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2024 पेरिस ओलंपिक में इन एथलीट्स से होगी शानदार प्रदर्शन की उम्मीद

सौरभ चौधरी, जेरेमी लालरिनुंगा और निकहत ज़रीन जैसे एथलीट्स से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर पेरिस ओंलपिक खेलों में भारत अपने पदकों की संख्या को और बढ़ा सकता है।
लेखक विवेक कुमार सिंह

रविवार, 8 अगस्त को खत्म हुए टोक्यो ओलंपिक (चार साल में एक बार होने वाला खेल आयोजन) में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखने को मिला। जहां एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक के साथ भारतीय टीम पदक तालिका में 48वें स्थान पर रही।

ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का समापन रविवार को ओलंपिक स्टेडियम में एक शानदार समारोह के साथ हुआ। जहां ये कई लोगों के लिए सालों की कड़ी मेहनत के परिणाम का गवाह बना, तो दूसरी ओर कई एथलीटों को पेरिस 2024 (Peris 2024) खेलों में अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए फिर से तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।

जहां एक ओर टोक्यो 2020 के अधिकांश भारतीय पदक विजेता फ्रांस की राजधानी में अपने प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर करने की कोशिश करेंगे, तो दूसरी ओर अन्य एथलीट ओलंपिक खेलों में देश की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहेंगे।

यहां उन एथलीट्स पर एक नज़र डालिए।

सौरभ चौधरी 

भारतीय निशानेबाजी दल भले ही टोक्यो ओलंपिक में प्रभावशाली प्रदर्शन करने में विफल रही हो, लेकिन जिस तरह से सौरभ चौधरी (Saurabh Chaudhary) ने टोक्यो 2020 में दो पिस्टल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया वो काबिल-ए-तारीफ है।

Saurabh Chaudhary topped the 10m air pistol qualification at Tokyo 2020.
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पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल क्वालीफिकेशन में 19 साल के सौरभ ने 600 में से 586 के कुल स्कोर के साथ क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड स्पर्धा में उन्होंने भारत को पदक की दौड़ में शामिल कराया।

हालांकि दोनों ही मौकों पर ये युवा निशानेबाज़ पदक जीतने में असफल रहे, लेकिन सौरभ चौधरी से तीन साल बाद शानदार वापसी की उम्मीद की जा सकती है।

मनु भाकर

महिलाओं की पिस्टल स्पर्धा में भारत की सबसे बड़ी उम्मीदों में से एक मनु भाकर (Manu Bhakar) का प्रदर्शन यादगार नहीं रहा। ऐसे में वो जल्द ही टोक्यो ओलंपिक में अपने इस प्रदर्शन को भूलना चाहेंगी।

जहां एक उपकरण की खराबी ने उन्हें महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल से बाहर होने पर मजबूर कर दिया, तो वहीं भारतीय निशानेबाज़ 25 मीटर पिस्टल और 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड स्पर्धाओं में अपना प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहीं और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।

हालांकि, उम्र और बढ़ते अनुभव के साथ मनु भाकर से उम्मीद की जा रही है कि वो वापसी करेंगी और पेरिस 2024 में पदक के लिए पूरी ताकत लगा देंगी।

एलावेनिल वलारिवन

22 साल की एलावेनिल वलारिवन (Elavenil Valarivan) ने टोक्यो ओलंपिक शूटिंग प्रतियोगिता में ढेर सारी उम्मीदों के साथ पहुंची।

वो ISSF विश्व कप फाइनल में 10 मीटर एयर राइफल की स्वर्ण पदक विजेता थीं, ये वो प्रतियोगिता होती है, जहां अलग-अलग विश्व कप के विजेता सीजन के अंत में आखिरी खिताब के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। एलावेलिन मिक्स्ड 10 मीटर एयर राइफल इवेंट में एशियन चैंपियन भी हैं।

लेकिन ग्रीष्मकालीन खेलों में युवा भारतीय निशानेबाज़ पर ओलंपिक जैसे बड़े इवेंट का दबाव दिखा और वो क्वालीफिकेशन राउंड से बाहर हो गईं

अब उनके पास तैयारी के लिए तीन साल और हैं और गगन नारंग (Gagan Narang) जैसे ओलंपिक पदक विजेता उनको ट्रेनिंग देने और सलाहकार बनकर साथ देंगे, ऐसे में एलावेनिल से पेरिस खेलों के नजदीक आने तक शानदार वापसी की उम्मीद की जा सकती है।

कमलप्रीत कौर

अपने डेब्यू ओलंपिक में प्रभावशाली प्रदर्शन से सबका ध्यान आकर्षित करने वाली कमलप्रीत कौर (Kamalpreet Kaur) पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब जिले के कबरवाला गांव में पली-बढ़ी हैं।

हालांकि इससे पहले कमलप्रीत ने आयु-वर्ग स्टेज में भी अपनी प्रतिभा की कुछ झलकियां दिखाई थीं और फिर 2019 फेडरेशन कप में स्वर्ण पदक जीता, लेकिन ओलंपिक से पहले वो सुर्खियों में नहीं थीं।

25 साल की डिस्कस थ्रोअर टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई करने के लिए 65 मीटर के मार्क को पार करने वाली देश की पहली खिलाड़ी बन गईं। ग्रीष्मकालीन खेलों में कमलप्रीत ने शानदार प्रदर्शन किया और वो छठे स्थान पर रहीं

जिस तरह से कमलप्रीत कौर ने अपने करियर की शुरुआत की है, उससे आने वाले समय में भारतीय एथलेटिक्स में उनसे बेहतर की उम्मीद की जा सकती है।

लक्ष्य सेन 

पिछले लगातार तीन ओलंपिक में पदक दिलाने वाला खेल, बैडमिंटन ग्रीष्मकालीन खेलों में भारतीय फैंस के लिए मुख्य स्पर्धाओं में से एक रहा है। ऐसे में होनहार लक्ष्य सेन (Lakshya Sen) पेरिस में होने वाले 2024 ओलंपिक खेलों में भारतीय शटलर्स की टीम में शामिल होने की उम्मीद करेंगे।

जूनियर्स में पूर्व विश्व नंबर 1 रहे इस युवा खिलाड़ी ने 2020 में शानदार प्रदर्शन किया था, जहां लक्ष्य ने 2019 में चार BWF इंटरनेशनल सीरीज़ खिताब जीते।

लक्ष्य ने बैडमिंटन एशिया टीम चैंपियनशिप में इंडोनेशियाई स्टार जोनाथन क्रिस्टी के खिलाफ शानदार जीत के साथ अच्छी शुरुआत की और फिर ऑल इंग्लैंड ओपन में डेनिश स्टार और उसके बाद ओलंपिक चैंपियन विक्टर एक्सेलसन को कड़ी चुनौती दी। लेकिन COVID-19 महामारी ने उनके लय को तोड़ दिया।

टोक्यो खेलों के बाद लय में वापसी की उम्मीद करते हुए 19 साल के लक्ष्य सेन पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के लिए उत्सुक होंगे।

जेरेमी लालरिननुंगा

इस युवा भारतीय वेटलिफ्टर को भी टोक्यो की उड़ान भरने की उम्मीद थी। लेकिन COVID-19 महामारी के कारण सही ट्रेनिंग और प्रतिस्पर्धा की कमी की वजह से भारत का ये होनहार भारोत्तोलक जेरेमी लालरिननुंगा (Jeremy Lalrinnunga) टोक्यो 2020 के लिए क्वालीफाई करने से चूक गए

18 साल के जेरेमी को आने वाले समय का भविष्य माना जा रहा है। टोक्यो ओलंपिक में मीराबाई चानू के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत में वेटलिफ्टिंग की ओर युवाओं की दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है।

जेरेमी लालरिनुंगा एक पूर्व यूथ ओलंपिक खेलों के चैंपियन हैं और घरेलू सर्किट में 67 किग्रा भार वर्ग में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

निकहत ज़रीन

दिग्गज मुक्केबाज़ एमसी मैरी कॉम की देख-रेख में लंबे समय तक सीखने के बाद निकहत ज़रीन (Nikhat Zareen) आने वाले ओलंपिक साइकल में बड़ी भूमिका निभाएंगी

Nikhat Zareen competes in the women’s flyweight division.
फोटो क्रेडिट Boxing Federation of India

25 साल की निकहत एक पूर्व यूथ विश्व चैंपियन हैं और उन्होंने अपनी श्रेणी में कई शानदार प्रदर्शन किए हैं, जिसमें रूस की विश्व चैंपियन पाल्टसेवा एकातेरिना और दो बार की विश्व चैंपियनशिप की स्वर्ण पदक विजेता कजाकिस्तान की नाज़िम काज़ैबे के खिलाफ उनकी जीत शामिल है।

कोमलिका बारी

भारत की तीरंदाजी टीम टोक्यो ओलंपिक में अपना अच्छा प्रदर्शन नहीं दिखा पाई। हालांकि दीपिका कुमारी, अतानु दास और प्रवीण जाधव ने अपने व्यक्तिगत स्पर्धाओं में प्रभावशाली प्रदर्शन जरूर किया, लेकिन मेडल तक पहुंचने में असफल रहे। ऐसे में पेरिस ओलंपिक खेलों में उनसे और भी बेहतर की उम्मीद की जाएगी।

इस बार तीरंदाजी टीम को मजबूत करने की उम्मीद जमशेदपुर की 19 साल की तीरंदाज कोमलिका बारी (Komalika Bari) से होगी।

कोमलिका यूथ विश्व चैंपियन हैं और पेरिस में हुए 2021 विश्व तीरंदाजी विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला टीम का हिस्सा भी रही थीं।

कोमलिका बारी इस ओलंपिक साइकिल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने के लिए उत्सुक होंगी, जहां वो 2024 में होने वाले पेरिस खेलों में अपनी जगह बनाने में ध्यान केंद्रित करेंगी।

अर्चना कामथ

अर्चना कामथ (Archana Kamath) 2014 से भारतीय घरेलू सर्किट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती आई हैं। ऐसे में आने वाले ओलंपिक साइकिल में भारत की इस टेबल टेनिस खिलाड़ी के प्रदर्शन पर सबकी नज़रें रहेंगी।

 21 साल की बैंगलोर की महिला सिंगल्स खिलाड़ी रैंकिंग में 150 खिलाड़ियों के अंदर हैं और वो पूर्व कैडेट और सीनियर नेशनल चैंपियन हैं। 

2018 यूथ ओलंपिक की सेमीफाइनलिस्ट अर्चना कामथ ने 2018 में शानदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद उन्हें पुर्तगाल में ITTF वर्ल्ड टीम क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट के लिए नेशनल टीम में शामिल किया गया।

Archana Kamath is a former cadet and senior national champion. 
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हालांकि भारतीय महिला टेबल टेनिस टीम टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन युवा अर्चना कामथ का शानदार लय दर्शाता है कि वो पेरिस 2024 में जगह बना सकती हैं और अच्छा कर सकती हैं। 

भारतीय महिला हॉकी टीम 

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के प्रदर्शन ने पूरे देश के साथ दुनियाभर के हॉकी फैंस को हैरान कर दिया। 

नवंबर 2019 के बाद से किसी भी प्रतिस्पर्धी मुक़ाबले से दूर रहने के बावजूद भारतीय महिला हॉकी टीम ने सराहनीय प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में जगह बनाई और इतिहास रचा। 

आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी जीत ने पूरे देश को गौरवान्वित किया, जबकि जर्मनी, नीदरलैंड और ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ उनके प्रदर्शन ने देश और विदेश में चर्चा का विषय बना दिया।

पूरे टोक्यो 2020 में उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन करने क बाद भारतीय महिला हॉकी टीम से ये उम्मीद की जाएगी कि वो आगे भी इस लय को बरकरार रखे और पेरिस 2024 में एक कदम और आगे जाए।