ब्लू कॉर्नर:  टोक्यो 2020 में  वेसम सलमाना रिफ्यूजियों के लिए खूब लड़ाई लड़ रहे हैं

जर्मनी में ट्रेनिंग और बॉक्सिंग के लिए सलमाना ने सीरिया में युद्ध को पीछे छोड़ दिया और अब 9 साल बाद दूसरे ओलंपिक के लिए बदलाव लाने में लगे है

वेसम सलमाना सीरियाई मूल के ओलंपियन मुक्केबाज हैं, जो IOC शरणार्थी एथलीट छात्रवृत्ति की मदद से जर्मनी के सारब्रुकन में ट्रेनिंग ले रहे है ।

सलमना ने लंदन 2012 ओलंपिक खेलों में सीरिया के झंडे के नीचे लड़ाई लड़ी, लेकिन 2015 में युद्ध की असुरक्षा की वजह से वे अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ वहां से निकल गए और अपनी मुक्केबाजी को जारी रखने के लिए आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के साथ टोक्यो 2020 लड़ने का फैसला किया ।

लंदन 2012 में उन्हें कज़ाख सेनानी कनत अबुतालिपोव -63 किग्रा (बैंटमवेट) से हुई भिड़ंत में पराजित होना पड़ा था, लेकिन चार साल बाद जब उन्हे उस समय तकलीफ, अराजकता और अपने परिवार को जर्मनी ले जाने के बीच एक और मौका मिला, लेकिन फिर रियो 2016 ओलंपिक में वापसी करने का समय लगभग निकल गया था ।

Olympics - London 2012 Olympic Games - ExCel Centre, London - 28/7/12 Boxing - Men's Bantam (56kg) Last 32 - Syrian Arab Republic's Wessam Salamana looks dejected after defeat. Credit: Action Images / Andrew Boyers 

हालांकि सलमाना के पास 35 साल की उम्र में अब भी ओलंपिक खेलने का मौका है और इस समय वे लड़ने के लिए फिट भी है, अनुभवी कोच हेइको स्टैक के साथ सारब्रुकन के पास वोएल्कलिंगन में प्रशिक्षण, और नौ साल के अंतराल के बाद अपनी दूसरी ओलंपिक में शामिल होने का लक्ष्य बना रहे है ।

अब टूर्नामेंट रद्द होने, लॉकडाउन और COVID-19 प्रतिबंधों के बीच, अनुभवी फाइटर घर पर फिट रह रहे हैं और रिंग में आने के लिए हर मौके का फायदा उठा रहे हैं।

जर्मनी की राष्ट्रीय मुक्केबाजी और किक-बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पिछले उपविजेता, सलमाना ने स्थानीय मुक्केबाज वेन्सन किर्कोरोव से हारने से पहले पोलैंड के डोमिनिक पलक के खिलाफ सोफिया में जनवरी 2020 के स्ट्रैंड्जा टूर्नामेंट में अपना पहला मुकाबला जीता।

इस साल 2021 में वह कोलोन बॉक्सिंग कप में पोडियम पर थे और एक टूर्नामेंट में तीसरा स्थान हासिल कर रहे थे, जो एक गौरवशाली परंपरा के साथ 1970 तक चर्चा में था - एक जिसने क्यूबा के तीन बार के ओलंपिक चैंपियन टेओफिलो स्टीवेन्सन के कैलिबर के सितारों की मेजबानी की ।

रिंग के अंदर सलमना भले ही एक अनुभवी फाइटर हों, लेकिन बाहर उनकी लड़ाई का तरीका बेहद अलग था ।

एक नई भाषा सीखने और अपने परिवार के साथ एक नई संस्कृति में एकीकृत होने जैसी चुनौतियों का सामना करना, किसी के लिए भी किसी भी समय कठिन हो सकता है, लेकिन एक ही समय में ओलंपिक में हिस्सा लेने के साथ साथ वैश्विक महामारी से निपटने की कोशिश करना जरूरी होता है ।

किस्मत से वेसम के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण और मानसिक शक्ति का ही उनकी सबसे बड़ी संपत्ति है ।

उन्होंने ओलंपिक दिवस के मौके पर अपने बच्चों के साथ दुनिया भर के साथ भाग लिया, वे बच्चों के साथ अपनी पीठ पर प्रेस-अप कर रहे थे और हर जगह महत्वाकांक्षी ओलंपियनों को प्रेरणा के शब्दों की पेशकश कर रहे थे ।

उन्होने बताया कि " ट्रेनिंग जारी रखे, हार न माने, ओलंपिक का सपना पूरा होने जा रहा है "।