क्रिकेट और ओलंपिक: जब ग्रेट ब्रिटेन ने फ़्रांस को हराकर जीता था इकलौता क्रिकेट स्वर्ण पदक

ओलंपिक में खेले गए एकमात्र क्रिकेट मैच में दो अर्धशतक और दो पांच विकेट झटकने का रोमांच भी देखने को मिला था।

लेखक सैयद हुसैन
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चार पारियों को मिलाकर सिर्फ़ 366 रन बन पाए थे, लेकिन 1900 ओलंपिक गेम्स में खेले गए इस कम स्कोर वाले टेस्ट मैच क्रिकेट का खेल इतिहास में एक अलग ही महत्व है। ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस के बीच चला ये दो दिनों वाला टेस्ट मैच ओलंपिक इतिहास का एकमात्र क्रिकेट मैच है।

ये एक ऐसा क्रिकेट था जिसमें 22 नहीं बल्कि 24 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, और दोनों ही देशों की ओर से कोई भी ऐसा क्रिकेटर नहीं था जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व किया हो। जबकि 1877 में ही इंग्लैंड ने टेस्ट मैच की शुरुआत कर दी थी, उसने अपना पहला मुक़ाबला ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेला था।

रोचक बात ये है कि 1900 में खेला गया ये पेरिस टेस्ट मैच उस साल का एकमात्र दो देशों के बीच खेला गया टेस्ट क्रिकेट था। हालांकि इस मैच को प्रथम श्रेणी क्रिकेट का दर्जा हासिल नहीं है क्योंकि इसमें एक टीम में 11 से ज़्यादा खिलाड़ी थे और टेस्ट मैच की अवधि सिर्फ़ दो दिन रखी गई थी।

लंदन 2012 के उद्घाटन समारोह के दौरान झलकियों के ज़रिए ग्रेट ब्रिटेन के प्राचीन क्रिकेट इतिहास को दिखाया गया था
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पेरिस 1900 टेस्ट मैच की यादें

1896 में हुए पहले एथेंस ओलंपिक में ही क्रिकेट को शामिल करने की योजना थी, लेकिन फिर आख़िरी वक़्त पर क्रिकेट इसका हिस्सा नहीं बन पाया था। हालांकि, चार साल बाद इस खेल ने ओलंपिक में अपना डेब्यू कर लिया।

1900 में ग्रेट ब्रिटेन, फ़्रांस, नीदरलैंड और बेल्जियम ने इस खेल में शिरकत करने के लिए मन बना लिया था, पर ओलंपिक की मेज़बानी नहीं मिलने की वजह से नीदरलैंड और बेल्जियम ने इस खेल में प्रतिस्पर्धा नहीं की।

जिसके बाद साइकलिंग स्टेडियम वेलोड्रोम डी विन्सेनेस में ग्रेट ब्रिटेन और फ़्रांस के बीच फ़ाइनल मुक़ाबला खेला गया था। यूरोपियन दिग्गज देशों के बीच मौजूदा समय में जिसे टेस्ट मैच कहते हैं उसी फ़ॉर्मेट में इसका आयोजन हुआ। दोनों देशों ने दो-दो पारियां खेलीं जो दो दिन चली। वर्तमान समय में टेस्ट मैच आमूमन पांच दिनों (कुछ टेस्ट चार दिनों के भी खेले जाते हैं) का होता है। उस मैच में दोनों कप्तानों की रज़ामंदी के बाद प्रत्येक टीम के 12 खिलाड़ियों ने बल्लेबाज़ी की थी।

बेहद कम स्कोर वाला रहा था ओलंपिक टेस्ट क्रिकेट मैच

दोनों ही देशों के किसी राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने मैच में शिरकत नहीं की थी, ग्रेट ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व डेवॉन और समरसेट वांडेरर्स क्लब ने किया था जबकि उनके सामने फ़्रेंच एथलेटिक क्लब यूनियन थी जिसमें ब्रिटिश प्रवासियों की मौजूदगी थी।

दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने के ठीक पांच मिनट पहले ग्रेट ब्रिटेन ने फ़्रांस को 158 रनों से शिकस्त दी थी। दोनों पारियों को मिलाकर फ़्रांस सिर्फ़ 104 रन ही जोड़ पाया था।

आश्चर्यजनक बात ये है कि विजेता ग्रेट ब्रिटेन को रजत पदक जबकि फ़्रांस को कांस्य पदक मिला था। साथ ही साथ दोनों टीमों को एफ़िल टॉवर की आकृति का मिनिएचर भी दिया गया था।

बाद में ये पदक क्रमश: स्वर्ण और रजत में बदल दिए गए थे, और इस प्रतिस्पर्धा पर आधिकारिक तौर पर 1912 में ओलंपिक इवेंट की मुहर लगी थी।

ग्रेट ब्रिटेन के कप्तान चार्ल्स बेशक्रॉफ़्ट और अलफ़्रेड बॉवरमैन ही ऐसे दो खिलाड़ी थे जिन्होंने मैच में अर्धशतक जड़ा हो, इन दोनों ने ही ग्रेट ब्रिटेन के लिए दूसरी पारी में अर्धशतक लगाया था। गेंदबाज़ी में ग्रेट ब्रिटेन की ओर से फ़्रेडरिक क्रिश्चियन ने पहली पारी में 7 विकेट लिए थे, जबकि दूसरी पारी में मोन्टागु टॉलर के 9 रनों पर 7 विकेट (7/9) ने फ़्रेंच टीम को नेस्तनाबूद कर दिया था।

स्कोर: ग्रेट ब्रिटेन (117 और 145/5 पारी घोषित) ने फ़्रांस (78 और 26) को 158 रनों से मात दी।

लंदन 2012 ओलंपिक गेम्स के उद्घाटन समारोह के दौरान कलाकारों ने एक अंग्रेजी ग्रामीण दृश्य को चित्रित किया था।
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कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में क्रिकेट

1904 में आयोजित सेंट लुईस ओलंपिक में भी वैसे तो क्रिकेट को शामिल किया गया था, लेकिन आख़िरी लम्हों में प्रतिस्पर्धी देशों की कमी होने की वजह से इसे बाहर कर दिया गया।

लिहाज़ा ओलंपिक में क्रिकेट सिर्फ़ एक ही बार शामिल हो पाया, लेकिन क्रिकेट को तीन बार उन बड़ी प्रतियोगिताओं में जगह मिली है जहां कई खेलों का समावेश होता है। ये प्रतियोगिताएं थीं: 1998 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010 एशियन गेम्स और 2014 एशियन गेम्स।

1900 ओलंपिक के बाद पहली बार 1998 कॉमनवेल्थ गेम्स में क्रिकेट किसी मल्टिस्पोर्ट्स इवेंट में शामिल हुआ था। वेस्टइंडीज़ की टीम जहां कई देशों में बंटी हुई थी, तो वहीं उत्तरी आयरलैंड भी एक अलग देश की तरह प्रतिस्पर्धा में शामिल हुआ था।

इस टूर्नामेंट में क्रिकेट के कई बड़े और दिग्गज नामों ने हिस्सा लिया था जिनमें सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, वीवीएस लक्ष्मण, महेला जयवर्धने, कर्टली एम्ब्रोज़, स्टीव वॉ, मार्क वॉ और एडम गिलक्रिस्ट शामिल थे।

1998 कॉमनवेल्थ गेम्स में क्रिकेट का स्वर्ण पदक दक्षिण अफ़्रीका के नाम था जिनके कप्तान शॉन पोलॉक थे। फ़ाइनल मुक़ाबले में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 183 रन बनाए थे जिसे दक्षिण अफ़्रीका ने आसानी के साथ हासिल कर लिया था। जबकि कांस्य पदक के मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड ने श्रीलंका को शिकस्त देकर पदक हासिल किया।

अंतरर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) की आधिकारिक वेबसाइट को उस समय जीत के बाद दिए इंटरव्यू में शॉन पोलॉक ने कहा था, ‘’पोडियम पर खड़े होना, पदक स्वीकार करना और फिर राष्ट्रीय एंथेम गाना एक ऐसा अनुभव था जो मैं कभी नहीं भूल सकता।‘’

एशियन गेम्स में भी क्रिकेट ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है और वह भी दो-दो बार, जिसमें पुरुष और महिला दोनों ही स्पर्धाओं में एशियाई देशों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था। पहली बार 2010 एशियन गेम्स में क्रिकेट को शामिल किया गया था और फिर दूसरी और आख़िरी बार 2014 एशियन गेम्स में गेंद और बल्ले के बीच संघर्ष देखने को मिला। पाकिस्तानी महिला क्रिकेट टीम दोनों ही बार क़ामयाब रहीं और दोनों ही संस्करणों में स्वर्ण पदक जीता था, जबकि बांग्लादेशी महिला टीम दोनों बार रजत पदक विजेता रही। जापान और श्रीलंका की महिला टीम को एक-एक बार कांस्य पदक हासिल हुआ।

जबकि पुरुष क्रिकेट में बांग्लादेश का रिकॉर्ड बेहतर रहा था, 2010 में बांग्लादेश ने जहां स्वर्ण पदक जीता तो 2014 में उनके नाम कांस्य पदक रहा। 2014 एशियन गेम्स में श्रीलंका गोल्ड मेडलिस्ट रहा, जबकि दोनों ही बार रजत पदक विजेता अफ़ग़ानिस्तान की टीम रही और एक बार कांस्य पदक पाकिस्तान ने जीता।

एक बार फिर 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में क्रिकेट को शामिल किया जा रहा है, लेकिन इस बार सिर्फ़ महिला क्रिकेट टीम के बीच ही प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। हालांकि अभी भी इस पर बातचीत जारी है कि पुरुष क्रिकेट टीम को भी शामिल किया जाए।

इसके अलावा अगर एक बार फिर ओलंपिक में क्रिकेट को शामिल किया गया तो ये क्रिकेट फ़ैन्स के लिए किसी सपने के सच होने जैसा पल होगा।

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