin Setterfield/ Getty Images

भारत की पुरुष रिकर्व टीम के अगुआ अतानु दास (Atanu Das) ने टोक्यो 2020 में मिले अनुभव के बाद तीरंदाजी और रेंज के परे जीवन के बीच सही संतुलन बनाए रखने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि ओलंपिक को लेकर देशवासियों की अपेक्षाओं के दबाव का उनके खेल पर प्रभाव पड़ा है।  

दास का मानना है कि विश्व कप, विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेल या राष्ट्रमंडल खेल (CWG) जैसे आयोजन होने है। ऐसे में वे लंबे समय तक स्थिति के आदी हो सकें। उन्होंने अपनी दबाव सहन करने की क्षमता पर काम करने का भी संकेत दिया है। 

रिकॉर्ड के लिए 29 वर्षीय तीरंदाज को स्थानीय पसंदीदा ताकाहारू फुरुकावा को मात देने में विफल रहने के बाद टोक्यो 2020 में पुरुषों की व्यक्तिगत स्पर्धा के प्री-क्वार्टर में बाहर होना पड़ा था। उन्होंने पिछले राउंड में लंदन 2012 के स्वर्ण पदक विजेता ओह जिन हायक (Oh Jin Hyek) को बाहर कर दिया था। वह भारतीय टीम का हिस्सा थे, जो पुरुषों की टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में बाहर हो गई थी। 

दास ने Olympics.com से कहा, "मुझे लगता है कि हमें खुद को मानसिक रूप से सुधारना चाहिए और ओलंपिक के दौरान बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए।" 

दास ने टोक्यो 2020 में अपनी दूसरी ओलंपिक उपस्थिति की तैयारी में लंबा वक्त गुजारने के बाद तनाव कम करने के लिए अपनी पत्नी तथा हमवतन तीरंदाज दीपिका कुमारी और अपने परिवार के साथ घर से दूर लद्दाख की यात्रा पर जाने का फैसला किया।

टोक्यो में मेन्स टीम के क्वार्टरफाइनल में अतानु दास।
फोटो क्रेडिट Getty Images

श्रेष्ठ तीरंदाज ने कहा, "यात्रा एक तरह से तनाव दूर करने वाली थी। क्योंकि, पिछले कुछ वर्षों से हमने सब कुछ भुलाकर सिर्फ टोक्यो 2020 की तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया था।" 

उन्होंने कहा, "हमने खेल से परे जीवन का त्याग किया था और अपना सब कुछ तीरंदाजी के लिए समर्पित कर दिया था। इसलिए, दिन के अंत में ऐसा लगता है कि हमने सब कुछ खो दिया है, जब प्रदर्शन हमारी उम्मीदों के मुताबिक नहीं होता है। इसलिए, हम सब कुछ संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हम अत्यधिक दबाव न लें।" 

टोक्यो 2020 के अनुभव ने दास को अपने खेल को बहुत गंभीरता से नहीं लेने की सीख दी है। उनका मानना है कि वह अपनी पुनर्जीवित मानसिकता के साथ मेगा इवेंट से कुछ पदक हासिल कर सकते हैं। 

दास ने कहा, "हमें यह नहीं मानना चाहिए कि खेल ही सब कुछ है। इसे हमारे जीवन का एक हिस्सा माना जाना चाहिए। मुझे लगता है कि हम सभी ओलंपिक में पदक जीतने में सक्षम हैं, लेकिन फिर हम मेगा इवेंट के दौरान बहुत गंभीर हो जाते हैं। मुझे लगता है कि अन्य देशों की तरह ओलंपिक में एक पदक जीतने को सामान्य माना जाना चाहिए।"  

वहीं, दास टोक्यो 2020 के बाद उचित प्रशिक्षण की कमी के कारण 29 सितंबर को अमेरिका के यांकटन में तीरंदाजी विश्व कप में अपनी वापसी पर खुद से बहुत अधिक उम्मीद नहीं लगा रहे हैं।

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