संजीत कुमार AIBA विश्व चैम्पियनशिप में टोक्यो 2020 के स्वर्ण पदक विजेता जूलियो सीजर ला क्रूज़ का सामना करने के लिए तैयार 

हैवीवेट बॉक्सर बेलग्रेड में पोडियम फिनिश हासिल करने के लिए दृढ़ हैं। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

मुक्केबाजी के खेल में क्यूबा का दबदबा अच्छी तरह से साबित हो चुका है। दक्षिण-अमेरिकी देश ने ओलंपिक में 85 स्वर्ण पदक जीते हैं, उनमें से 41 पदक मुक्केबाजों ने हासिल किए हैं। 

दरअसल, टोक्यो 2020 से पहले केवल छह मुक्केबाज थे, जिन्होंने ओलंपिक मुक्केबाजी में दो भार वर्गों में स्वर्ण पदक जीते थे। हालांकि, जूलियो सीजर ला क्रूज़ (Julio Cesar La Cruz), रोनिएल इग्लेसियस (Roniel Iglesias) और अर्लेन लोपेज़ (Arlen Lopez) ने जापान में अपनी-अपनी श्रेणियों में स्वर्ण पदक जीतकर उस संख्या को नौ तक पहुंचा दिया। 

रियो में ला क्रूज़ ने लाइट हैवीवेट वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था और टोक्यो के हैवीवेट फ़ाइनल में उन्होंने रूसी मुक्केबाज़ मुस्लिम गाज़ीमागोमेदोव (Muslim Gadzhimagomedov) को 5-0 से हराया था। कहने की जरूरत नहीं है कि AIBA विश्व चैम्पियनशिप में वह हैवीवेट वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए पसंदीदा बॉक्सर बने हुए हैं। 

लेकिन, एक भारतीय मुक्केबाज उन्हें विश्व चैम्पियनशिप में एक और स्वर्ण पदक की राह में चुनौती दे सकते हैं। संजीत कुमार (Sanjeet Kumar) निश्चित रूप से अपने वजन से ऊपर पंचिंग के बारे में एक या दो चीजें जानते हैं। एशियाई चैंपियनशिप के फाइनल में उन्होंने रियो रजत पदक विजेता वासिली लेविट (Vassiliy Levit) को 3-2 से हराकर मैच जीत लिया। भयंकर और निर्दयी कज़ाख-मुक्केबाज पहले दो राउंड में पूरी तरह से बौखला गए थे। हालांकि, उन्होंने तीसरे राउंड में उत्साही वापसी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सर्बिया के लिए उड़ान भरने से पहले उन्होंने Olympics.com से कहा, "मैंने कभी भी कोई मुकाबला जीतने के बाद इतना गर्व महसूस नहीं किया था।" 

हालांकि, वह जानते हैं कि विश्व चैम्पियनशिप एक पूरी तरह से अलग तरह का खेल है। क्योंकि, दुनियाभर के सर्वश्रेष्ठ बॉक्सर शीर्ष पुरस्कार के लिए मुकाबला करेंगे। हालांकि, वह इस आयोजन की भव्यता से विचलित नहीं हैं। 

उन्होंने कहा, "यह बहुत कठिन प्रतियोगिता है। इसमें करीब 670 मुक्केबाज भाग ले रहे हैं। इसलिए, यह बहुत प्रतिस्पर्धी होगा। लेकिन, अगर मैं अपना शत-प्रतिशत देता हूं, तो मैं पदक जीत सकता हूं।" 

संजीत क्वालिफायर के दौरान चोटिल होने के कारण टोक्यो ओलंपिक से चूक गए थे। कोविड-19 महामारी के बाद बाइसेप की चोट ने ओलंपिक भागीदारी के उनके सपने को तोड़ दिया। इसलिए, उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने की भूख कई गुना बढ़ गई है। गोल्ड के लिए यह बिल्कुल तय है कि उन्हें ला क्रूज़ की चुनौती से पार पाना होगा। 

उन्होंने खुलासा किया, "इसमें कोई संदेह नहीं है कि ला क्रूज़ सबसे मुश्किल प्रतिद्वंद्वी होगा। लेकिन, मैं बहुत तेज़ हूं। मैं इस पर अधिक काम कर रहा हूं। शायद मेरे पास ताकत की कमी है, लेकिन बहुत कम मुक्केबाज मुझे गति से हरा सकते हैं। इसलिए ला क्रूज़ को हराने के लिए यह मेरा हथियार बनेगा।"  

स्पीड ट्रेनिंग के अलावा, वह अपनी सहनशक्ति पर भी काम कर रहे हैं। एशियाई चैम्पियनशिप में लेविट ने तीसरे राउंड में शानदार वापसी के साथ उनसे स्वर्ण पदक लगभग छीन लिया। हालांकि, उन्हें लगता है कि पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में वर्तमान राष्ट्रीय टीम के कोच नरेंद्र राणा (Narendra Rana) के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण के बाद उस मोर्चे पर चीजों में सुधार हुआ है। 

बहरहाल, सर्बिया में मुकाबला आसान नहीं होगा। वह काफी लंबे ब्रेक के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर रहे हैं और शुरूआती राउंड में कुछ कमजोर प्रदर्शन होगा। यदि वह इससे उबरने में सफल हो जाते हैं, तो उनके टूर्नामेंट में आगे तक जाने की संभावना है, जहां ला क्रूज़ जैसे दिग्गज इंतजार कर रहे होंगे। 

सर्वश्रेष्ठ बनने का प्रयास कर रहे संजीत ने दृढ़ निश्चय के साथ कहा, "चुनौतियों के बावजूद मैं स्वर्ण पदक जीतना चाहता हूं। उस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए आपको सर्वश्रेष्ठ को हराना होगा।"

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