इसका पूरा श्रेय रीयूनियनिस जोहान डेफे के पिता को जाता है, जिसकी बदौलत हो आज सर्फिंग कर रही हैं। उनका जन्म 1993 में हुआ था।
लहरों के साथ तालमेल बैठाने वाले उनके पिता चाहते थे कि उनकी बेटी उनके नक्शेकदम पर चलकर समुद्री खेल में अपना करियर बनाए। उन्होंने शुरू में ज्यादा रूचि नहीं दिखाई, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी के आठ साल तक के होने का धैर्य के साथ प्रतीक्षा किया और जब उन्होंने फिर से अपनी किस्मत आजमाई तो वो इस खेल से जुड़ गईं।
जब डेफे ने 10 साल की उम्र से प्रतिस्पर्धा करना शुरू किया, तब युवा सर्फर के लिए चीजें तेजी से बदलीं। रीयूनियन द्वीप पर प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन के बाद डेफाय फ्रांस वापस चली गईं, ताकि वहां पता लगाया जा सके कि अन्य प्रतिद्वंद्वी क्या-क्या करते हैं। 14 साल की उम्र तक वो बाकी से बेहतर हो गईं और उन्हें फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के लिए चुना गया। एक साल बाद, उन्होंने अपना पहला जूनियर यूरोपीय चैंपियन खिताब जीता (उस समय खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की सर्फर थीं) और अपनी पहली विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया।
वर्ल्ड सर्फ लीग (World Surf League) चैंपियनशिप टूर (Championship Tour) में डेफे का सफर संघर्षों से भरा रहा। उस समय ये सर्फर क्वालीफाइंग सीरीज़ के माध्यम से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही थीं, उनके प्रायोजकों ने उन्हें छोड़ दिया, जिससे उन्हें सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि उन्हें सर्फिंग जारी रखनी चाहिए या नहीं। अपने माता-पिता और साथी फ्रांसीसी सर्फर जेरेमी फ्लोर्स के समर्थन के बाद डेफाय ने आखिरकार 2014 में एलीट लीग में जगह बनाई।
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