साइखोम मीराबाई चानू

भारत IND

वेटलिफ्टिंग

  • मेडल्स
    1 S
  • भाग लेना
    2
  • पहला प्रतिभागी
    रियो 2016
  • जन्म का साल
    1994
ओलंपिक रिजल्ट

बायोग्राफी

साइखोम मीराबाई चानू

ओलंपिक रजत पदक विजेता, विश्व चैंपियन और दो बार के राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू भारत की बेहतरीन वेटलिफ्टर में से एक होने का दावा आसानी से कर सकती हैं।

कर्णम मल्लेश्वरी के बाद टोक्यो 2020 में मीराबाई का रजत पदक भारतीय वेटलिफ्टर द्वारा जीता गया दूसरा ओलंपिक पदक था। वह पीवी सिंधु के बाद ओलंपिक रजत पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला भी बनीं।

उन्होंने अपने पहले ओलंपिक के रियो 2016 में अपने प्रदर्शन से प्रतिद्वंदियों के छक्के छुड़ा दिए थे। जहां उन्होंने 12 साल के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ने के बाद प्रवेश किया था, लेकिन वह अपने किसी भी क्लीन-एंड-जर्क लिफ्ट को पूरा करने में असमर्थ रही थीं।

इस असफलता ने मीराबाई चानू को निराशा कर दिया और यहां तक कि उन्होंने जल्द ही रिटायर होने के बारे में भी सोचा। लेकिन टोक्यो ओलंपिक में चानू ने दृढ़ संकल्प और कई बलिदानों के बाद रजत पदक जीता, जो उनकी अथक मेहनत का सबूत था।

बचपन में जलाने वाली लकड़ी का गट्ठर उठाने से लेकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुंचने का वेटलिफ्टर साईखोम मीराबाई चानू का सफर बेहद शानदार रहा है। यह उनके संघर्ष और लगन की दास्तां बयां करता है।

इम्फाल के एक गांव नोंगपोक काकचिंग में एक सामान्य परिवार में जन्मी छह भाई-बहनों में सबसे छोटी चानू को अपनी लिफ्टिंग की ताकत का पहली बार अंदाज़ा 12 साल की उम्र में हुआ। एक बार उनसे चार साल बड़ा भाई जलाने वाली लकड़ी का गट्ठर उठाने की कोशिश कर रहा था, जो कि भारी होने की वजह से उनसे नहीं उठा। तब उन्होंने कोशिश की और इसे आसानी से उठा लिया। इसी के बाद उन्हें अपनी शक्ति का अंदाज़ा हुआ।

हमेशा से खेलों में दिलचस्पी रखने वाली मीराबाई चानू वेटलिफ्टिंग को चुनने से पहले करियर की शुरुआत में इंफाल के एक स्थानीय स्पोर्ट्स हॉल में तीरंदाज़ी करना सीखना चाहती थीं।

अपने खेल की सही पहचान के बाद मीराबाई चानू ने भारत की महिला भारोत्तोलक कुंजारानी देवी से प्रेरणा लेकर उनके पथ पर चलने की ठान ली।

स्कॉटलैंड में हुए 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीतकर मिराबाई चानू ने 20 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

इसके बाद, यूएसए के अनाहेम में 2017 विश्व भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने दो दशकों बाद गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया और वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं। सिडनी 2000 की कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी की खिताबी जीत के बाद 1994 और 1995 के बाद 48 किग्रा वर्ग में उनका यह पहला प्रयास था।

इसके बाद उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल पर कब्ज़ा किया। साथ ही इस इवेंट में उन्होंने ‘स्नैच’, क्लीन एंड जर्क’ के अलावा ‘टोटल’ में भी रिकॉर्ड दर्ज किया। लेकिन पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट ने उनके इस शानदार सीज़न पर विराम लगा दिया।

इसकी वजह से चानू 2018 के एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में नहीं शामिल हो पाईं। और फिर चोट से उबरने में उन्हें करीब एक साल लग गया।

इसके बाद 2019 में चानू थाईलैंड में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने के लिए वापसी की, जहां वह चौथे स्थान पर रहीं। लेकिन पटाया के इस इवेंट में उनका प्रदर्शन फिर भी यादगार बन गया, क्योंकि वह अपने करियर में पहली बार 200 किग्रा भार उठाने में सफल रहीं।

अप्रैल में ताशकंद में 2021 एशियाई भारोत्तोलन चैंपियनशिप में मीराबाई चानू ने 119 किग्रा भार उठाकर क्लीन एंड जर्क में एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।

इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के लिए खुद को पूरी तरह से तैयार कर लिया, टोक्यो में मीरा ने वो कारनामा किया जिसका हर किसी को इंतजार था, ओलंपिक में रजत पदक जीतकर इस एथलीट ने दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया।

ओलंपिक रिजल्ट

और
ओलंपिक रिजल्ट
परिणाम इवेंट खेल

टोक्यो 2020

S
Women's 49kg
Women's 49kg Weightlifting
ओलंपिक रिजल्ट
परिणाम इवेंट खेल

रियो 2016

#DNF
Flyweight (≤48 kilograms)
Flyweight (≤48 kilograms) Weightlifting

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