फोटो क्रेडिट Michael Steele

डॉक्टर क्लॉस बार्टोनिट्ज ने नीरज चोपडा की खास ट्रेनिंग से हटाया पर्दा, जेवलिन थ्रो के दौरान इस्तेमाल करते थे ये तकनीक

क्लाउस बार्टोनिट्ज़ बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ हैं जिन्होंने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के साथ काम किया, जर्मन डॉक्टर टोक्यो में भारतीय जेवलिन थ्रोअर के हर पल साथ थे।
लेखक शिखा राजपूत

डॉक्टर क्लाउस बार्टोनिट्ज़ के ईमेल हस्ताक्षर में तीन भाषाओं में तीन खास शब्दों में से एक हिंदी में कुछ इस तरह है, बूंद बूंद से घड़ा भरता है। इस मुहावरे का मतलब यह है कि ''लगातार मेहनत करते रहने से सफलता जरूर मिलती है''।

क्लाउस बार्टोनिट्ज़ ने बताया कि उन्होंने आज से चार-पांच साल पहले अपने ईमेल साइनऑफ में मुहावरों का इस्तेमाल किया है, बाकी के दो मैंडरिन और लैटिन भाषा में हैं। 1975 से एथलीटों और कोचों के साथ काम कर रहे अनुभवी जर्मन बायोमैकेनिक्स विशेषज्ञ बार्टोनिट्ज़ ने Olympics.com को बताया कि अब ''वह उस हिंदी मुहावरे को बदलना चाहते हैं।''

"यह केवल मेहनत नहीं है जो सफलता की ओर ले जाती है। अगर आप हर समय गलत काम करते रहेंगे तो आप कभी सफल नहीं होंगे।

"एक अमेरिकी फुटबॉल कोच [विंस लोम्बार्डी] की एक कहावत है, जिसके अनुसार केवल अभ्यास करने से सफलता नहीं मिलती है, बल्कि सफलता के लिए सही अभ्यास करना जरूरी होता है''।

 “जब प्रशिक्षण की बात आती है तो यह मेरी पसंदीदा कहावत है। सिर्फ आपको ट्रेनिंग ही नहीं लेनी है, बल्कि आपको खुद को अच्छी तरह से ट्रेन करना होगा, तभी सफलता मिलेगी।"

टोक्यो में कोई 90 मीटर थ्रो क्यों नहीं कर सका?

टोक्यो ओलंपिक में क्लॉस बार्टोनिट्ज़ ने भारत के नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) को मेंस जैवलिन थ्रो में स्वर्ण पदक के लिए प्रशिक्षित किया था, तकनीकी रूप से उन्होंने बताया कि कोई भी एथलीट टोक्यो 2020 फाइनल में 90 मीटर के निशान के करीब भी भाला क्यों नहीं फेंक पाया।

यहां तक ​​​​कि जोहान्स वेटर (Johannes Vetter) का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड 97.76 मीटर का है, लेकिन वह टोक्यो में नौवें स्थान पर 82.52 मीटर के स्कोर तक ही सीमित रहे, जबकि वेटर ने कहा था कि वह टोक्यो 2020 में 90-प्लस फेंक देंगे।

“आपकी तकनीक को सही तरह से इस्तेमाल करने के लिए दबाव बहुत अधिक था। हो सकता है कि उन्हें थोड़ा और पीछे जाना चाहिए ताकि आप डिलीवरी के समय अधिक समय तक चल सकें; यह चीज वही है जो किसी भी एथलीट को ट्रेनिंग में करना चाहिए, ताकि अगली बार आप इस प्रकार के थ्रोइंग को सही से लागू कर सकें।''

"जब हम यह कहते हैं कि शरीर के पिछले भाग को जमीन पर बहुत दृढ़ रखने की जगह यह बहुत जल्दी बाहर की ओर निकल जाता है। और यह आप तब कर सकते हैं जब आप लाइन से थोड़ा आगे हों। आप सोच सकते हैं कि आप कुछ दूरी कम कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है। आप लाइन से (आगे) पीछे रहते हैं लेकिन आप अधिक कुशलता से थ्रो कर सकते हैं।''

चेक रिपब्लिक के जैकब वाडलेज (Jakub Vadlejch) और विट्ज़स्लाव वेसेली (Vítězslav Veselý), टोक्यो 2020 के रजत और कांस्य पदक विजेता और जर्मनी के जूलियन वेबर (Julian Weber) जो चौथे स्थान पर रहे, इन सभी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड नीरज चोपड़ा से बेहतर है।

क्लॉस बार्टोनिट्ज़ के मुताबिक, ''भारतीय खिलाड़ी ने फील्ड पर दबाव बनाया और फाइनल की शुरुआत 87.03 और 87.58 मीटर के स्टैंडआउट थ्रो के साथ की।''

वेबर बाकी लोगों में अकेले थे जिन्होंने अपने पहले प्रयास (85.3) मीटर पर 85 मीटर से अधिक का स्कोर किया। वेसेली ने इसे अपने तीसरे (85.44) मीटर और वाडलेज ने (86.67) मीटर पर अपने पांचवें स्थान पर जगह बनाई। बाकी आठ में से किसी ने 85 मीटर का थ्रो नहीं किया।

 बार्टोनिट्ज़ ने कहा, "प्रशिक्षण की तरह योग्यता भी अच्छी रही और जिससे उन्हें (नीरज) फाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास मिला। यह हो सकता है कि 87.58 मीटर का स्कोर किसी काम का ना हो। क्योंकि आप नही जानते कि विरोधी कितनी दूर फेंकेंगे।''

“लेकिन यह अधिक विचार करने की बात है, कि दूसरे एथलीटों को अब और अधिक फेंकना पड़ा और पहले दो थ्रो के बाद नीरज सिर्फ इंतजार कर सकता था।''

“कोई भी एथलीट पहले ही एक शानदार थ्रो करके बाकी सभी एथलीट को मानसिक रूप से परेशानी कर सकता था। लेकिन वह अकेला था जिसने ऐसा किया, और वेटर अपनी तकनीक को परिस्थितियों के हिसाब से नहीं ढाल पाए।"

गिरने के बाद भी नीरज चोपड़ा के पास थी बेहतरीन तकनीक

क्लॉस बार्टोनिट्ज़ से पूछे जाने पर कि क्या यह कहा जा सकता है कि नीरज चोपड़ा ने टोक्यो 2020 फाइनल में सर्वश्रेष्ठ तकनीक का प्रदर्शन किया था, इस पर उन्होंने सहमति व्यक्त की, लेकिन यह भी बताया कि वास्तव में जीत का अंतर इतना नहीं था।

"यह कहा जा सकता है। नीरज सबसे तेज रन-अप था, लेकिन 91 सेमी चेक रिपब्लिक एथलीट वाडलेज के अंतर के साथ है। यह फुल थ्रो का सिर्फ 1 फीसदी से ज्यादा है । वास्तव में इसके कोई मायने नहीं है। लेकिन बॉटम लाइन यह है कि (नीरज के पास) सबसे दूर का थ्रो और भाला फेंकने के सही कोण के साथ तेजी भी है।”

नीरज चोपड़ा ने क्वालीफिकेशन के साथ-साथ टोक्यो खेलों के फाइनल में अपने थ्रो के बाद गिरते हुए शरीर को अपनी हथेलियों पर थामा है। उनके शुरुआती कोच में से एक नसीम अहमद ने टिप्पणी की है कि वह हरियाणा के पंचकुला में प्रशिक्षण के दौरान कभी भी इस तरह नहीं गिरे थे।

बार्टोनिट्ज़ के पास इस बात को समझाने का शांत और विचारशील तरीका है, और वह कहते हैं कि इस तरह की फॉलिंग स्टाइल कभी-कभी चोट का कारण बन सकती है। लेकिन 1996 में चेक रिपब्लिक में इस स्टाइल की वजह से कुछ बेहतरीन थ्रो भी बनाए गए हैं, जिसमें 98.48 मीटर का वर्तमान विश्व रिकॉर्ड भी शामिल है, जो कि जॉन ज़ेलेज़नी (Jan Železný) ने बनाया था।

"कुछ महान थ्रोअर जिन्होंने विश्व रिकॉर्ड, राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए थे, इसका इस्तेमाल करते हैं, उनके ऊपरी शरीर में बहुत ताकत होती है और फिर इस दशा में होते हुए आपको अपने हाथों पर गिरना चाहिए। ज़ेलेज़्नी का वर्तमान विश्व रिकॉर्ड इस तरह की स्टाइल द्वारा फेंका गया था।''

"लेकिन इसका दूसरा पक्ष है, ऐसा करने की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह बहुत मुश्किल है। आपको बहुत तेज होना चाहिए और ऐसा करने के लिए आपके पास बहुत अच्छा समय होना चाहिए।''

 "आदर्श रूप से अगर आप चाहते हैं कि ऊपरी शरीर के साथ थोड़ी सी पीठ की लचक के साथ एक बहुत अच्छी थ्रोइंग की स्थिति से पीछे आना और फिर आगे बढ़ना। तब फॉल नहीं हो पाएगा। यह तभी होगा जब आप सीधे होंगे, आप पीछे चलेंगे और गिरेंगे और अपने हाथ से जमीन को छूएंगे।''

"कुछ एथलीट इससे घायल भी हो सकते हैं, जैसे एस्टोनियाई मैग्नस कर्ट (Magnus Kirt) को कंधे की समस्या थी और इस साल प्रतिस्पर्धा भी नहीं कर सके।"

फॉलिंग स्टाइल की खूबियों पर काफी बहस हो सकती है। लेकिन नीरज को 2019 में सबसे बड़ा झटका लगा था, जब उन्हें अपनी कोहनी की सर्जरी करानी पड़ी थी। मशहूर आर्थोपेडिक सर्जन दिनशॉ पारदीवाला ने मुंबई में उनका ऑपरेशन किया था।

क्लॉस बार्टोनिएट्स का कहना है कि बेल्जियम में सर्जरी कराने का विकल्प था, लेकिन नीरज ने कुश्ती की फोगट बहनों के प्रोत्साहन के बाद डॉ पारदीवाला को चुना।

“नीरज से इस सर्जरी को बेल्जियम में कराने की पेशकश की गई थी। लेकिन एक महान स्पेशलिस्ट हैं जिनकी सिफारिश उन्हें और कोच उवे होन (Uwe Hohn) को की गई थी। लेकिन उन्होंने इसे भारत में कराना जरूरी समझा। और हमारे पास भारत में भी महान स्पेशलिस्ट हैं।''

"जब आप इस तरह की सर्जरी के लिए जाते हैं, तो आप डॉक्टर को पहले से जानते हैं, आप उस पर भरोसा करते हैं, इसलिए आप चिंतित नहीं होते हैं। आप यह नहीं सोच रहे होते हैं कि शायद मैं अपना हाथ खो दूं या कुछ और भी।''

"मैं उस समय उनके साथ नहीं था लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें उनपर बहुत भरोसा था कि यह एक महान स्पेशलिस्ट हैं और वह अच्छा ही करेंगे। और उसने ऐसा किया भी, सर्जरी अच्छी तरह से हुई और इसी तरह रिहैब का दौर भी सही रहा।”

क्लॉस बार्टोनिट्ज़ ने कहा, ''रिहैब का दौर बहुत सीधा था, क्योंकि नीरज को यह तेज स्पीड का गिफ्ट मिला है। वह ऐसा व्यक्ति नहीं है जो वजन उठाकर बहुत जल्दी ताकत हासिल कर लेता है। उसका बड़ा फायदा यह है कि उसकी गति एक विस्फोट की तरह तेज है और वह उसे नियंत्रित कर सकता है।''

“यह केवल विस्फोटक होने के बारे में नहीं है, बल्कि आपको इसे नियंत्रित भी करना चाहिए, जैवलिन थ्रो में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जिस समय आप इस ताकत को लगा रहे हैं वह ताकत कुछ समय के लिए होती है।''

"इसलिए हम उसकी ताकत जानते हैं, हम आसानी से उसके अंदर बदलाव कर सकते हैं। आप मांसपेशियों की प्रणाली को अपनाते हुए सप्ताह दर सप्ताह वजन बढ़ाते हैं। लेकिन भाला फेंकने के लिए ताकत का विकास करना बहुत मुश्किल काम है।'' और उसके लिए आपको केवल थ्रो करने' की नहीं, बल्कि पूरे अभ्यास की आवश्यकता होती है।