फोटो क्रेडिट © UNHCR/Bela Szandelszky

दीना पौरयूनेस से मिलिए: ताइक्वांडो में कमाल कर रही है ये शरणार्थी

2015 में दीना ईरान से भागकर नीदरलैंड पहुंच गई थी, -46 किग्रा और -49 किग्रा की ये फाइटर रैंकिंग में विश्व नंबर 3 बन गईं और इन्होंने 34 विश्व रैंकिंग पदक जीते हैं।
लेखक विवेक कुमार सिंह

दीना पौरयूनेस (Dina Pouryounes) के ताइक्वांडो रिकॉर्ड पर एक नज़र डालें, तो ये विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि वो छह साल पहले बेघर थीं।

इस ईरानी एथलीट को 2015 में अपने देश से भागने पर मजबूर होना पड़ा, और वो नीदरलैंड में जाकर बस गईं।

ये वो जगह थी, जहां ताइक्वांडो का खेल उनकी जिंदगी के सफर का साथी बन गया। शुरुआत में उन्होंने इस खेल को उस जगह खेलना शुरू किया जहां वो अपने गुस्से को निकाल सकती थीं, हालांकि इससे उन्हें अपने नए देश में समुदाय के साथ अपनी जिंदगी को आगे ले जाने में मदद मिली।

हालांकि जल्दी ही ये भी पता चल गया कि पौरयूनेस इस खेल में माहिर हैं।

Dina Pouryounes Langeroudi used taekwondo to rebuild her mental and physical health, after fleeing Iran in 2015.

सितंबर 2015 में उन्होंने पोलिश ओपन में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता, उस दौरान वो एक रिफ्यूजी सेंटर में रह रही थीं। साल 2016 में उन्हें कई टूर्नामेंट पदक जीते और विश्व और ओलंपिक रैंकिंग में आगे बढ़ीं। 2017 में उन्होंने अपना पहला तुर्की ओपन जीता, जो दुनिया का सबसे कठिन रैंकिंग टूर्नामेंटों में से एक है। लेकिन ये तो उनके करियर की सिर्फ शुरुआत थी।

वर्ल्ड ताइक्वांडो ने 2017 के अंत में पौरयूनेस का समर्थन करना शुरू किया और वो विश्व ताइक्वांडो चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने वाली पहली शरणार्थी एथलीट बन गईं। अपनी उच्च रैंकिंग के कारण, वो ग्रांड प्रिक्स सीरीज में भी भाग लेने में सक्षम थीं जहां प्रत्येक ओलंपिक श्रेणी के सिर्फ शीर्ष 32 फाइटर्स को आमंत्रित किया जाता है।

2018 में उनका फॉर्म शानदार था। कज़ान में यूरोपीयन सीनियर चैंपियनशिप (European Senior Championships) में प्रतिष्ठित डच ओपन खिताब और सिल्वर पदक जीतने से पहले उन्होंने तुर्की ओपन के खिताब को डिफेंड किया।

इन प्रयासों ने उन्हें वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने में मदद की, और उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति शरणार्थी एथलीट छात्रवृत्ति से पुरस्कृत किया गया। इसने पौरयूनेस को अतिरिक्त धन और प्रशिक्षण सहायता के साथ-साथ टोक्यो 2020 ओलंपिक में ओलंपिक शरणार्थी टीम का प्रतिनिधित्व करने का एक संभावित अवसर प्रदान किया।

इन उपलब्धियों से प्रेरित होकर, ईरानी मूल की ताइक्वांडो खिलाड़ी ने 2019 में एक और डच ओपन जीता, और 2020 में विश्व रैंकिंग टूर्नामेंट में तीन रजत पदक जीते।

आज तक, उन्होंने 34 विश्व रैंकिंग पदक हासिल किए हैं और अप्रैल 2020 में 49 किग्रा में वो विश्व नंबर 3 रैंक वाली एथलीट बन गईं।

हालांकि पौरयूनेस की ताइक्वांडो में पकड़ निस्संदेह प्रभावशाली है, इस खेल ने उनके जीवन को भी संवारने में मदद की है और एक आइडल बना दिया है।

दुनिया भर में लाखों विस्थापित लोगों में से किसी एक की तरह, परिवार और दोस्तों को छोड़ने के लिए मजबूर होना एक दर्दनाक अनुभव होता है।

हालांकि नीदरलैंड के द हेग में ताइक्वांडो समुदाय का हिस्सा बनने के बाद वो फिर से खुश थीं और उनका मानना ​​है कि व्यायाम उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

वैश्विक महामारी के कारण खेलों में खलल पड़ने के बावजूद, पौरयूनेस ने दिखाया कि उनके फॉर्म पर कोई असर नहीं पड़ा है, और मार्च 2021 में उन्होंने रामस सोफिया ओपन में शानदार प्रदर्शन किया था।

प्रतियोगिता के फाइनल में -49 किग्रा कैटगरी में उन्होंने 9-7 से जीत हासिल की थी।

जीत के बाद उन्होंने कहा था कि, "मैं प्रतियोगिता से पहले अपने फॉर्म के बारे में चिंतित थी," "लेकिन मेरे लिए सब कुछ ठीक गया और जो मैंने कठिन ट्रेनिंग की थी उसका फल मिल गया। मैं भविष्य की प्रतियोगिताओं को जीतने के लिए कड़ी मेहनत करती रहूंगी।”