शीतकालीन ओलंपिक के सपनों को पूरा करने के लिए लाखों का खर्चा कर आकाश आराध्या फ्रांसीसी सितारों के साथ ले रहे प्रशिक्षण  

भारतीय शॉर्ट ट्रैक स्पीड आइस स्केटर अपने शीतकालीन ओलंपिक सपनों को पूरा करने में आने वाली चुनौतियों और सीख के बारे में बताया। 

लेखक दिनेश चंद शर्मा

भारत के शॉर्ट ट्रैक स्पीड आइस स्केटर्स की पहली पीढ़ी के आकाश आराध्या (Akash Aradhya) ने युवाओं के लिए एक रास्ता तैयार किया है। हालांकि, आराध्या के पास बीजिंग 2022 शीतकालीन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का कोई मौका नहीं है, लेकिन पिछले हफ्ते डेब्रेसेन में विश्व कप शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग में 1000 मीटर और 500 मीटर स्पर्धाओं के प्रारंभिक राउंड में बाहर होने के बाद, उनकी यात्रा एक उल्लेखनीय रही है। 

आराध्या ने अपने सफर की शुरुआत रोलर स्केटर के तौर पर की थी। वह 2010 से 2015 तक राष्ट्रीय टीम का हिस्सा थे, इसके अलावा 2010 एशियाई खेलों में खेल के लिए ध्वजवाहक थे। 

हालांकि, आइस स्केटिंग में उन्होंने 2015 में आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जोर देने के बाद पहली बार हाथ आजमाया। 

आराध्या ने Olympics.com को बताया, "2015 में हम कोलकाता में एक बहुत छोटी जगह पर गए। यहीं पर मैंने पहली बार आइस-स्केटिंग करने की कोशिश की और तब से मैं इससे जुड़ा हुआ हूं। लेकिन, ऐसा केवल 15 दिन या साल में एक बार ही होता था, शिमला में बर्फ की उपलब्धता के आधार पर। मेरे महासंघ ने मुझसे कहा कि आप बहुत अच्छा कर रहे हैं और आपको विश्व कप के लिए जाना चाहिए।"  

यह तब हुआ था, जब कर्नाटक के आइस स्केटर ने कैलगरी जाने का फैसला किया और जोफ्रे लारोक (Joffrey Laroque) के अधीन प्रशिक्षण लेना शुरू किया। ओलंपिक चक्र के प्रारंभिक वर्षों में उनके प्रशिक्षण ने तकनीकी खामियों का भी खुलासा किया, जिन्हें बाद में देखा गया और सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई।

आराध्या ने कहा, "मैं तेज और मजबूत था, लेकिन तकनीकी रूप से अच्छा नहीं था। बहुत सारे बदलाव किए जाने की जरूरत थी। हम सहनशक्ति पर प्रशिक्षण लेते थे और अपने कंधों को कम उठाता था। सबसे महत्वपूर्ण मेरी मूल स्थिरता थी, जो अभी भी तय नहीं है, लेकिन यह एक सतत प्रक्रिया है।"  

बाद में प्योंगचांग 2018 शीतकालीन ओलंपिक से पहले उन्होंने जर्मनी में भी प्रशिक्षण लिया, लेकिन अपने बेस को फ्रांस के एक सबसे पुराने स्की रिसॉर्ट में से फॉन्ट-रोमू में स्थानांतरित कर दिया और अब फ्रांसीसी राष्ट्रीय टीम के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं। 

फ्रांस तीसरा देश है, जिसमें भारतीय आइस-स्केटर ने प्रशिक्षण लिया है और इसने फ्रांसीसी सितारों के साथ उनके संबंध जोड़ने और डबल-यूरोपीय चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता सेबेस्टियन लेपेपे (Sebastien Lepape) के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित होने में मदद की है। 

अराध्या ने कहा, "कोविड-19 के बाद, मुझे कैलगरी जाना था, लेकिन ओलंपिक ओवल पूरी तरह से बंद हो गया था। मैं फ्रांस में फॉन्ट-रोमू नामक एक छोटे से गांव में प्रशिक्षण ले रहा हूं, जहां फ्रांसीसी शॉर्ट ट्रैक राष्ट्रीय टीम का बेस है। दिग्गज कोच थिबॉट मेलिन (Thibaut Meline) और एन्यू सरत (Annue Sarrat) हैं। सेबस्टियन लेपेप जैसे शानदार दोस्त हैं और मेरी बहुत मदद करते हैं। एक कोने में प्रवेश करने और बाहर निकलने पर उनके सुझाव वास्तव में मददगार हैं।"  

आराध्या ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जमीनी स्तर पर एक बड़े सुधार की आवश्यकता है। क्योंकि, अक्सर उसके पास सहायक कर्मचारी नहीं होते हैं। इसके अलावा, आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया पिछले साढ़े पांच वर्षों में उसके कुल खर्च का केवल 15 प्रतिशत ही सहयोग कर पाया है, जो साढ़े पांच साल में लगभग 1 करोड़ रुपये के करीब खर्चा है। 

पूर्व राष्ट्रीय चैंपियन ने कहा, "ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिन्हें जमीनी स्तर पर सुधारने की आवश्यकता है। बहुत सारे एथलीट, जो शीतकालीन ओलंपिक के लिए चुने गए हैं, उनके लिए एक पूरा सिस्टम काम कर रहा है। मेरे लिए एक अकेले व्यक्ति के लिए सब कुछ व्यवस्था करना मुश्किल है। मेरा एकमात्र सपोर्ट सिस्टम मेरे कोच और माता-पिता हैं।"  

उन्होंने कहा, "मैं अपने दोस्तों से कहता रहता हूं कि अगर मैंने छह साल या उससे ज्यादा समय का पैसा बचाया होता, तो मैं एक लेम्बोर्गिनी या किसी और महंगी कार ड्राइविंग कर सकता था। मैं एक साधारण जीवन जीने की कोशिश करता हूं, क्योंकि मैं अपने पिता के पैसे खर्च कर रहा हूं। तब भी यह हर माह करीब 1.5 लाख रुपये है। और पिछले साढ़े पांच वर्षों में मेरे पिता ने मुझ पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।" 

वहीं, पुरुषों की 500 मीटर और 1000 मीटर श्रेणियों में उत्कृष्टता की ओर उनका प्रयास, डॉर्ड्रेक्ट में विश्व कप शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग में जारी रहेगा, जो आज से शुरू हुआ था।

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