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पोपोल मिसेंगा को आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के साथ अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद: 'जूडो ने मुझे बचाया'

कांगो के जुडोका पोपोल मिसेंगा एक बार फिर सबसे बड़े खेल मंच पर रिफ्यूजी का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद कर रहे हैं।
लेखक लक्ष्य शर्मा

पोपोल मिसेंगा की नजर इस समर टोक्यो में होने वाले दूसरे ओलंपिक खेलों पर है।

रियो 2016 में पहली बार आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के हिस्से के रूप में चुने गए मिसेंगा ने जूडो -90 किग्रा वर्ग के अंतिम 16 में जगह बनाई थी। अंत में उन्हें विश्व चैंपियन और अंतिम कांस्य पदक विजेता ग्वाक डोंग-हान से हार मिली।

रियो के प्रशंसकों ने उन्हें अपने दिलों में इज्जत दी। जहां वह 2013 में शरण मांगने के बाद से रह रहे हैं और प्रशिक्षित हो रहे हैं, "पो-पो-ले! पो-पो-ले!" के नारे पूरे कैरिओका एरिना में गूंज रहे थे।

24 वर्षीय मिसेंगा ने उस समय कहा था, "मैं यहां आकर बहुत खुश हूं क्योंकि मैं उस कठिन सड़क को पार करते हुए रियो पहुंचा था।"

नौ साल की उम्र में उन्हें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में गृहयुद्ध से भागना पड़ा, जहां उन्होंने अपना परिवार खो दिया और आठ दिनों के बाद जंगल में अकेले घूमते हुए मिले थे।

किंशासा के एक अनाथालय में उन्होंने शरण ली और यहां से उनका जूडो में लगाव लगने लगा और बस यही से उनके जीवन ने करवट ली।

उन्होंने कहा था कि "जब आप एक बच्चे होते हैं, तो आपको क्या करना है इसके बारे में निर्देश देने के लिए आपके पास एक परिवार होना चाहिए लेकिन मेरे पास लय नहीं था। जूडो ने मुझे शांति, अनुशासन, प्रतिबद्धता  देकर मेरी मदद की।”

लेकिन प्रतिभाशाली युवा जुडोका ने बहुत उत्पीड़न और कड़ी सजा का सामना किया था।

2013 जूडो विश्व चैंपियनशिप के लिए ब्राजील में अपने जीवन के डर से, मिसेंगा ने शरण लेने और रियो डी जनेरियो में बेहतर जीवन के लिए एक शॉट लेने का फैसला किया।

खराब शुरुआत के बावजूद उनके लिए चीजें अचानक बदल गईं। 2014 में मिसेंगा को शरण दी गई थी और वह जिस जूडो से प्यार करते थे, अब वह उसे वापस हासिल कर सकते थे।

अब 28 साल की उम्र में मिसेंगा टोक्यो 2020 के लिए कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं।

रियो 2016 और टोक्यो 2020 के लिए उनके चयन के बारे में पूछे जाने पर मिसेंगा ने अंतर्राष्ट्रीय जूडो महासंघ को बताया:

"मैं बहुत खुश था जब मुझे पता चला कि मुझे आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम के लिए चुना गया था। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता था, अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर दुनिया के सभी रिफ्यूजी का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम होना, यह मुझे ताकत देता है। मुझे उन लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करना था, जिन्हें अपना घर और देश छोड़ना पड़ा। मुझे भी जूडो ने मुझे बचाया है"- पोपोल मिसेंगा

ब्राजील में ट्रेनिंग

अब 28 साल की उम्र में, मिसेंगा ब्राजील में टॉप सुविधा में प्रशिक्षण ले रहे हैं, जहां ओलंपिक और विश्व चैंपियन खिलाड़ी भी ट्रेनिंग करते हैं।

मिसेंगा ने जून 2019 में वर्ल्ड रिफ्यूजी डे पर आईजेएफ को बताया था कि "मैं ब्राजील में रहता हूं, मेरा दत्तक देश, रियो डी जनेरियो में इंस्टिट्यूटो रीकाओ में फ्लावियो कैंटो के नेतृत्व में है, जहां ओलंपिक और विश्व चैंपियन, राफेला सिल्वा ने जूडो शुरू किया था।"

उन्होंने 2016 में रिफ्यूजी टीम सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि "मेरे देश में मेरे पास घर, परिवार या बच्चे नहीं थे। वहां युद्ध ने बहुत अधिक मृत्यु और भ्रम पैदा किया और मुझे लगा कि मैं अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए ब्राजील में रह सकता हूं।”

मिसेंगा ने कहा कि जूडो दूसरों को उम्मीद देने का एक तरीका है।

"मैं सपने देखने के लिए आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम का हिस्सा बनना चाहता हूं, सभी रिफ्यूजी को आशा देना और उनका दुख दूर करना चाहता हूं।"

"मैं दिखाना चाहता हूं कि रिफ्यूजी महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं।" - पोपोल मिसेंगा


15 जून, 2016 को रियो में ओलंपिक विलेज में आईओसी अध्यक्ष थॉमस बाक के साथ पोपोल मिसेंगा और योलांडे माबिका हंसते हुए। (फोटो: फेलिप डाना-पूल/गेटी इमेज)
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ओलंपिक एकजुटता और आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम

रिफ्यूजी एथलीटों के लिए ओलंपिक सॉलिडेरिटी स्कॉलरशिप की मदद से मिसेंगा अपने खेल को प्रशिक्षित करने और ध्यान केंद्रित करने में सक्षम है।

प्रशिक्षण और उनके मेजबान राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों की मदद से रिफ्यूजी एथलीटों को ओलंपिक के लिए प्रशिक्षण और लक्ष्य बनाने के लिए समर्थन और प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन यह उससे भी आगे चले गए, जिससे एथलीटों को खेल के माध्यम से करियर और बेहतर भविष्य बनाने में मदद मिलती है।

मिसेंगा को टोक्यो खेलों में भाग लेने के उद्देश्य से रिफ्यूजी एथलीट छात्रवृत्ति-धारकों की 52-मजबूत टीम के हिस्से के रूप में चुना गया था।

21 मेजबान देशों में स्थित और मूल रूप से 13 अलग-अलग देशों के रहने वाले, एथलीटों ने ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होने के लिए बड़ी बाधाओं को दूर किया है।

टोक्यो 2020 में टीम के शेफ डे मिशन केन्या के पूर्व मैराथन विश्व रिकॉर्ड धारक टेगला लोरूप होंगे, जिन्हें रियो 2016 में इसी तरह की भूमिका निभाई थी।

"आशा का प्रतीक"

आईओसी के अध्यक्ष थॉमस बाक ने कहा: जिस दिन मिसेंगा के लिए अच्छी खबर आई कि वह 2019 में शरणार्थी एथलीट छात्रवृत्ति-धारकों की सूची में शामिल हैं और संभावित रूप से टोक्यो ओलंपिक में भी हिस्सा लेंगे।

“वर्ल्ड रिफ्यूजी डे पर हम लाखों शरणार्थियों की ताकत, साहस और दृढ़ता का जश्न मनाते हैं। रिफ्यूजी छात्रवृत्ति धारकों की सूची की घोषणा के साथ, हम यह दिखाना चाहते हैं कि रिफ्यूजी खेल और समाज के लिए एक समृद्धि हैं।“

"घोषित सभी एथलीट आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम टोक्यो 2020 का हिस्सा बनने का लक्ष्य रखते हैं। यह टीम एक मानवीय यात्रा की निरंतरता है, जो पहली आईओसी रिफ्यूजी ओलंपिक टीम रियो 2016 के साथ शुरू हुई थी।“

"टीम दुनिया भर के सभी रिफ्यूजी के लिए आशा का संकेत भेजेगी और रिफ्यूजी संकट की भयावहता के बारे में सभी को याद दिलाएगी।