14 जून 1996 को तेलंगाना के निज़ामाबाद में जन्मी निकहत जरीन एक साधारण परिवार से निकलकर आगे बढ़ीं और भारतीय मुक्केबाजी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।
तीन बहनों के साथ एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ीं निकहत जरीन को उनके पिता मोहम्मद जमील अहमद ने खेलों से रूबरू कराया था। शुरुआत में रेसिंग के बाद, निकहत के\ करियर में एक नया मोड़ आया। उन्होंने एक स्थानीय स्टेडियम में बॉक्सिंग में लड़कियों के शामिल नहीं होने पर सवाला उठाया और इस धारणा को बदलने के लिए चुनौती दी कि मुक्केबाजी सिर्फ लड़कों का खेल नहीं है।
जल्द ही निकहत ने रेसिंग के ट्रैक से बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा। उन्होंने शुरुआत में अपने पिता के साथ ट्रेनिंग ली। पुरुषों वाले स्थानीय जिम में, वह अपने कौशल को निखारने के लिए लड़कों के साथ प्रतिस्पर्धा करती थीं। इसके बाद वह विशाखापट्टनम में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) में शामिल हो गईं, जहां उन्होंने द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता आईवी राव के मार्गदर्शन में अपनी ट्रेनिंग को जारी रखा।
2009 में, निकहत की प्रतिभा तब सामने आई जब उन्होंने सब-जूनियर नेशनल खिताब जीता और बाद में 2011 में जूनियर और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके तीन साल बाद, वह यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में एक और रजत पदक जीतने में सफल रहीं।
हालांकि, निकहत जरीन का सीनियर सर्किट का सफर चुनौतियों से भरा हुआ था। फ्लाईवेट (51 किग्रा) वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए निकहत को दिग्गज मैरी कॉम और पिंकी रानी जैसी दिग्गज खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। उनके पसंदीदा भार वर्ग में कड़ी प्रतिस्पर्धा की वजह से उन्हें 54 किग्रा में जाने की सलाह दी गई। निकहत लगातार निडर होकर संघर्ष करती रहीं।
निकहत का पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय पदक सर्बिया में 2014 नेशंस कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में आया, जहां उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। अगले साल वह पहली बार नेशनल चैंपियन बनीं।
2017 में कंधे की हड्डी खिसकने के बाद निकहत ने 2018 में विजयी वापसी करते हुए बेलग्रेड इंटरनेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। अगले वर्ष, निकहत तब सुर्खियों में आईं, जब उन्होंने मैरी कॉम को बिना किसी ट्रायल के टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए एशियाई क्वालीफायर में भेजने के बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के फैसले को चुनौती दी।
ट्रायल फाइट के लिए निकहत की अपील को आखिरकार स्वीकार कर लिया गया लेकिन वह यह मुकाबला हार गईं। निकहत टोक्यो 2020 में जगह नहीं बना सकीं, लेकिन उन्होंने बाद के वर्षों में कई सफलताएं हासिल करते हुए अपनी योग्यता साबित की।
निकहत जरीन का सबसे बड़ा पल इस्तांबुल में 2022 महिला मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप में आया। वह अपने विरोधी मुक्केबाजों पर हावी रहीं और थाईलैंड की जुटमास जितपोंग के खिलाफ जीत के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। इस जीत से वह मैरी कॉम, लैशराम सरिता देवी, जेनी आरएल और लेखा केसी के बाद विश्व चैंपियन बनने वाली पांचवीं भारतीय मुक्केबाज बन गईं।
2023 में, निकहत ने नई दिल्ली में अपने विश्व चैंपियनशिप के ताज का सफलतापूर्वक बचाव किया, जिससे फ्लाईवेट डिवीजन में मुक्केबाज के रूप में उनकी स्थिति मजबूत हो गई। इस जीत के साथ, वह मैरी कॉम के बाद विश्व चैंपियनशिप में कई बार स्वर्ण जीतने वाली एकमात्र अन्य भारतीय बन गईं।
निकहत जरीन ने बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेल 2022 में अपने कॉमनवेल्थ गेम्स डेब्यू में भी स्वर्ण पदक जीता।
अपना प्रभावशाली प्रदर्शन जारी रखते हुए, निकहत जरीन ने हांगझोऊ में एशियन गेम्स 2023 में कांस्य पदक हासिल किया। उनके प्रदर्शन ने न सिर्फ उन्हें पोडियम स्थान दिलाया बल्कि भारत को पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए कोटा भी दिलाया।
मैरी कॉम का करियर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि निकहत जरीन ने पहले ही खुद को भारतीय मुक्केबाजी की अगली ध्वजवाहक बनने के काबिल साबित कर दिया है।