लिएंडर पेस-महेश भूपति: द इंडियन एक्सप्रेस और टेनिस इन वंडरलैंड!

'ली-हेश' ने एक साथ तीन ग्रैंड स्लैम खिताब जीते, और विश्व नंबर 1 पर पहुंच गए और लगातार सबसे अधिक बार डेविस कप जीत रिकॉर्ड अपने नाम किया।

लेखक प्रभात दुबे
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1996 में, लिएंडर पेस (Leander Paes) ने अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक के साथ 1952 के बाद व्यक्तिगत ओलंपिक पदक जीतकर पहला भारतीय बनकर इतिहास रच दिया था।

खास बात ये रही कि यह भारतीय टेनिस का पहला ओलंपिक पदक था और पिछले तीन ओलंपिक खेलों में भारत के पदक के सूखे को समाप्त किया।

1997 में, महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) ने इतिहास रच दिया जब वह जापान के रिका हिराकी के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स्ड युगल जीतकर ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने।

उसी साल, लिएंडर पेस और महेश भूपति दुनिया भर में पुरुष युगल प्रतियोगिताओं में नियमित रूप से टीम बनाकर खेलने लगे।

लिएंडर पेस नेट में माहिर थे जबकि महेश भूपति एक मजबूत बेसलाइन खिलाड़ी थे - जिसका मतलब था कि वे एक-दूसरे के पूरक होंगे। इन दोनों का प्रसिद्ध चेस्ट-बम्प सेलिब्रेशन दुनियाभर में काफी फेमस था। 

यह जोड़ी, जिसे जल्द ही इंडियन एक्सप्रेस का नाम दिया गया, आने वाले वर्षों में सर्वश्रेष्ठ युगल जोड़ियों में से एक साबित हुई - तीन ग्रैंड स्लैम खिताब, 25 एटीपी टूर खिताब जीतकर, दुनिया में नंबर 1 पर पहुंचना और अभी भी डेविस कप रिकॉर्ड कायम रखना, साथ ही युगल जीत का सबसे लंबा रिकार्ड भी।

लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने पहली बार 1994 में टीम बनाई, 1995 और 1996 में कुछ एटीपी चैलेंजर स्तर के खिताब जीते और एक जोड़ी के रूप में डेविस कप में भी खेले।

हालाँकि, 1997 में यह पहली बार था जब दोनों नियमित रूप से एक साथ खेले और यह एक शानदार हिट साबित हुआ।

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने अप्रैल 1997 में चेन्नई ओपन में एक साथ अपना पहला एटीपी टूर खिताब जीता, इसमें सबसे खास बात ये रही कि यह मैच घरेलू कोर्ट पर खेला गया था।

इस जोड़ी ने उस साल क्ले और हार्ड कोर्ट में पांच और एटीपी टूर खिताब जोड़े, जिससे उनकी साझेदारी को एक ठोस शुरुआत मिली।

1998 में, दोनों ने एक साथ छह और एटीपी टूर खिताब जीते और ऑस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंचे।

भारतीय टेनिस को इस उभरती हुई साझेदारी के साथ जीवन का एक नायाब करिश्मा मिलता दिख रहा था और शायद जल्द ही इन्हें अपनी क्षमता का एहसास भी हुआ।

द इंडियन एक्सप्रेस का गोल्डन ईयर: 1999

सहस्राब्दी के अंत से पहले का वर्ष इस जोड़ी के लिए एक युग बनाने वाला साबित होगा, जिसे प्यार से ली-हेश (Lee-Hesh) के नाम से जाना जाता है।लिएंडर पेस और महेश भूपति सभी चार ग्रैंड स्लैम के पुरुष युगल फाइनल में पहुंचे। जिसमें फ्रेंच ओपन और विंबलडन शामिल है, साथ ही चेन्नई में एटीपी टूर खिताब के अलावा, पुरुष युगल

टेनिस रैंकिंग में विश्व नंबर 1 पर यह जोड़ी पहुंच गई। 1999 ऑस्ट्रेलियन ओपन, लिएंडर पेस के लिए पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल था और महेश भूपति के लिए तीसरा। यह दोनों खिलाड़ियों का पहला पुरुष युगल ग्रैंड स्लैम फाइनल था।

इस दौरान इंडियन एक्सप्रेस ने पहली वरीयता प्राप्त करते हुए ज्यादा कड़ी मेहनत की, लेकिन आखिर में स्वीडन के जोनास ब्योर्कमैन (Jonas Bjorkman) और ऑस्ट्रेलियाई पैट्रिक राफ्टर (Patrick Rafter) से 3-6, 6-4, 4-6, 7-6, 4-6 से हार गए।

लेकिन खास ये रहा कि ली-हेश को उस पहले ग्रैंड स्लैम खिताब के लिए एक साथ लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।

Leander Paes and Mahesh Bhupathi won the Wimbledon men's doubles title in 1999.
फोटो क्रेडिट Getty Images

1999 के फ्रेंच ओपन में, लिएंडर पेस और महेश भूपति ने फाइनल में क्रोएशियाई-अमेरिकी जोड़ी गोरान इवानसेविक (Goran Ivanisevic) और जेफ टारंगो (Jeff Tarango) को 6-2, 7-5 से हराकर ग्रैंड स्लैम चैंपियनशिप जीती और पहली अखिल भारतीय जोड़ी बन गई।

इस जीत ने ली-हेश को पुरुष युगल में विश्व नंबर 1 पर पहुंचा दिया, एक रैंकिंग जो उन्हें पूरे साल बरकरार रखनी थी।

इतना ही नहीं 1999 का विंबलडन और अधिक खुशी लेकर आया, क्योंकि लिएंडर और महेश ने नीदरलैंड के पॉल हारुइस (Paul Haarhuis) और यूएसए के जेरेड पामर (Jared Palmer) को 6-7, 6-3, 6-4, 7-6 से हराकर दूसरा ग्रैंड स्लैम अपने नाम नाम कर लिया।

यह एक और प्यारी जीत थी, क्योंकि उस समय ग्रास कोर्ट पर इस जोड़ी का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं था।

किसी को भरोसा नहीं था कि यह भारतीय जोड़ी यूएस ओपन के फाइनल में भी पहुंच जाएगी, लेकिन आगे जाकर भारतीय जोड़ी ने कनाडा-अमेरिकी जोड़ी

सेबस्टियन लारेउ (Sebastien Lareau) और एलेक्स ओ ब्रायन (Alex O’Brien) से 7-6, 6-4 से हार गई।

भारतीय टेनिस - जिसने बिना अधिक सफलता के वर्षों तक बहुत कुछ देने का वादा किया था। जिसने आखिरकार ऐसे खिलाड़ी दिए जिन्हें निश्चित रूप से दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक कहा जा सकता था।

अधिक सफलता और लिएंडर-महेश का बंटवारा

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने अगले कुछ वर्षों तक अपनी शानदार साझेदारी जारी रखी, सात एटीपी टूर खिताब जीते, 2001 फ्रेंच ओपन में एक जोड़ी के रूप में उनका तीसरा और अंतिम ग्रैंड स्लैम खिताब था। और 2002 में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक हासिल किया।

लेकिन उनके रिश्ते में कुछ दरारें आ गई थीं और उन्होंने 2002 में अलग होने का फैसला किया।

आने वाले सालों में, महेश भूपति 2002 यूएस ओपन में बेलारूस के मैक्स मिर्नी (Max Mirnyi) के साथ पुरुष युगल खिताब खेलने उतरे थे, जबकि लिएंडर पेस चेक गणराज्य के मार्टिन डैम (Martin Damm) के साथ 2006 यूएस ओपन तक एक और पुरुष युगल ग्रैंड स्लैम नहीं जीत पाएं।

दोनों ने मिक्स्ड डबल्स में ग्रैंड स्लैम की सफलता का स्वाद चखा।

The 2001 French Open was Lee-Hesh's third and final Grand Slam title as a pair.
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2004 एथेंस ओलंपिक से पहले, ली-हेश ने एक बार फिर से टीम बनाने का फैसला किया और तुरंत बाद ही 2004 के कनाडाई मास्टर्स खिताब जीता। उनकी साझेदारी ने 2004 के ओलंपिक में एक साथ एक और जादुई क्षण बनाया।

ली-हेश ने पुरुष युगल के पहले दौर में अमेरिकी जोड़ी मार्डी फिश-एंडी रोडिक (Mardy Fish-Andy Roddick) को और दूसरे दौर में स्विस जोड़ी यवेस एलेग्रो-रोजर फेडरर (Yves Allegro-Roger Federer) को हराया।

जिम्बाब्वे के वेन ब्लैक-केविन उल्लियट (Wayne Black-Kevin Ullyet) के खिलाफ तीसरे दौर की जीत के बाद भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में जर्मनी के निकोलस कीफर-रेनर शुटलर (Nicolas Kiefer-Rainer Schuttler) से हार गई।

लाइन पर कांस्य पदक के साथ, लिएंडर और महेश ने मैच को लंबा खींच लिया, लेकिन अंत में क्रोएशिया के मारियो एंसिक (Mario Ancic) और इवान ल्यूबिसिक (Ivan Ljubicic) के खिलाफ  6-7, 6-4, 14-16 से हार गए। और उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया।

इस जोड़ी ने 2006 के एशियाई खेलों में लगातार दूसरी बार पुरुष युगल का स्वर्ण पदक जीता।

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने भी 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिए टीम बनाने का फैसला किया और क्वार्टर फाइनल में पहुंचे, जहां वे स्विट्जरलैंड के

रोजर फेडरर (Roger Fedrer) और स्टैनिस्लास वावरिंका (Stanislas Wawrinka) से हार गए। नियमित साझेदार के रूप में विभाजित होने के लगभग एक दशक बाद, ली-हेश ने 2011 में एटीपी टूर पर फिर से जोड़ी बनाई।

दोनों ने उस वर्ष चेन्नई ओपन जीता और 2011 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में पहुंचने पर अपनी अविश्वसनीय साझेदारी को फिर से जगाया।हालांकि, उन्हें चौथा ग्रैंड स्लैम हासिल नहीं हो पाया। क्योंकि इंडियन एक्सप्रेस अमेरिकी जुड़वां

बॉब ब्रायन (Bob Bryan) और माइक ब्रायन (Mike Bryan) से 6-3, 6-4 से हार गए थे। फिर भी, लिएंडर पेस और महेश भूपति ने अंतिम बार अलग होने से पहले 2011 में मियामी और सिनसिनाटी में एटीपी टूर खिताब जीते।

ली-हेश का डेविस कप रिकॉर्ड

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने लगातार 24 जीत के साथ डेविस कप रिकॉर्ड बनाया, एक सफर जो 1997 में शुरू हुआ और 2010 तक चला।

ली-हेश ने पहली बार 1995 में एक जोड़ी के रूप में एक साथ डेविस कप खेला, और उस वक्त जब उन्होंने क्रोएशिया के सासा हिर्सज़ोन (Sasa Hirszon) और गोरान इवानसेविक (Goran Ivancevic) को हराया।

इसके बाद वो 1996 में डच जोड़ी जैको एल्टिंग/पॉल हारुइस (Jacco Eltingh/Paul Haarhuis)और जोनास ब्योर्कमैन/निकलास कुल्टी (Jonas Bjorkman/Nicklas Kulti)  की स्वीडिश टीम के खिलाफ दो टाई हार गए। दूसरा डेविस कप में एक जोड़ी के रूप में ली-हेश की आखिरी हार साबित हुई।

लिएंडर पेस और महेश भूपति ने 1997 के डेविस कप में चेक गणराज्य के मार्टिन डैम (Martin Damm) और पेट्र कोर्डा (Petr Korda) के खिलाफ 24 मैचों में जीत हासिल की।

आने वाले वर्षों में उनके बीच के मुद्दों के बावजूद, ली-हेश अनिवार्य रूप से डेविस कप में एक साथ आएं, और 1997 से 2010 तक हर साल मैच जीता। 2007 को छोड़कर उन्होंने कुल 24 बार जीत हासिल की।

लिएंडर और महेश की जोड़ी के रूप में अंतिम डेविस कप जीत 2010 में ब्राजील के मार्सेलो मेलो (Marcelo Melo) और ब्रूनो सोरेस (Bruno Soares) के खिलाफ हुई थी, जिसके बाद से उन्होंने पुरुष टीम टूर्नामेंट में एक साथ हिस्सा नहीं लिया।

महेश भूपति ने आखिरकार 2013 में 12 ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने के बाद अपनी रिटायरमेंट की घोषणा कर दी, जिसमें चार पुरुष युगल और आठ मिश्रित युगल जीत शामिल है।

लिएंडर पेस - जिन्होंने 18 ग्रैंड स्लैम (आठ पुरुष युगल और 10 मिश्रित युगल) जीते हैं, उन्होंने टोक्यो में अपना आठवां और अंतिम ओलंपिक खेलने का विचार बनाया था, लेकिन उन्होंने संन्यास लेने का मन बना लिया।

हालांकि, COVID-19 महामारी के कारण एक साल की देरी की वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि लिएंडर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना जारी रखेंगे या नहीं।

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