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जानिए कब-कब ओलंपिक में भारतीय एथलीट्स चौथे स्थान पर रहे हैं

कई भारतीय एथलीट्स जो पदक जीतने के काफी करीब पहुंच गए थे, जिनमें मिल्खा सिंह, पीटी उषा और सानिया मिर्जा के नाम शामिल हैं, जिन्होंने ओलंपिक में चौथा स्थान हासिल किया।
लेखक प्रभात दुबे

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करना काफी चुनौतीपूर्ण और ध्यान देने योग्य है, जहां एक मिनट की देरी हो जाने पर इसकी कीमत खिलाड़ी को मेडल गंवाकर चुकानी पड़ती है।

ये दुर्भाग्य ही है जब ऐसे कई मौके आए, जब भारतीय खिलाड़ी पदक के करीब तो पहुंच गए थे, लेकिन उसे हासिल नहीं कर पाए। जिसका सबसे सटीक उदाहरण गोल्फर अदिती अशोक और भारतीय महिला हॉकी टीम का टोक्यो 2020 में प्रदर्शन है।

यहां उन भारतीयों की सूची दी गई है जो ओलंपिक खेलों में चौथे स्थान पर रहे हैं।

रणधीर शिंदे (Randhir Shinde) - 1920 एंटवर्प ओलंपिक, पुरुषों की 54 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती

1920 के एंटवर्प ओलंपिक की बात करें तो उस वक्त पुरुषों के फेदरवेट फ्रीस्टाइल डिवीजन में कांस्य पदक प्लेऑफ मैच में भारतीय पहलवान रणधीर शिदें (Randhir Shinde) को ग्रेट ब्रिटेन के फिलिप बर्नार्ड (Philip Bernard) से हार झेलनी पड़ी थी, जबकि उन्होने क्वार्टर फाइनल में हेनरी इनमैन (Henry Inman) (ग्रेट ब्रिटेन) और सेमीफाइनल में सैम गर्सन (Sam Gerson) (यूएसए) को हराया था।

कुश्ती में दो कांस्य पदक दिए जाने के बाद उन्हें चौथा स्थान हासिल करने पर भी पदक मिल सकता था।

केशव मांगवे (Keshav Mangave) - 1952 हेलसिंकी ओलंपिक, पुरुषों की 62 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती

फ्रीस्टाइल पहलवान केशव मांगवे (Keshav Mangave) को पुरुषों की फ़्रीस्टाइल 62 किग्रा (फेदरवेट) स्पर्धा में पांचवें राउंड खेलने का मौका मिला, लेकिन वहां वो यूएसए के जोशिया हेंसन (Josiah Henson) से हार गए। एक जीत उन्हे टॉप 3 की लिस्ट में डाल सकती थी, जिससे वो भी पदक के लिए प्रतिस्पर्धा कर सकते। लेकिन केशव मांगवे (Josiah Henson) चौथे स्थान पर रहे।

भारतीय फुटबॉल टीम - 1956 मेलबर्न ओलंपिक

मेलबर्न 1956 में कांस्य पदक प्रतियोगिता में भाग लेने तक भारतीय फुटबॉल टीम का ओलंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन रहा। लेकिन इस दौरान भारत को बुल्गेरिया से 3-0 से हार देखनी पड़ी और टीम को चौथा स्थान हासिल हुआ।

मिल्खा सिंह - 1960 रोम ओलंपिक, पुरुषों की 400 मी

महान धावक मिल्खा सिंह (Milkha Singh) रोम ओलंपिक में पुरुषों की 400 मीटर स्प्रिंट में पदक से चूक गए थे। वह फाइनल में चौथे स्थान पर रहे, खास बात ये रही कि कांस्य पदक विजेता की तुलना में वो सिर्फ 0.1 सेकेंड धीमे थे।

प्रेम नाथ (Prem Nath) - 1972 रोम ओलंपिक, पुरुषों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती

फ़्रीस्टाइल पहलवान प्रेम नाथ (Prem Nath) ने सातवें राउंड तक मुकाबला किया और कुल नौ पेनल्टी अंक अर्जित किए, इस दौरान वह पदक से ज्यादा दूर नहीं थे। लेकिन पहले पेनल्टी के नुकसान के मुताबिक स्कोर की गणना की जाती थी, लेकिन प्रीलिमिनरी राउंड के अंत में सबसे कम पेनल्टी हासिल करनेवाले तीन पहलवानों ने पदक हासिल कर लिया।

सुदेश कुमार (Sudesh Kumar) - 1972 रोम ओलंपिक, पुरुषों की 52 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती

प्रेम नाथ की तरह, सुदेश कुमार (Sudesh Kumar) भी काफी मशक्कत के बाद रोम खेलों में पदक के करीब पहुंच गए थे। लेकिन सुदेश सात पेनल्टी पॉइंट के साथ चौथे स्थान पर रहे।

पीटी उषा (PT Usha) - 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक, महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़

1960 में मिल्खा सिंह (Milkha Singh) की नाकामयाबी के बाद, पीटी उषा (PT Usha) भी एथलेटिक्स में पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गई थी। लेकिन पय्योली एक्सप्रेस के नाम से मशहूर उषा एक सेकेंड के सौवें हिस्से की वजह से कांस्य पदक से चूक गई।

राजिंदर सिंह (Rajinder Singh) - 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक, पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल कुश्ती

लॉस एंजेलिस खेलो में पहलवानों के ओलंपिक पदक के करीब पहुंचने का दौर जारी रहा, पेनल्टीमेट राउंड (अंतिम राउंड से पहले का राउंड) से पहले तक राजिंदर सिंह (Rajinder Singh) दूसरे स्थान पर रहे लेकिन फाइनल राउंड में साबन सेजदी (Saban Sejdi) से कांस्य पदक मैच हार गए।

लिएंडर पेस / महेश भूपति (Leander Paes/Mahesh Bhupati) - 2004 एथेंस ओलंपिक, पुरुष युगल टेनिस

लिएंडर पेस (Leander Paes) और महेश भूपति (Mahesh Bhupati) की दिग्गज जोड़ी रोजर फेडरर (Roger Federer) और एंडी रोडिक (Andy Roddick) से पिछड़ने के बाद सेमीफाइनल में भी हार गई। इस मैच में भारतीय जोड़ी को कांस्य पदक मैच में क्रोएशिया के मारियो एंसिक (Mario Ancic) और इवान लुजुबिक (Ivan Ljubicic) से 7(7)-6(5), 4-6, 16-14 से हार का सामना करना पड़ा।

कुंजारानी देवी (Kunjarani Devi) - 2004 एथेंस ओलंपिक, वूमेंस 48 किग्रा वेटलिफ्टिंग

कुंजारानी देवी ने स्नैच में 82.5 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 107.5 किग्रा भार उठाकर कुल 190 किग्रा का वजन उठाया। लेकिन फिर भी मेडल ज़ोन से बाहर हो गई। भारत की इस कांस्य पदक विजेता ने कुल 200 किग्रा भार उठाया था।

जॉयदीप करमाकर (Joydeep Karmakar) - 2012 लंदन ओलंपिक, मेंस 50 मीटर राइफल प्रोन शूटिंग

फाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई करने के बाद सातवें स्थान पर काबिज जॉयदीप करमाकर (Joydeep Karmakar) ने रैंकिंग में आगे बढ़ने के लिए शानदार प्रदर्शन किया। हालांकि उनका अंतिम स्कोर 699.1 रहा, जिसका मतलब था कि वह तीसरे स्थान पर काबिज राजमोंड देबवेक (Rajmond Debevec) से पीछे रहे, जिनका स्कोर 701.0 था।

अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra ) - 2016 रियो ओलंपिक, मेंस 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग

दिग्गज शूटर अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) ने फाइनल के लिए तो क्वालीफाई कर लिया था, लेकिन बीजिंग 2008 के अपने स्वर्ण-विजेता प्रदर्शन को नहीं दोहरा सके। शूटऑफ के बाद राइफल मार्कमेन लीडरबोर्ड पर चौथे स्थान पर रहे, जहां उन्होंने 10 शॉट किए जबकि यूक्रेन के सेरही कुलिश (Serhiy Kulish) ने 10.5 शॉट किए।

सानिया मिर्जा/रोहन बोपन्ना (Sania Mirza/Rohan Bopanna) - 2016 रियो ओलंपिक, मिक्सड डबल्स टेनिस

भारत की चौथी वरीयता प्राप्त जोड़ी सानिया मिर्जा (Sania Mirza) और रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) रियो 2016 में मिक्स्ड डबल्स के सेमीफाइनल में हार गए थे। हालांकि भारत की झोली में कांस्य पदक आ सकता था, लेकिन सानिया-रोहन की जोड़ी राडेक स्टेपानेक (Radek Stepanek) और लूसी हरडेका (Lucie Hradecka ) से 6-1,7-5 से पीछे रह गई।

दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) - रियो 2016 ओलंपिक, महिला वॉल्ट जिमनास्टिक

दीपा करमाकर (Dipa Karmakar) ओलंपिक वॉल्ट इवेंट के फाइनल में जगह बनाने वाली भारत की पहली महिला जिमनास्ट थीं। इस भारतीय जिम्नास्ट ने मुश्किल प्रोडुनोवा वॉल्ट का पड़ाव पार किया, लेकिन 0.150 अंकों से कांस्य पदक से चूक गई।

अदिति अशोक ( Aditi Ashok) - टोक्यो 2020 ओलंपिक, वूमेंस गोल्फ

अपने करियर के दूसरे ओलंपिक में हिस्सा लेनेवाली अदिती अशोक (Aditi Ashok) वूमेंस गोल्फ स्पर्धा के राउंड 1 तक काफी मजबूती से खेल रही थी। उन्होंने लगातार तीन राउंड तक टॉप 3 में अपनी जगह बनाए रखी। लेकिन फाइनल राउंड में चौथे स्थान पर खिसक गई। और काफी कम मार्जिन की वजह से अदिती कांस्य पदक से दूर हो गई।

महिला हॉकी टीम - टोक्यो 2020 ओलंपिक

भारतीय महिला हॉकी टीम का सफर एक कहानी की तरह शुरू हुआ, टीम पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची लेकिन बिना पदक के ही वापस लौट आई। ग्रेट ब्रिटेन ने भारत को 4-3 से हराकर उसके कांस्य पदक की ख्वाहिश को अधूरा कर दिया।